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रिश्वत में फंसे सिविल सर्जन पर लोकायुक्त का सख्त एक्शन, निलंबन के लिए प्रमुख सचिव को पत्र

रिश्वत कांड में अभियोजन स्वीकृति के बाद कार्रवाई की बारी, नियम 9(1)(बी) का हवाला—निलंबन “अनिवार्य” बताया

बुरहानपुर। नर्मदापुरम रिश्वत कांड में फंसे बुरहानपुर जिला अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. प्रदीप कुमार मोजेस की मुश्किलें अब निर्णायक मोड़ पर हैं। लोकायुक्त कार्यालय ने प्रमुख सचिव, लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग को पत्र भेजकर डॉ. मोजेस और एक तत्कालीन संविदा लेखापाल के निलंबन की मांग कर दी है। यह पत्र 30 जनवरी को एसपी, विशेष पुलिस स्थापना (लोकायुक्त) भोपाल द्वारा भेजा गया, जो अब सामने आया है।

सूत्रों के मुताबिक, 15 दिसंबर को ही मध्यप्रदेश सरकार ने डॉ. मोजेस के खिलाफ न्यायालय में अभियोजन चलाने की स्वीकृति दे दी थी। इससे पहले भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 7, 12, 13(1)(बी), 13(2) (संशोधन 2018) और धारा 120-बी भादंवि के तहत अभियोजन की अनुमति जारी हो चुकी है।
10 नवंबर 2025 को संचालनालय स्वास्थ्य सेवाएं स्तर पर गठित राज्य स्तरीय समिति ने इस मामले में अभियोजन की अनुशंसा की थी, जिसके आधार पर सरकार ने मंजूरी दी।

पूरा रिश्वत कांड: तारीख-दर-तारीख

लोकायुक्त जांच में सामने आया कि डॉ. मोजेस और एक महिला संविदा लेखा प्रबंधक ने सीएमएचओ कार्यालय, नर्मदापुरम में पदस्थ रहते हुए बिल भुगतान के एवज में रिश्वत मांगी।

  • 29 अप्रैल 2022: सहायक ग्रेड-3 मदनमोहन वर्मा से रिश्वत की मांग।
  • 2 मई 2022: डॉ. मोजेस ने ₹2,000 और महिला लेखा प्रबंधक ने ₹3,000 टेबल पर रखवाए।
  • लोकायुक्त टीम ने मौके पर दबिश देकर दोनों को रंगे हाथों पकड़ा।
“निलंबन अनिवार्य”—नियमों का सीधा हवाला

लोकायुक्त कार्यालय ने अपने पत्र में साफ लिखा है कि एमपी सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1966 के नियम 9(1)(बी) के अनुसार अपराध में चालान प्रस्तुत होने पर संबंधित शासकीय सेवक का निलंबन अनिवार्य है। चूंकि इस प्रकरण में अभियोग पत्र प्रस्तुत हो चुका है, इसलिए तत्काल निलंबन किया जाना नियमसम्मत है।

जवाब से बचते रहे सिविल सर्जन

मामले पर पक्ष जानने के लिए सिविल सर्जन डॉ. प्रदीप मोजेस को कॉल किया गया, लेकिन फोन रिसीव नहीं हुआ।

अब नजर शासन के फैसले पर

अभियोजन की स्वीकृति, चालान की पेशी और लोकायुक्त के सख्त पत्र के बाद सवाल सीधा है—क्या शासन नियमों के मुताबिक तुरंत निलंबन करेगा? या फिर फाइलों में मामला उलझेगा? स्वास्थ्य महकमे में हलचल तेज है, और कार्रवाई पर पूरे प्रदेश की नजरें टिकी हैं।

ये भी पढ़े – लोकायुक्त के बाद स्वास्थ्य विभाग का शिकंजा, सिविल सर्जन को दूसरा कारण बताओ नोटिस

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