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13 पिस्टल-45 कारतूस की खेप: पांचौरी से ओझर तक कैसे पहुंच रहे थे हथियार? करीब दो महीने बाद सप्लायर मेहमानसिंह-जसबीर पुलिस के हत्थे चढ़े  

9 अगस्त को जंगल में हथियारों के साथ पकड़ा गया था शक्तिसिंह; पूछताछ में खुले पांचौरी के तार

बुरहानपुर। खकनार के जंगल में एक युवक के पास एक-दो नहीं बल्कि 13 हस्तनिर्मित पिस्टल और 45 जिंदा कारतूस आखिर कहां से आए? इतनी बड़ी खेप किसे पहुंचाई जानी थी? इसके पीछे सिर्फ तीन लोग हैं या अवैध हथियारों की खरीद-बिक्री की कड़ी और आगे तक जुड़ी हुई है? करीब दो महीने पुराने अवैध हथियार मामले में दो फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद अब ये सवाल अहम हो गए हैं।

Sadaiv News
खकनार अवैध हथियार मामले में पांचौरी के दो आरोपी गिरफ्तार, 13 पिस्टल और 45 कारतूस का मामला

खकनार पुलिस ने पांचौरी निवासी मेहमानसिंह और जसबीर को गिरफ्तार किया है। पुलिस का दावा है कि 9 अगस्त को ओझर निवासी शक्तिसिंह के कब्जे से बरामद 13 पिस्टल इन्हीं दोनों ने उसे उपलब्ध कराई थीं। शक्तिसिंह पहले ही गिरफ्तार हो चुका है। इस तरह मामले में अब तक तीन आरोपी पुलिस की गिरफ्त में आ चुके हैं। लेकिन 13 पिस्टल और 45 कारतूस की बरामदगी इस मामले को सामान्य आर्म्स एक्ट की कार्रवाई से कहीं अधिक गंभीर बनाती है। अब जांच की असली दिशा यह होनी चाहिए कि हथियार बने कहां, शक्तिसिंह तक क्यों पहुंचाए गए और आखिर इनकी डिलीवरी किसे होनी थी?

जंगल में पेड़ के नीचे बैठा मिला युवक, तलाशी ने खोल दी हथियारों की खेप

दरअसल मामले की शुरुआत 9 अगस्त 2026 से हुई। खकनार थाना प्रभारी निरीक्षक अभिषेक जाधव को मुखबिर से सूचना मिली कि ग्राम खकनार के जंगल में पेड़ के नीचे एक युवक अवैध हथियार लेकर बैठा है। पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर घेराबंदी की और दबिश दी। यहां पुलिस ने शक्तिसिंह पिता बादलसिंह पटवा, उम्र 23 वर्ष, निवासी ग्राम ओझर, जिला बड़वानी को पकड़ा। तलाशी हुई तो पुलिस को उसके पास से 13 हस्तनिर्मित पिस्टल, एक खाली मैगजीन और 45 जिंदा कारतूस मिले। एक मोटरसाइकिल भी जब्त की गई। पुलिस के अनुसार जब्त हथियार, कारतूस और मोटरसाइकिल सहित कुल मशरूका करीब 4 लाख 92 हजार रुपए का था। इतनी संख्या में हथियार मिलने से यह साफ था कि मामला केवल व्यक्तिगत रूप से एक अवैध पिस्टल रखने तक सीमित नहीं था। इसके बाद पुलिस ने हथियारों के स्रोत तक पहुंचने के लिए शक्तिसिंह से पूछताछ शुरू की।

पूछताछ में पांचौरी कनेक्शन: शक्तिसिंह ने बताए दो नाम

पुलिस के मुताबिक शक्तिसिंह से पूछताछ में पांचौरी निवासी मेहमानसिंह और जसबीर के नाम सामने आए। पुलिस का दावा है कि शक्तिसिंह ने बताया कि उसके पास से जब्त किए गए हथियार उसे इन्हीं दोनों ने दिए थे। इसके बाद खकनार पुलिस ने दोनों आरोपियों की तलाश शुरू की, लेकिन वे पुलिस की गिरफ्त से बाहर रहे। 9 अगस्त को हथियारों की खेप पकड़ी गई और दोनों की गिरफ्तारी 5 अक्टूबर को हुई। यानी पुलिस को इन तक पहुंचने में करीब दो महीने लगे। इस बीच दोनों कहां रहे, किसके संपर्क में थे और हथियारों के इस कथित नेटवर्क की अन्य कड़ियां क्या हैं—इन पहलुओं पर पुलिस की विस्तृत जांच महत्वपूर्ण होगी।

5 अक्टूबर को मिली खबर, पांगरी रोड पर बिछाया जाल

5 अक्टूबर को खकनार पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली कि फरार आरोपी मेहमानसिंह और जसबीर पांगरी रोड की तरफ आने वाले हैं। पुलिस टीम ने इलाके में घेराबंदी की और दोनों को पकड़ लिया। गिरफ्तार आरोपियों में मेहमानसिंह पिता दारासिंह बावरी, जाति सिकलीगर, निवासी पांचौरी और जसबीर पटवा, जाति सिकलीगर, उम्र 22 वर्ष, निवासी पांचौरी शामिल हैं। पुलिस के मुताबिक पूछताछ में दोनों ने बताया कि 9 अगस्त को हथियार ओझर निवासी शक्तिसिंह को दिए गए थे।

सबसे बड़ा सवाल—13 पिस्टल शक्तिसिंह को क्यों दी गईं?

दो आरोपियों की गिरफ्तारी के बावजूद इस केस की कई महत्वपूर्ण कड़ियां अभी सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं हैं। 13 पिस्टल आखिर शक्तिसिंह को किस उद्देश्य से दी गई थीं? यदि हथियार आगे सप्लाई किए जाने थे तो इनके खरीदार कौन थे? एक साथ 13 पिस्टल की खेप तैयार करने या जुटाने के पीछे कौन था? 45 जिंदा कारतूस कहां से आए? हथियारों के बदले कितनी रकम तय हुई थी? क्या पहले भी इसी रास्ते से हथियार सप्लाई किए गए? और क्या इस नेटवर्क से जुड़े दूसरे लोग भी हैं? इन सवालों के जवाब सामने आने पर ही यह स्पष्ट होगा कि पुलिस ने हथियार तस्करी की पूरी चेन तोड़ी है या फिलहाल उसकी कुछ कड़ियां ही हाथ लगी हैं।

पांचौरी से ओझर तक की कड़ी, अब नेटवर्क की तह तक पहुंचना चुनौती

इस मामले में गिरफ्तार लोगों के बताए ठिकानों को देखें तो पुलिस जांच की कड़ी पांचौरी से ओझर तक पहुंचती दिखाई दे रही है। पुलिस के अनुसार पांचौरी के मेहमानसिंह और जसबीर ने हथियार ओझर निवासी शक्तिसिंह को दिए। इसके बाद शक्तिसिंह 13 पिस्टल और 45 कारतूस के साथ खकनार के जंगल में पकड़ा गया। यहीं से अगला सवाल पैदा होता है—शक्तिसिंह इस चेन का आखिरी व्यक्ति था या बीच की कड़ी? यदि वह सिर्फ हथियार लेकर आगे पहुंचाने वाला था तो अंतिम खरीदारों तक पहुंचना जांच की अहम कड़ी होगी। वहीं यदि हथियार उसी के लिए थे तो इतनी बड़ी संख्या में पिस्टल रखने का उद्देश्य भी जांच का विषय है।

हथियार कहां बने? जांच का सबसे अहम सिरा

पुलिस प्रेस नोट में जब्त पिस्टलों को “हस्तनिर्मित” बताया गया है। ऐसे में हथियारों के वास्तविक निर्माण स्रोत का पता लगाना इस केस का अहम हिस्सा बन जाता है। पुलिस को यह पता लगाना होगा कि इन 13 पिस्टलों का निर्माण किसने किया, कहां किया और इन्हें आरोपियों तक किस माध्यम से पहुंचाया गया। इसके साथ ही 45 जिंदा कारतूसों की सप्लाई चेन भी अलग जांच का विषय है। पिस्टल के साथ इतनी संख्या में कारतूसों की मौजूदगी से पूरे नेटवर्क के स्रोत तक पहुंचने की जरूरत और बढ़ जाती है।

दो महीने बाद गिरफ्तारी, अब पूछताछ से खुल सकती हैं दूसरी कड़ियां

9 अगस्त को शक्तिसिंह की गिरफ्तारी के बाद मेहमानसिंह और जसबीर फरार थे। करीब दो महीने बाद दोनों पुलिस के हाथ लगे हैं। अब पुलिस की पूछताछ से यह सामने आ सकता है कि इस दौरान दोनों कहां रहे, किसने उन्हें शरण दी, वे किन लोगों के संपर्क में रहे और अवैध हथियारों के कारोबार से जुड़े अन्य लोगों की इसमें क्या भूमिका है। अगर पुलिस आरोपियों के मोबाइल, कॉल रिकॉर्ड, संपर्कों और लेन-देन की कड़ियों की जांच आगे बढ़ाती है तो हथियारों की सप्लाई चेन से जुड़े अन्य तथ्य भी सामने आ सकते हैं।

तीन आरोपी गिरफ्तार, 4.92 लाख का मशरूका जब्त

मामले में अब तक सामने आए आरोपियों में ओझर निवासी शक्तिसिंह पिता बादलसिंह पटवा (23), पांचौरी निवासी मेहमानसिंह पिता दारासिंह बावरी (23) और जसबीर पटवा (22) शामिल हैं। 9 अगस्त की कार्रवाई में पुलिस ने 13 हस्तनिर्मित पिस्टल, एक खाली मैगजीन, 45 जिंदा कारतूस और एक मोटरसाइकिल जब्त की थी। इसकी कुल कीमत पुलिस ने करीब 4.92 लाख रुपए बताई है। खकनार थाने में अपराध क्रमांक 377/2026 दर्ज कर आर्म्स एक्ट की धारा 25(1-बी)(ए) के तहत कार्रवाई की गई है।

पुलिस की कार्रवाई सफल, लेकिन पूरी कहानी नेटवर्क खुलने के बाद

दो फरार आरोपियों की गिरफ्तारी खकनार पुलिस के लिए महत्वपूर्ण सफलता है, लेकिन 13 पिस्टल और 45 जिंदा कारतूस वाले मामले की पूरी तस्वीर अभी जांच से ही सामने आएगी। इस केस में अब नजर केवल गिरफ्तार आरोपियों पर नहीं, बल्कि हथियार बनाने वाले से लेकर सप्लायर, कैरियर और संभावित खरीदार तक की पूरी चेन पर रहेगी। पुलिस यदि हथियारों के निर्माण स्रोत, पैसों के लेन-देन और अंतिम खरीदार तक पहुंचती है तो यह कार्रवाई अवैध हथियार नेटवर्क पर बड़ा प्रहार साबित हो सकती है। फिलहाल पुलिस की ओर से सार्वजनिक की गई जानकारी तीन आरोपियों और बरामद हथियारों तक सीमित है।

SP के निर्देशन में कार्रवाई

कार्रवाई पुलिस अधीक्षक आशुतोष बागरी के निर्देशन, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक प्रदीप शेण्डे और एसडीओपी नेपानगर वैभव प्रिय के मार्गदर्शन में की गई। कार्रवाई में थाना प्रभारी निरीक्षक अभिषेक जाधव, उपनिरीक्षक सुरेंद्र सिंह राजपूत, प्रधान आरक्षक सतीश सूर्यवंशी, शिवराम कास्हे, संदीप सिंह सोलंकी तथा आरक्षक राकेश डाबर, खुमसिंह नार्वे, विजेंद्र देवल्ये, सुनील धुर्वे, कैलाश मोरे, अर्जुन कसुमरिया और रुपेश कास्हे की भूमिका रही।

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