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डॉ. दर्पण टोके को कलेक्टर ने बनाया अस्थायी तौर पर सिविल सर्जन
बुरहानपुर। आखिरकार भ्रष्टाचार का दाग बुरहानपुर जिला अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. प्रदीप कुमार मोजेस को भारी पड़ गया। नर्मदापुरम में सीएमएचओ रहते हुए 2 हजार रुपए की रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़े गए डॉ. मोजेस को राज्य शासन ने निलंबित कर दिया है। अब उनके खिलाफ न्यायालय में चालान पेश किया जाएगा और कानूनी लड़ाई शुरू होगी। यह कार्रवाई लोकायुक्त संगठन भोपाल की सख्त अनुशंसा और संचालनालय लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा, भोपाल के निर्देश पर की गई है।
गौरतलब है कि रिश्वत कांड के बाद डॉ. मोजेस को नर्मदापुरम से डिमोट कर बुरहानपुर भेजा गया था, लेकिन यहां भी उनका कार्यकाल विवादों से अछूता नहीं रहा। अब जब चालान पेश करने की स्थिति बनी, तो शासन ने नियमों के तहत उन्हें सस्पेंड कर दिया।
लोकायुक्त के पत्र के बाद गिरी गाज
कुछ दिन पहले ही लोकायुक्त एसपी भोपाल ने प्रमुख सचिव, मध्यप्रदेश शासन को पत्र लिखकर स्पष्ट किया था कि चालान पेश होने की स्थिति में निलंबन अनिवार्य है। इसके पहले 15 दिसंबर 2025 को राज्य सरकार डॉ. मोजेस के खिलाफ अभियोजन चलाने की स्वीकृति दे चुकी थी। इसके बाद शासन के पास निलंबन के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा।
कलेक्टर ने तुरंत बदली व्यवस्था
निलंबन के बाद प्रशासनिक कामकाज प्रभावित न हो, इसके लिए कलेक्टर हर्ष सिंह ने तत्काल आदेश जारी करते हुए डॉ. दर्पण टोके, शल्य क्रिया विशेषज्ञ, को सिविल सर्जन सह मुख्य अस्पताल अधीक्षक, जिला अस्पताल बुरहानपुर का अस्थायी प्रभार आगामी आदेश तक सौंप दिया है।
यह है पूरा रिश्वत कांड
पूरा मामला 29 अप्रैल 2022 का है। उस समय डॉ. प्रदीप मोजेस नर्मदापुरम में सीएमएचओ पद पर पदस्थ थे। उनके साथ एक महिला संविदा लेखा प्रबंधक भी शामिल थी। दोनों ने सहायक ग्रेड-3 मदनमोहन वर्मा से बिल भुगतान के बदले रिश्वत की मांग की। 2 मई 2022 को डॉ. मोजेस ने 2 हजार रुपए, महिला लेखा प्रबंधक ने 3 हजार रुपए रिश्वत के रूप में लिए। इसी दौरान लोकायुक्त टीम ने दोनों को रंगे हाथों दबोच लिया।
राज्य स्तरीय समिति की मुहर
संचालनालय स्वास्थ्य सेवाएं स्तर पर गठित राज्य स्तरीय समिति ने 10 नवंबर 2025 को हुई बैठक में डॉ. मोजेस के खिलाफ अभियोजन की अनुशंसा की थी। लोकायुक्त ने अपने पत्र में मध्यप्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम 1966 के नियम 9(1)(बी) का हवाला देते हुए कहा था कि चालान पेश होते ही शासकीय सेवक का निलंबन अनिवार्य है।
इन धाराओं में चलेगा केस
डॉ. प्रदीप मोजेस के खिलाफ अब भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 के तहत धारा 7, धारा 12, धारा 13(1)(बी), धारा 13(2) (संशोधन 2018), एवं धारा 120-बी भादंवि के अंतर्गत मुकदमा चलेगा।
सवालों के घेरे में स्वास्थ्य विभाग
इस पूरे मामले ने एक बार फिर स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल यह भी है कि रंगे हाथ पकड़े जाने के बाद भी वर्षों तक कार्रवाई क्यों टलती रही? हालांकि अब निलंबन के बाद यह स्पष्ट है कि भ्रष्टाचार पर आखिरकार कार्रवाई तो हुई, लेकिन देर से।
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