बुरहानपुर। 6 सितंबर की शाम घर से मोटरसाइकिल लेकर निकला मालसिंह वापस नहीं लौटा। परिवार उसे तलाशता रहा। मामला अपहरण के संदेह से शुरू हुआ, लेकिन पुलिस की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ी, कहानी कथित हत्या तक पहुंच गई। आरोपी पकड़े गए, पूछताछ में वारदात की परतें खुलीं, लेकिन पुलिस के सामने सबसे बड़ा सवाल था—मालसिंह का शव आखिर है कहां?
करीब एक महीने तक यही सवाल जांच की सबसे अहम कड़ी बना रहा। आमगांव के जंगल से लेकर आरोपियों के बताए संभावित ठिकानों तक पुलिस ने तलाश की। फॉरेंसिक टीम उतरी, डॉग स्क्वॉड लगाया गया और ड्रोन से इलाका खंगाला गया। आखिरकार 7 अक्टूबर को नांदुरा डैम के बैकवॉटर से शव के अवशेष बरामद हुए। अब इन अवशेषों का पोस्टमार्टम और DNA परीक्षण कराया जाएगा। इससे वैज्ञानिक रूप से पुष्टि की जाएगी कि बरामद अवशेष मालसिंह के ही हैं या नहीं।
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6 सितंबर: बाइक लेकर निकला, फिर नहीं लौटा
पुलिस के मुताबिक घटना की शुरुआत 6 सितंबर को हुई। शाम करीब 4 बजे मालसिंह अपनी होंडा शाइन मोटरसाइकिल MP-68-MH-5327 लेकर घर से निकला था। रात तक वापस नहीं आने पर परिवार ने उसकी तलाश शुरू की, लेकिन कोई पता नहीं चला। परिजनों को आशंका थी कि किसी अज्ञात व्यक्ति ने उसे बहला-फुसलाकर अगवा कर लिया और कहीं छिपाकर रखा है। शिकायत पर खकनार पुलिस ने अपराध क्रमांक 425/2026 दर्ज कर बीएनएस की धारा 140(3) के तहत जांच शुरू की। उस वक्त पुलिस के पास मामला गुमशुदगी से आगे बढ़कर संदिग्ध अपहरण का था। लेकिन जांच में मिले सुरागों ने पूरे घटनाक्रम की दिशा बदल दी।
संदिग्धों से पूछताछ हुई तो जांच हत्या की तरफ मुड़ी
पुलिस ने मालसिंह की गतिविधियों, उसके संपर्क और घटना वाले दिन की परिस्थितियों को खंगालना शुरू किया। जांच के दौरान मिली जानकारियों के आधार पर कुछ संदिग्धों से पूछताछ की गई। पुलिस का दावा है कि पूछताछ में सामने आया कि जगन, प्रताप, लालसिंह और दो विधि-विरुद्ध बालकों ने कथित तौर पर मालसिंह की हत्या की योजना बनाई थी। इसके बाद पुलिस की जांच का फोकस लापता व्यक्ति को तलाशने से बदलकर कथित हत्या की पूरी कड़ी जोड़ने पर आ गया।
शाम 6 बजे खेत के पास बुलाया, वहीं मौत के घाट उतारने का आरोप
पुलिस जांच के मुताबिक आरोपियों ने मालसिंह को शाम करीब 6 बजे अपने खेत के पास बने एक छोटे तालाब के नजदीक बुलाया था। मालसिंह अपनी मोटरसाइकिल से बताए गए स्थान पर पहुंचा। पुलिस का आरोप है कि वहां मौजूद लोगों ने एकजुट होकर उस पर डंडों और पत्थरों से हमला किया। इसके बाद गला दबाकर उसकी हत्या कर दी गई। यानी जिस मालसिंह को परिवार एक महीने तक वापस आने की उम्मीद में तलाश रहा था, पुलिस की जांच के मुताबिक उसकी हत्या उसी दिन कर दी गई थी।
हत्या के बाद असली चुनौती थी शव को गायब करना
इस मामले का सबसे सनसनीखेज पहलू हत्या के बाद शव को ठिकाने लगाने के कथित तरीके को लेकर सामने आया है। पुलिस के मुताबिक आरोपियों ने शव को खेत में लगी ड्रिप लाइन की मदद से मोटरसाइकिल के साथ बांधा। इसके बाद शव को नांदुरा के बड़े तालाब तक ले जाकर पानी में फेंक दिया गया। पुलिस का दावा है कि शव को इस तरह बांधने के पीछे मकसद था कि वह पानी की सतह पर न आए। यदि शव ऊपर नहीं आता तो हत्या का प्रत्यक्ष सबूत मिलने में देरी हो सकती थी। यही वजह रही कि आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद भी पुलिस के लिए केस की एक बेहद महत्वपूर्ण कड़ी—शव की बरामदगी—बाकी थी।
आरोपी पकड़े गए, लेकिन शव नहीं मिला; यहीं अटकी थी जांच की अहम कड़ी
पुलिस ने मामले में चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया और दो विधि-विरुद्ध बालकों को अभिरक्षा में लिया, लेकिन शव बरामद नहीं होने से जांच अधूरी थी। पुलिस के अनुसार पूछताछ के दौरान उसे गुमराह करने की कोशिश भी की गई, ताकि मालसिंह का शव बरामद नहीं हो सके। इसी कारण जांच टीम ने केवल आरोपियों के बयानों पर निर्भर रहने के बजाय संभावित ठिकानों को खंगालना शुरू किया।
आमगांव का जंगल छाना, ड्रोन उड़ाया; डॉग स्क्वॉड और फॉरेंसिक टीम भी उतरी
पुलिस अधीक्षक आशुतोष बागरी के मार्गदर्शन में मालसिंह की तलाश के लिए व्यापक सर्च ऑपरेशन चलाया गया। आमगांव के जंगल और आसपास आरोपियों द्वारा बताए गए स्थानों पर सघन कॉम्बिंग की गई। फॉरेंसिक टीम को लगाया गया। डॉग स्क्वॉड की मदद ली गई और ऐसे स्थानों को ड्रोन कैमरे से खंगाला गया जहां सामान्य तरीके से तलाश मुश्किल थी। लेकिन शव का पता नहीं चला। जांच टीम ने तलाश बंद नहीं की और नांदुरा डैम तथा उसके बैकवॉटर क्षेत्र पर फोकस बढ़ाया।
7 अक्टूबर: बैकवॉटर में मिले अवशेष, एक महीने बाद मिली जांच की अहम कड़ी
लगातार चल रहे सर्च ऑपरेशन में 7 अक्टूबर को नांदुरा डैम के बैकवॉटर से मानव शव के अवशेष बरामद किए गए। मालसिंह के लापता होने के करीब एक महीने बाद हुई यह बरामदगी जांच की महत्वपूर्ण कड़ी मानी जा रही है। हालांकि पुलिस केवल परिस्थितिजन्य पहचान पर निर्भर नहीं रहेगी। बरामद अवशेषों का पोस्टमार्टम कराया जा रहा है और DNA परीक्षण के जरिए यह वैज्ञानिक पुष्टि की जाएगी कि वे मालसिंह के ही हैं।
शव छिपाने में मदद करने का आरोप, रडतिया भी गिरफ्तार
पुलिस ने जांच के दौरान रडतिया पिता गोरेलाल अखाड़े (22), निवासी आमगांव को भी गिरफ्तार किया है। पुलिस का आरोप है कि उसने शव को छिपाने में सहयोग किया। इसके अलावा पुलिस ने जगन पिता रिछु वास्कले (30), निवासी आमगांव; प्रताप पिता कालू अखाड़े (21), निवासी मगरडोह और लालसिंह पिता सरदार गोथरे (22), निवासी मगरडोह को गिरफ्तार किया है। मामले में दो विधि-विरुद्ध बालकों को भी अभिरक्षा में लिया गया है। इस तरह प्रकरण में अब तक चार वयस्क आरोपी गिरफ्तार किए जा चुके हैं और दो विधि-विरुद्ध बालकों के खिलाफ कार्रवाई की गई है।
अपहरण की FIR से कथित हत्या तक ऐसे जुड़ती गई कड़ियां
इस केस में पुलिस जांच की पूरी दिशा शव मिलने से पहले ही बदल चुकी थी। शुरुआत मालसिंह के अचानक गायब होने और संभावित अपहरण से हुई। इसके बाद संदिग्धों से पूछताछ में कथित हत्या की जानकारी सामने आई। फिर आरोपियों की गिरफ्तारी हुई और कथित वारदात का तरीका सामने आया। लेकिन शव नहीं मिलने से जांच की सबसे अहम भौतिक कड़ी गायब थी। अब बैकवॉटर से अवशेष मिलने के बाद पुलिस के सामने तीन महत्वपूर्ण वैज्ञानिक पहलू होंगे—DNA से पहचान की पुष्टि, पोस्टमार्टम से उपलब्ध हो सकने वाले साक्ष्य और बरामद अवशेषों को आरोपियों के कथित बयान व अन्य साक्ष्यों से जोड़ना। इन वैज्ञानिक जांचों के नतीजे आगे मामले की विवेचना में महत्वपूर्ण होंगे।
IG-DIG के निर्देशन में चली जांच
पूरी कार्रवाई पुलिस महानिरीक्षक अनुराग और उप पुलिस महानिरीक्षक सिमाला प्रसाद के निर्देशन तथा पुलिस अधीक्षक आशुतोष बागरी के मार्गदर्शन में की गई। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक प्रदीप शेंडे और एसडीओपी नेपानगर वैभव प्रिया (भापुसे) के नेतृत्व में थाना प्रभारी खकनार अभिषेक जाधव एवं उनकी टीम ने आरोपियों की गिरफ्तारी और शव की तलाश का अभियान चलाया।
जांच के सामने अब अहम सवाल
शव के अवशेष मिलने से पुलिस को बड़ी कड़ी जरूर मिली है, लेकिन विवेचना अभी समाप्त नहीं हुई है। हत्या की कथित योजना के पीछे वास्तविक कारण क्या था? वारदात में किसकी क्या भूमिका रही? शव को ठिकाने लगाने की पूरी प्रक्रिया क्या थी? और उपलब्ध वैज्ञानिक साक्ष्य आरोपियों के खिलाफ घटनाक्रम को किस हद तक पुष्ट करते हैं? इन पहलुओं की तस्वीर आगे की जांच, DNA रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों से और स्पष्ट होगी।
एक महीने पहले अपहरण की आशंका के साथ शुरू हुआ यह मामला अब कथित तौर पर सुनियोजित हत्या और शव छिपाने की गंभीर वारदात में बदल चुका है। नांदुरा डैम के बैकवॉटर से मिले अवशेष इस केस की महत्वपूर्ण कड़ी हैं, लेकिन अदालत में आरोप सिद्ध करने के लिए पुलिस को कथित घटनाक्रम को वैज्ञानिक और अन्य साक्ष्यों की मजबूत श्रृंखला से जोड़ना होगा।

