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मासूम पर सिस्टम की ‘दोहरी मार’: 6 साल की बच्ची पर स्कूल का गेट गिरा, अस्पताल पहुंचे तो स्ट्रेचर नहीं; बेटी को गोद में लेकर भटकता रहा पिता

- जम्बूपानी के प्राथमिक स्कूल में भारी लोहे का गेट छात्रा पर गिरा; कमर-मुंह पर चोट, पिता का आरोप—अस्पताल पहुंचे तो स्ट्रेचर तक नहीं मिला; दोनों विभाग अब बोले-जांच कराएंगे

बुरहानपुर। शाहपुर क्षेत्र के जम्बूपानी में सोमवार को करीब 6 साल की मासूम दो व्यवस्थाओं की कथित लापरवाही के बीच फंस गई। पहले प्राथमिक स्कूल परिसर में उस पर भारी लोहे का गेट गिर गया। ग्रामीणों ने बच्ची को गेट के नीचे से निकाला और परिजन को खबर दी। पिता एंबुलेंस से घायल बेटी को लेकर बुरहानपुर जिला अस्पताल पहुंचे तो यहां एक और परेशानी सामने आई। परिजन का आरोप है कि बच्ची को उतारने के लिए स्ट्रेचर नहीं मिला। पिता घायल बेटी को गोद में उठाकर अस्पताल में इधर-उधर भटकते रहे। गनीमत रही कि हादसे में बच्ची सुरक्षित है। उसे उपचार मिल गया, लेकिन पूरा घटनाक्रम स्कूल की सुरक्षा व्यवस्था से लेकर जिला अस्पताल की व्यवस्थाओं तक गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

Sadaiv News
जम्बूपानी स्कूल में गेट गिरने से घायल छात्रा को बुरहानपुर जिला अस्पताल लेकर पहुंचे परिजन

अब दोनों जिम्मेदार विभाग जांच की बात कह रहे हैं। जनजातीय कार्य विभाग के सहायक आयुक्त भरत जांचपुरे ने स्कूल की घटना को गंभीर बताते हुए जांच और लापरवाही मिलने पर कार्रवाई की बात कही है। वहीं सिविल सर्जन डॉ. दर्पण टोके का कहना है कि अस्पताल में स्ट्रेचर की कमी नहीं है। यदि किसी कर्मचारी ने लापरवाही की है तो जांच के बाद कार्रवाई होगी।

सुबह 10.30 बजे स्कूल पहुंची, परिसर में ही गिर गया गेट

बालिका के रिश्तेदार अजय मेहता के अनुसार करीब छह वर्षीय नीलम सोमवार सुबह लगभग 10.30 बजे स्कूल पहुंची थी। उस समय स्कूल खुला नहीं था, हालांकि वहां एक शिक्षक मौजूद थे। इसी दौरान स्कूल परिसर में लगा लोहे का भारी गेट बच्ची के ऊपर गिर गया। आसपास मौजूद ग्रामीणों ने घटना देखी तो तत्काल दौड़कर पहुंचे। बच्ची को गेट के नीचे से निकाला और परिजन को सूचना दी। हादसे में नीलम के कमर और मुंह पर चोट आई है। इसके बाद परिजन उसे एंबुलेंस से उपचार के लिए बुरहानपुर जिला अस्पताल लेकर पहुंचे।

बड़ा सवाल—स्कूल में भारी गेट गिरा कैसे?

हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल स्कूल परिसर की सुरक्षा व्यवस्था पर है। जिस परिसर में छोटे बच्चे रोज आते-जाते हैं, वहां लगा भारी लोहे का गेट आखिर छात्रा के ऊपर कैसे गिर गया? क्या गेट ठीक तरीके से फिट नहीं था? उसकी स्थिति की पहले जांच हुई थी या नहीं? रखरखाव की जिम्मेदारी किसकी थी? इन सवालों का जवाब फिलहाल जांच के बाद ही सामने आएगा। परिजन ने स्कूल और पंचायत स्तर पर लापरवाही का आरोप लगाया है। अजय मेहता ने कहा कि स्कूल में बाउंड्रीवॉल बनाई जाए और हादसे के लिए जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय कर कार्रवाई की जाए।

स्कूल से अस्पताल पहुंचे, यहां स्ट्रेचर के लिए परेशानी

स्कूल में हादसे के बाद घायल बच्ची को एंबुलेंस से जिला अस्पताल लाया गया, लेकिन परिजन के मुताबिक यहां उन्हें स्ट्रेचर नहीं मिला। पिता बेटी को गोद में उठाकर अस्पताल में इधर-उधर घूमते रहे। यही दावा अस्पताल की व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता है। यदि अस्पताल में पर्याप्त स्ट्रेचर मौजूद थे तो घायल बच्ची के पहुंचने पर उसके परिजन को स्ट्रेचर क्यों नहीं मिल पाया? क्या मौके पर कर्मचारी उपलब्ध नहीं था या स्ट्रेचर तक पहुंचने की व्यवस्था में चूक हुई? इसकी स्थिति भी जांच के बाद साफ होगी।

सिविल सर्जन बोले—स्ट्रेचर पर्याप्त, लापरवाही हुई तो कार्रवाई

सिविल सर्जन डॉ. दर्पण टोके ने अस्पताल में स्ट्रेचर की कमी होने से इनकार किया है। उनका कहना है कि अस्पताल में पर्याप्त संख्या में स्ट्रेचर उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा कि यदि किसी कर्मचारी की ओर से लापरवाही बरती गई है तो मामले की जांच कराई जाएगी और दोषी पाए जाने पर कार्रवाई की जाएगी। ऐसे में सवाल यह भी है कि जब अस्पताल प्रशासन पर्याप्त स्ट्रेचर होने की बात कह रहा है तो घायल बच्ची के पिता को बेटी गोद में लेकर क्यों जाना पड़ा? जांच में इसका जवाब सामने आना जरूरी है।

जनजातीय विभाग को भी घटना की जानकारी बाद में मिली

स्कूल में हुए हादसे को लेकर जनजातीय कार्य विभाग के सहायक आयुक्त भरत जांचपुरे ने कहा कि उन्हें घटना की जानकारी सामने आने के बाद मिली है। उन्होंने मामले को गंभीर बताते हुए जांच कराने की बात कही। जांच में यह भी स्पष्ट होना होगा कि स्कूल परिसर के गेट की स्थिति क्या थी, उसके रखरखाव की जिम्मेदारी किस स्तर पर थी और हादसे को रोकने के लिए जरूरी सुरक्षा इंतजाम किए गए थे या नहीं।

गनीमत रही बड़ा हादसा टला, अब जिम्मेदारी तय करने की बारी

छह साल की बच्ची पर भारी लोहे का गेट गिरने की घटना को सिर्फ एक दुर्घटना मानकर छोड़ना पर्याप्त नहीं होगा। स्कूल परिसर बच्चों के लिए सुरक्षित होना चाहिए। यदि किसी निर्माण, गेट या अन्य भारी ढांचे में तकनीकी खामी या रखरखाव की कमी है तो वह सीधे बच्चों की सुरक्षा से जुड़ा मामला है। दूसरी ओर, घायल मरीज के अस्पताल पहुंचने पर स्ट्रेचर जैसी बुनियादी सुविधा तुरंत मिलना अपेक्षित है। इस मामले में परिजन का आरोप और अस्पताल प्रबंधन का दावा अलग-अलग तस्वीर पेश कर रहे हैं। इसलिए जांच से यह स्पष्ट होना जरूरी है कि चूक कहां और किस स्तर पर हुई।

दो घटनाक्रम, कई सवाल

स्कूल से सवाल: भारी लोहे का गेट बच्ची पर कैसे गिरा? गेट की फिटिंग और रखरखाव कब जांचा गया था? इसकी जिम्मेदारी किसकी थी?

अस्पताल से सवाल: पर्याप्त स्ट्रेचर होने के बावजूद पिता को घायल बेटी गोद में लेकर क्यों जाना पड़ा? मरीज के पहुंचते ही स्ट्रेचर उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी किसकी थी?

जिम्मेदार बोले—जांच कराएंगे

भरत जांचपुरे, सहायक आयुक्त, जनजातीय कार्य विभाग:
“मामला गंभीर है। इसकी जांच कराई जाएगी। अगर लापरवाही बरती गई है तो कार्रवाई की जाएगी।”

डॉ. दर्पण टोके, सिविल सर्जन, बुरहानपुर:
“अस्पताल में पर्याप्त संख्या में स्ट्रेचर मौजूद हैं। अगर किसी कर्मचारी ने लापरवाही बरती है तो जांच कर कार्रवाई की जाएगी।”

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