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जिले में अनाज की कालाबाजारी चरम पर, प्रशासन और शासन को भारी नुकसान

प्रशासन के लिए चुनौती अनाज की कालाबाजारी स्थानीय प्रशासन और खाद्य विभाग की भूमिका सवालों के घेरे में बुरहानपुर। शहर में अनाज का काला कारोबार अपने चरम पर है। मंडी के व्यापारी बड़ी चतुराई से जाली बिलों के जरिए शासन और प्रशासन को करोड़ों का चूना लगा रहे हैं। बिना बिल के अनाज की खुलेआम […]

बुरहानपुर। शहर में अनाज का काला कारोबार अपने चरम पर है। मंडी के व्यापारी बड़ी चतुराई से जाली बिलों के जरिए शासन और प्रशासन को करोड़ों का चूना लगा रहे हैं। बिना बिल के अनाज की खुलेआम बिक्री हो रही है। जीएसटी चोरी और कालाबाजारी के इन मामलों में स्थानीय प्रशासन और खाद्य विभाग की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। स्थानीय रेणुका कृषि उपज मंडी परिसर में बिना लायसेंस के भी कई व्यापारियों ने अपना अधिपत्य जमा रखा है। जो नियमों को ताक पर रखकर किसानों से औने-पौने दामों पर उपज खरीदते है।
फर्जी बिल का उपयोग
व्यापारी लाखों-करोड़ों रुपये के जाली बिल बनाकर जीएसटी चोरी कर रहे हैं। साथ ही बिना बिल अनाज की बिक्री बड़े पैमाने पर की जा रही है। हालाँकि इस बात की जानकारी सम्बन्धित विभाग के जिम्मेदार अफसरों को होने के बाद भी कार्रवाई नहीं करना कई सवालों को खड़ा करता है।
महाराष्ट्र के चावल और राशन की कालाबाजारी
महाराष्ट्र से आने वाले चावल और राशन के अनाज की तस्करी और बिना बिल बिक्री की घटनाएं आम हो गई हैं। कुछ दिन पहले शाहपुर में पकड़े गए चावल के ट्रक को आधी रात में रसूखदार नेताओं के हस्तक्षेप से छुड़ा लिया गया। खाद्य विभाग पर व्यापारियों को संरक्षण देने और कार्रवाई की लीपापोती करने के गंभीर आरोप लगे हैं। जांच के नाम पर केवल औपचारिकता निभाकर रिपोर्ट तैयार की जाती है।
नेताओं और व्यापारियों की मिलीभगत
बड़े व्यापारियों और रसूखदार नेताओं के गठजोड़ से कालाबाजारी को बढ़ावा मिल रहा है। कार्रवाई के दौरान अक्सर नेता हस्तक्षेप कर आरोपियों को बचा लेते हैं। जबकि अफसर राजनीतिक दबाव के चलते कार्रवाई करने से बचते नजर आते है। कालाबाजारी के कारण शासन और प्रशासन को जीएसटी चोरी की वजह से भारी नुकसान हो रहा है। ईमानदार व्यापारियों और उपभोक्ताओं को इसका खामियाजा भुगतना पड़ रहा है।
शाहपुर का मामला गर्माया था
हाल ही में शाहपुर में महाराष्ट्र से आया चावल से भरा ट्रक पकड़ा गया। सूत्रों की माने तो न तो चावल का बिल था और न ही कोई वैध दस्तावेज। रसूखदार नेताओं के हस्तक्षेप के कारण खाद्य विभाग ने मामले को दबा दिया और ट्रक को छोड़ दिया।
सख्त जांच और कार्रवाई की दरकार
मंडियों और गोदामों पर नियमित छापेमारी की जाए। जांच प्रक्रिया में पारदर्शिता और कठोरता लाई जाए। रसूखदार नेताओं के दबाव में आकर प्रशासन द्वारा की जाने वाली कार्रवाई रुकनी नहीं चाहिए। खाद्य विभाग के अधिकारियों पर निगरानी बढ़ाई जाए और दोषी पाए जाने पर कठोर कार्रवाई की जाए।
काला कारोबार प्रशासन के लिए चुनौती
बुरहानपुर में अनाज की कालाबाजारी का यह काला कारोबार प्रशासन और शासन के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। सख्त नियम और कार्रवाई के बिना इसे रोक पाना संभव नहीं है। सरकार और प्रशासन को तत्काल कदम उठाने की आवश्यकता है ताकि ईमानदार व्यापार और उपभोक्ता अधिकार सुरक्षित रह सकें।

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