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फर्जी दस्तावेज, वक्फ ज़मीन और स्कूल की मान्यता का पूरा खेल!
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वक्फ की संपत्ति पर चल रही स्कूल, पहले फर्जी तरीके से जमा कराए थे दस्तावेज
बुरहानपुर। पूर्व विधायक हमीद काजी अध्यक्ष आजाद एजुकेशन सोसायटी के खिलाफ 2021 में फर्जी दस्तावेज प्रस्तुत कर स्कूल की मान्यता लिए जाने के मामले में तत्कालीन कलेक्टर ने एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए थे, लेकिन तब यहां पदस्थ रहे जिला शिक्षाधिकारी ने इस मामले को दबा दिया। अब फिर एक बार निमाड़ वैली इंटरनेशल स्कूल को मान्यता मिल गई है। हालांकि इस बार यह मान्यता कोर्ट के निर्देश पर मिली है, क्योंकि कोर्ट ने बिना रजिस्टर्ड किरायानामा किए भी स्कूल की मान्यता देने के निर्देश शिक्षा विभाग को दिए हैं। डीपीसी रविंद्र महाजन ने स्वीकारा है कि तत्कालीन कलेक्टर ने पूर्व विधायक के खिलाफ एफआईआर के निर्देश दिए थे।
यह है पूरा मामला
दरअसल आजाद एजुकेश सोसायटी के अध्यक्ष पूर्व विधायक हमीद काजी की गणपति नाका के पास निमाड़ वैली इंटरनेशनल स्कूल है। इसका संचालन वर्तमान में उनके बेटे नूर काजी करते हैं। 2021 में डीईओ ने स्कूल की जांच की थी। तब पूर्व विधायक को दस्तावेजों के साथ उपस्थित रहने को कहा गया था, लेकिन उनके द्वारा जो छायाप्रति दी गई थी वह किसके द्वारा सत्यापित की गई थी यह स्पष्ट नहीं था। स्कूल की मान्यता के लिए उन्होंने लीज डीड जो कि ऐमागिर्द कब्रिस्तान कमेटी बुरहानपुर, मप्र वक्फ पंजीयन नंर 145-593 की ओर से सचिव मोहम्मद सईद खान निवासी बैरी मैदान की ओर से हमीद उद्दीन काजी के बीच की गई थी जिसकी अवधि 3 साल थी। जांच में पाया गया था कि हमीद काजी के नाम से मप्र वक्फ बोर्ड में किरायेदारी नहीं है। कोई किरायानामा निष्पादित नहीं किया गया है। जांच के दौरान प्यारे साहब अशरफी की ओर से शपथ पत्र प्रस्तुत किया गया जिसमें कहा गया कि 2015 से 2017 तक वक्फ कब्रिस्तान कमेटी ऐमागिद के अध्यक्ष रहे हैं। इस दौरान 3 एकड़ जमीन आजाद एजुकेशन सोसायटी के अध्यक्ष हमीद काजी को बिना अनुज्ञा आवंटित की गई है। कब्रिस्तान को अन्य प्रयोजन के लिए अवैध रूप से अनुमति ली गई है। इसे निरस्त किया जाए। पूर्व विधायक ने इसके बाद भी कब्जा नहीं छोड़ा। उनके द्वारा करोड़ों की धोखाधड़ी की गई। जांच प्रतिवेदन के आधार पर तत्कालीन कलेक्टर ने पूर्व विधायक हमीद काजी के खिलाफ एफआईआर कराने के लिए कहा था।
वक्फ कब्रस्तान ऐमागिर्द में दर्ज है भूमि
एक पत्र के अनुसार खसरा नंबर 222 रकबा 9.923 हेक्टेयर वक्फ संपत्ति कब्रस्तान ऐमागिर्द वक्फ बोर्ड कार्यालय में दर्ज है। जिसकी देखरेख के लिए कमेटी का गठन किया गया है। इसके अध्यक्ष प्यारे साहब अशरफी थे। यहां पूर्व विधायक ने यह कहकर बाधा डाली थी कि इस खसरे में हमारे पास तीन एकड़ की जगह वक्फ बोर्ड से सीधे किरायेदारी पर है इसलिए हम बाउंड्रीवाल नहीं बनाने देंगे। जबकि उनके नाम से वक्फ में किरायेदारी नहीं थी। तब लोकायुक्त में भी इसकी शिकायत हुई थी। साथ ही 2017 में वक्फ बोर्ड के सीईओ ने भी बाउंड्रीवाल निर्माण में व्यवधान डालने वाले लोगों पर एफआईआर दर्ज करने के लिए कलेक्टर को पत्र लिखा था।
वर्जन-
पहले रजिस्टर्ड किरायानामा नहीं था
स्कूल के मामले में पहले उनका रजिस्टर्ड किराया नामा नहीं था, लेकिन बाद में कोर्ट के आदेश जारी हुए थे। इसके कारण कोर्ट के आदेश से मान्यता जारी की गई। स्कूल की जांच पहले यहां पदस्थ रहे जिला शिक्षाधिकारी ने की थी। उस समय कलेक्टर ने एफआईआर के निर्देश दिए थे। तब कार्रवाई क्यों नहीं हुई यह उस समय के डीईओ, बीईओ ही बता पाएंगे।
– रविंद्र महाजन, डीपीसी बुरहानपुर