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ब्लैकमेलिंग का ‘सिस्टम’ उजागर: पांच लाख की मांग, 50 हजार की वसूली, फोटो-वीडियो से डराया; पहले शाहपुर, अब निंबोला —पुलिस के लिए चुनौती बने आरोपी

— यूट्यूबर संजय दुबे, आरटीआई एक्टिविस्ट आनंद दीक्षित व राकेश सईवाल पर एक और FIR, जमीन सौदे बने कमाई का हथियार

On: December 18, 2025 2:14 PM
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यूट्यूबर संजय दुबे और आरटीआई एक्टिविस्ट आनंद दीक्षित पर ब्लैकमेलिंग केस बुरहानपुर

बुरहानपुर। जिले में खुद को सिस्टम सुधारक, आरटीआई एक्टिविस्ट और यूट्यूबर बताने वाले कुछ चेहरों की असलियत एक-एक कर सामने आ रही है। यूट्यूबर संजय दुबे, आरटीआई एक्टिविस्ट डॉ. आनंद दीक्षित उर्फ सूर्यकांत दीक्षित और राकेश सईवाल पर ब्लैकमेलिंग और रंगदारी का एक और गंभीर मामला दर्ज हुआ है।
निंबोला थाना पुलिस ने हसनपुरा निवासी ग्रामीण की शिकायत पर तीनों के खिलाफ एक्सटॉर्शन, संगठित अपराध और एससी-एसटी एक्ट की धाराओं में एफआईआर दर्ज की है। चौंकाने वाली बात यह है कि तीनों आरोपी पहले से ही ऐसे मामलों में फरार हैं।

जमीन सौदे से शुरू हुई ‘डील’, ब्लैकमेलिंग तक पहुंची

इन्वेस्टिगेशन में सामने आया है कि पूरा मामला खेतिहर भूमि खसरा नंबर 67/2/1 (0.87 हेक्टेयर) से जुड़ा है। हसनपुरा निवासी सुरेश पिता सोमा ने पुलिस को बताया कि पिता की मृत्यु के बाद यह जमीन उसकी मां और भाई के नाम दर्ज हुई थी, जिसे बाद में सुधीर पाटिल निवासी सिरसौदा को बेचने का सौदा किया गया। यहीं से तीनों आरोपियों की एंट्री हुई। आरोप है कि जमीन सौदे की जानकारी जुटाकर तीनों ने फोटो और वीडियो बनाए, फिर इन्हीं को हथियार बनाकर लगातार धमकियां देना शुरू कर दीं।

एक साल तक डराया, बदनाम करने की धमकी, कैश में वसूली

पीड़ित के मुताबिक करीब एक साल तक उसे मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया। पहले पांच लाख रुपये की मांग की गई। डर और सामाजिक बदनामी के भय से सुरेश ने 50 हजार रुपये नकद दे दिए, लेकिन इसके बाद भी आरोपियों की भूख नहीं मिटी। जब पीड़ित ने पैसे देने से इनकार किया, तो फोटो-वीडियो वायरल करने और झूठे मामलों में फंसाने की धमकियां दी गईं। आखिरकार मजबूर होकर उसने निंबोला थाने में शिकायत दर्ज कराई।

जातिसूचक शब्द, SC-ST एक्ट—आरोप और गहरे

शिकायत में यह भी दर्ज है कि पैसे की मांग के दौरान आरोपियों ने जातिसूचक शब्दों का प्रयोग कर अपमानित किया। इसी आधार पर पुलिस ने मामले में एससी-एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम की धाराएं जोड़ी हैं, जिससे प्रकरण और गंभीर हो गया है।

शाहपुर में पहले ही खुल चुकी है पोल

यह केस अकेला नहीं है। करीब 25 दिन पहले शाहपुर थाना पुलिस भी इन्हीं तीनों आरोपियों के खिलाफ सरकारी पट्टे की जमीन की रजिस्ट्री के नाम पर रंगदारी वसूलने का मामला दर्ज कर चुकी है। उस प्रकरण में आरोप है कि जमीन खरीदार सुधीर पटेल से 10 लाख रुपये की मांग की गई, जिसमें से ढाई लाख रुपये पहले ही वसूले जा चुके हैं। यानी तरीका वही—जमीन, डर, वीडियो और फिर कैश।

कलेक्टर कोर्ट का आदेश और ‘साफ छवि’ की कोशिश

इन्वेस्टिगेशन में यह भी सामने आया है कि कलेक्टर न्यायालय ने पट्टे की जमीन की बिक्री को शून्य करने के निर्देश दिए थे। इसी फैसले के बाद आरोपी आनंद दीक्षित और राकेश सईवाल कलेक्टर कार्यालय पहुंचे और जनसुनवाई में जिला पंचायत सीईओ को तुलसी का पौधा भेंट कर खुद को सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में पेश किया। सवाल यह है—क्या यह सब सिस्टम सुधार था या इमेज मैनेजमेंट?

एक माह से फरार, पुलिस के लिए सिरदर्द

तीनों आरोपी यूट्यूबर संजय दुबे, आरटीआई एक्टिविस्ट डॉ. आनंद दीक्षित उर्फ सूर्यकांत दीक्षित और राकेश सईवाल करीब एक माह से फरार हैं। शाहपुर थाना प्रभारी अखिलेश मिश्रा के अनुसार लगातार दबिश दी जा रही है, लेकिन अब तक कोई ठोस सुराग हाथ नहीं लगा है।

रासुका या जिलाबदर—अब निर्णायक मोड़

पुलिस सूत्रों का कहना है कि डॉ. आनंद दीक्षित और संजय दुबे के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (रासुका) या जिलाबदर की कार्रवाई का प्रस्ताव तैयार कर लिया है। सूत्र बताते हैं कि आरोपियों के खिलाफ पहले से ही जिला अस्पताल घोटाला, ब्लैकमेलिंग, रंगदारी और धमकी जैसे कई प्रकरण दर्ज हैं।अब इन्हीं मामलों को आधार बनाकर कड़ी कार्रवाई की तैयारी है।

गिरफ्तारी के लिए टीमें गठित

निंबोला थाना प्रभारी राहुल कांबले ने कहा आरोपियों के खिलाफ एक्सटॉर्शन, संगठित अपराध और एससी-एसटी एक्ट सहित गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। गिरफ्तारी के लिए टीमें गठित की गई हैं।

अब बड़ा सवाल

क्या खुद को सिस्टम का प्रहरी बताने वाले लोग असल में ब्लैकमेलिंग का संगठित नेटवर्क चला रहे थे? और क्या पुलिस की अगली कार्रवाई इस नेटवर्क की जड़ तक पहुंचेगी?

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