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एसपी ऑफिस में आत्मदाह की कोशिश, बोला –मेरी बात कोई नहीं सुनता, मर जाऊं तो शायद सुन ले सरकार

51 वर्षीय किसान बोला – न्याय नहीं मिला तो मरना ही बेहतर

खरगोन। एसपी कार्यालय का नियमित दिन था, अचानक गेट नंबर-2 के बाहर चीख सुनाई दी – अब मैं खुद को आग लगा दूंगा… लोग मुड़े, तब तक 51 वर्षीय सौदानसिंह ठाकुर अपने कपड़ों पर डीजल उड़ेल चुके थे। माचिस जलाने ही वाले थे कि ड्यूटी पर मौजूद आरक्षक भागकर आया, पानी फेंका और उन्हें बचा लिया। कुछ ही सेकंड की देर और सामने एक जिंदा इंसान चीखों में जल रहा होता।

सौदानसिंह ठाकुर, मेनगांव थाना क्षेत्र के पिपराटा गांव के रहने वाले हैं। आंवला और नींबू के छोटे-छोटे पेड़ लगाकर गुजर-बसर करते हैं। उनका आरोप है – गांव की नर्सरी में कुछ लोग हथियार लेकर आए और पेड़ काटने लगे। जब उन्होंने रोका, तो गाली दी, थप्पड़ मारा और लाठी से पीटा। उन्होंने मेनगांव थाने में शिकायत दर्ज कराई, पर कहा गया दोनों पक्ष समझौता कर लो। पांच दिन से थाने और अफसरों के चक्कर काट रहे थे, लेकिन हर जगह निराशा मिली। थककर आज उन्होंने कहा अगर जिंदा रहकर न्याय नहीं मिल रहा, तो मरकर कोशिश कर लेता हूं।

घटना की चश्मदीद तस्वीरें… डीजल की गंध और डरी हुई आंखें
  • सौदानसिंह ने डीजल की बोतल निकाली, खुद पर उड़ेल लिया।
  • आंखों में आंसू, आवाज में कंपकंपी – कोई नहीं सुन रहा… कोई नहीं।
  • वहां मौजूद आरक्षक जितनी तेज दौड़ा, शायद उतनी तेज दौड़ना उसने कभी सीखा ही नहीं था।
  • पानी डालते ही भीड़ जमा हो गई, लोग घबरा गए, कुछ महिलाएं रोने लगीं।

अगर पुलिस जवान एक मिनट भी देर करता तो सामने एक आदमी जलकर राख हो गया होता… – एसपी ऑफिस का एक कर्मचारी

पुलिस का बयान – समझौता हो गया था, इसलिए कार्रवाई नहीं की गई

टीआई पंकज तिवारी का कहना विवाद 4-5 दिन पुराना है। दोनों पक्षों ने उस दिन थाने में माफी मांगी थी। इसलिए एफआईआर नहीं हुई। अब मामला गंभीर है, इसकी जांच की जा रही है। सौदानसिंह का मेडिकल कराया है। लेकिन सौदानसिंह का कहना है माफी मैंने नहीं मांगी थी, माफीनामा पर दबाव में हस्ताक्षर करवाए गए।

अस्पताल से निकला दर्द – सरकार को मेरा मरना जरूरी है क्या?

अस्पताल में ले जाए जाने के बाद सौदानसिंह फूट-फूटकर रो पड़े। उन्होंने कहा मैं किसान हूं, गरीब हूं… मेरी जमीन, मेरे पेड़ ही सबकुछ हैं। उन्हें काट दिया, मुझे पीटा… पर पुलिस ने कहा – बड़े लोगों से मत उलझो। अब क्या करूं? सरकार को मेरी लाश चाहिए तभी कार्रवाई होगी? उनकी बूढ़ी मां अस्पताल के बाहर बैठी थीं, बस इतना कहा – “बेटा बच गया, वरना घर ही उजड़ जाता।

प्रशासन ने बढ़ाई चौकसी, गांव में पुलिस तैनात
  • एसपी ऑफिस की सुरक्षा बढ़ाई गई।
  • गांव पिपराटा में तनाव को देखते हुए पुलिस बल भेजा गया।
  • एसपी ने संपूर्ण मामले की रिपोर्ट मांगी है।
ये सवाल अब पूरे जिले में गूंज रहे हैं…
सवाल जवाब कौन देगा?
क्या पुलिस की लापरवाही ने किसान को आत्मदाह जैसे कदम पर मजबूर किया? प्रशासन
पेड़ों की अवैध कटाई पर कोई कार्रवाई क्यों नहीं? वन विभाग व पुलिस
गरीब की आवाज दब जाती है, पर अमीर की सुनी जाती है? समाज और सिस्टम
क्या न्याय पाने के लिए मरना जरूरी है? यह सवाल पूरा तंत्र से
अंत में एक चुभता सच…

यह घटना सिर्फ एक किसान की पीड़ा नहीं, बल्कि उस व्यवस्था का आईना है जिसमें शिकायत दर्ज करवाने के लिए भी जान दांव पर लगानी पड़ रही है। सौदानसिंह बच तो गए, लेकिन उनका दर्द, उनकी बेबसी… पूरे जिले को झकझोर कर चला गया।

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