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स्विमिंग पूल निर्माण घोटाला: तत्कालीन निगम आयुक्त और ठेकेदार पर एफआईआर दर्ज

- जांच में खुला भ्रष्टाचार का बड़ा मामला – शासकीय राशि का दुरुपयोग और आपराधिक षड्यंत्र का आरोप

बुरहानपुर। रेणुका माता मंदिर के पास बने नवनिर्मित स्विमिंग पूल के निर्माण कार्य में भारी अनियमितताओं का खुलासा हुआ है। इस मामले में नगर पालिक निगम बुरहानपुर के तत्कालीन आयुक्त सुरेश रेवाल और निर्माण कार्य के ठेकेदार भूपेंद्र चौहान के खिलाफ गंभीर धाराओं में अपराध दर्ज किया गया है। आरोप है कि दोनों ने मिलकर घटिया निर्माण कराया और शासकीय राशि का दुरुपयोग किया।

दरअसल थाना शिकारपुरा में सहायक आयुक्त रीतेश पाटीदार द्वारा प्रस्तुत आवेदन पत्र के आधार पर यह प्रकरण दर्ज किया गया। आवेदन में बताया गया कि पूर्व आयुक्त और ठेकेदार ने लोकसेवक के पद पर रहते हुए आपराधिक षड्यंत्र रचा और सरकारी धन का गलत इस्तेमाल किया। पुलिस ने मामला दर्ज कर धारा 420 (ठगी), 409 (आपराधिक न्यास भंग) और 120-बी (आपराधिक षड्यंत्र) के तहत विवेचना शुरू कर दी है।

जांच समिति ने दी थी रिपोर्ट

इस मामले की जांच नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग, भोपाल द्वारा गठित समिति ने की थी। समिति ने अपनी रिपोर्ट में साफ कहा कि 6 अप्रैल 2015 से 3 सितंबर 2017 के बीच स्विमिंग पूल निर्माण कार्य में गंभीर अनियमितताएं हुईं। रिपोर्ट के आधार पर शासन ने यह माना कि तत्कालीन आयुक्त सुरेश रेवाल (पदस्थ 5 मार्च 2014 से 23 अगस्त 2017) और ठेकेदार भूपेंद्र चौहान ही जिम्मेदार हैं। शासन ने इनके विरुद्ध आपराधिक प्रकरण पंजीबद्ध करने के निर्देश जारी किए थे।

शासन का निर्देश और एफआईआर

विधानसभा में बुरहानपुर विधायक अर्चना चिटनीस द्वारा उठे प्रश्नों के बाद शासन ने जांच समिति गठित की थी। समिति की रिपोर्ट के आधार पर शासन ने दोषी अधिकारियों और ठेकेदार के विरुद्ध आपराधिक प्रकरण दर्ज कराने के निर्देश जारी किए। निर्माण कार्य से जुड़ी मूल नस्ती पहले ही थाना शिकारपुरा को भेजी जा चुकी थी। अब पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी है।

कैसे हुआ घोटाला?

जांच में सामने आया कि निर्माण कार्य में घटिया सामग्री का उपयोग किया गया। स्विमिंग पूल की संरचना मानकों के अनुरूप नहीं थी। इससे स्पष्ट हुआ कि शासकीय धन का दुरुपयोग कर व्यक्तिगत लाभ लिया गया। पूरे प्रकरण को एक सुनियोजित आपराधिक षड्यंत्र मानते हुए अब पुलिस ने मामले की जांच अपने हाथ में ले ली है।

आगे क्या होगा?

थाना शिकारपुरा पुलिस ने कहा कि आरोप गंभीर हैं। अब विवेचना के दौरान यह जांचा जाएगा कि इस गड़बड़ी से सरकारी खजाने को कितना नुकसान हुआ और क्या इसमें अन्य जिम्मेदार अधिकारी या कर्मचारी भी शामिल थे।फिलहाल मामला दर्ज होने से नगर निगम के कई पुराने कामकाज पर सवाल उठने लगे हैं।

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