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कलेक्टर से न्याय की गुहार- आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं से अवैध वसूली, अधिकारियों पर लगे गंभीर आरोप

सीएम हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराने की सजा? आंगनवाड़ी कार्यकर्ता की सैलरी रोकी गई बुरहानपुर। जिले में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के आर्थिक शोषण से संबंधित गंभीर आरोप सामने आए हैं। आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का कहना है कि सुपरवाइजर और परियोजना अधिकारी विभिन्न बहानों से अवैध वसूली कर रहे हैं, जिससे वे मानसिक और आर्थिक रूप से परेशान […]

  • सीएम हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराने की सजा? आंगनवाड़ी कार्यकर्ता की सैलरी रोकी गई

बुरहानपुर। जिले में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के आर्थिक शोषण से संबंधित गंभीर आरोप सामने आए हैं। आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का कहना है कि सुपरवाइजर और परियोजना अधिकारी विभिन्न बहानों से अवैध वसूली कर रहे हैं, जिससे वे मानसिक और आर्थिक रूप से परेशान हैं। यह बात कलेक्टर को लिखे पत्र में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता ने कही।
ऑडिट के नाम पर अवैध वसूली
आंगनवाड़ी कार्यकर्ता ने आरोप लगाते हुए कहा कि ऑडिट के नाम पर ग्रामीण क्षेत्रों में 1000 और शहरी क्षेत्रों में 1500 से 2500 रु. तक की अवैध वसूली की जा रही है। शासन द्वारा आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को ड्रेस के लिए दी जाने वाली राशि में से भी सुपरवाइजरों द्वारा हिस्सा मांगा जाता है। कई आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के खिलाफ झूठी शिकायतें कर नौकरी से निकाले जाने की धमकी दी जा रही है। कार्य में उपस्थित रहने के बावजूद कई कार्यकर्ताओं की पूरी सैलरी बिना किसी ठोस कारण के रोक दी गई।
सीएम हेल्पलाइन शिकायत पर प्रताड़ना का आरोप
एक आंगनवाड़ी कार्यकर्ता कंचन शिवहरे, जो कि ताजनापुर क्रमांक 2, सेक्टर डोइफोडिया, परियोजना खकनार से जुड़ी हुई हैं, ने जिला कलेक्टर को पत्र लिखकर इस अन्याय के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने बताया कि उन्होंने पूर्व में सीएम हेल्पलाइन पर कार्यालय संबंधी शिकायत दर्ज कराई थी। जब इसे वापस लेने के लिए दबाव डाला गया और उन्होंने मना कर दिया, तो उनके खिलाफ द्वेषवश झूठी शिकायत दर्ज कर दी गई और उनकी एक माह की सैलरी बिना किसी नोटिस के काट ली गई।
आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की स्थिति और चुनौतियाँ
बुरहानपुर में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को न केवल वित्तीय शोषण का सामना करना पड़ रहा है, बल्कि उन्हें प्रशासनिक दबाव और धमकियों से भी जूझना पड़ रहा है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को पहले से ही कम वेतन दिया जाता है और उसमें भी अवैध वसूली की जाती है। कार्यकर्ताओं से कई अतिरिक्त कार्य करवाए जाते हैं, लेकिन उन्हें पर्याप्त संसाधन और समर्थन नहीं दिया जाता। सरकार द्वारा प्रदान की जाने वाली विभिन्न सुविधाओं, जैसे – ड्रेस, स्टेशनरी और अन्य अनुदानों में भी हेरफेर किया जाता है।
साक्ष्य में दिए विभागीय ऐप के स्क्रीनशॉट
कंचन शिवहरे ने इस मामले में विभागीय ऐप के स्क्रीनशॉट, गांववालों के समर्थन पत्र और अन्य सबूत संलग्न करते हुए जिला प्रशासन से निष्पक्ष जांच और न्याय संगत निर्णय की मांग की है। अन्य आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ने भी इस मुद्दे पर अपनी आवाज़ उठाई है और उच्च अधिकारियों से हस्तक्षेप करने का आग्रह किया है।
प्रशासन से न्याय की उम्मीद
आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की यह शिकायत दर्शाती है कि प्रशासनिक धांधली और भ्रष्टाचार एक गंभीर समस्या बनी हुई है। जिला कलेक्टर से अनुरोध किया गया है कि वे इस मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई करें ताकि आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को उनके अधिकार मिल सकें और वे बिना किसी दबाव के अपने कार्य कर सकें।

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