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नगर निगम में हड़कंप: प्रभारी कार्यपालन यंत्री प्रेमकुमार साहू हटाए गए, गाड़ी भी छीनी!

भाजपा पार्षदों के गुस्से के बाद बड़ी कार्रवाई, टेंट लगाकर धरने की थी तैयारी, ऐन वक्त पर प्रभार छीना गया! बुरहानपुर। बुरहानपुर नगर निगम में इन दिनों जबरदस्त घमासान मचा हुआ है। सत्ता में काबिज भाजपा के पार्षद खुद नगर निगम प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोलने को तैयार थे। आरोप थे कि प्रभारी

On: March 19, 2025 4:58 PM
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बुरहानपुर नगर निगम कार्रवाई
  • भाजपा पार्षदों के गुस्से के बाद बड़ी कार्रवाई, टेंट लगाकर धरने की थी तैयारी, ऐन वक्त पर प्रभार छीना गया!

बुरहानपुर। बुरहानपुर नगर निगम में इन दिनों जबरदस्त घमासान मचा हुआ है। सत्ता में काबिज भाजपा के पार्षद खुद नगर निगम प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोलने को तैयार थे। आरोप थे कि प्रभारी कार्यपालन यंत्री प्रेमकुमार साहू और टाइम कीपर विवेक बिसेन पार्षदों से अभद्रता करते हैं, फोन तक नहीं उठाते और काम करने में हीलाहवाली करते हैं। जब शिकायत के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई, तो पार्षद धरने पर बैठने की तैयारी करने लगे। लेकिन जैसे ही नगर निगम आयुक्त संदीप श्रीवास्तव को इसकी भनक लगी, उन्होंने तुरंत दोनों अधिकारियों से चार्ज छीन लिया और शोकाज नोटिस थमा दिया।
Sadaiv Newsयह पहला मौका है जब भाजपा शासित नगर निगम में भाजपा के ही पार्षदों को धरने पर बैठने की नौबत आ गई थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए आयुक्त ने न केवल दोनों अधिकारियों का पद छीन लिया, बल्कि प्रेमकुमार साहू से नगर निगम की सरकारी गाड़ी भी वापस लेने का आदेश जारी कर दिया। इस कार्रवाई के बाद पार्षदों ने धरना टाल दिया, लेकिन निगम के भीतर सत्ता संग्राम का यह मामला तूल पकड़ चुका है।
क्या है पूरा मामला?
भाजपा पार्षदों ने सोमवार को नगर निगम प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए एक ज्ञापन सौंपा था। उनका आरोप था कि प्रभारी कार्यपालन यंत्री प्रेम कुमार साहू और टाइम कीपर विवेक बिसेन का व्यवहार निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के प्रति अपमानजनक है। भाजपा पार्षदों का कहना था कि जब भी कोई पार्षद विकास कार्यों को लेकर संपर्क करता है, तो ये अधिकारी फोन नहीं उठाते। जब पार्षद कार्यालय में जाते हैं, तो उन्हें सही जवाब नहीं दिया जाता और कई बार बदसलूकी की जाती है। टाइम कीपर विवेक बिसेन पर भवन निर्माण नक्शे पास कराने के लिए रिश्वत मांगने का भी आरोप लगाया गया था।विकास और मूलभूत सुविधाओं के काम बाधित हो रहे थे, जिससे पार्षदों में नाराजगी थी।
धरने की थी तैयारी, ऐन वक्त पर हुई कार्रवाई
शिकायत के बाद भी जब तत्काल कोई कार्रवाई नहीं हुई, तो भाजपा पार्षदों ने बुधवार सुबह 11 बजे नगर निगम कार्यालय के सामने धरना देने की घोषणा कर दी। इसके लिए नगर निगम गेट के पास एक टेंट भी लगाया गया था। एमआईसी सदस्य महेंद्र इंगले ने एसडीएम को पत्र लिखकर धरना प्रदर्शन की अनुमति मांगी थी। लेकिन मंगलवार शाम को ही आयुक्त संदीप श्रीवास्तव ने एक आदेश जारी कर टाइम कीपर विवेक बिसेन से भवन अनुमति का चार्ज वापस ले लिया और उन्हें उनके मूल पद पर भेज दिया। साथ ही, प्रभारी कार्यपालन यंत्री प्रेम कुमार साहू और विवेक बिसेन को शोकाज नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया। इस फैसले के बाद भाजपा पार्षदों ने धरना स्थगित कर दिया।
आयुक्त ने कहा- शिकायत पर तत्काल कार्रवाई
नगर निगम आयुक्त संदीप श्रीवास्तव ने कहा पार्षदों की शिकायत पर तत्काल कार्रवाई की गई है। टाइम कीपर विवेक बिसेन को उनके मूल पद पर वापस भेज दिया गया है और प्रभारी कार्यपालन यंत्री प्रेम कुमार साहू को भी कार्यमुक्त कर दिया गया है। दोनों से जवाब तलब किया गया है।
जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा बर्दाश्त नहीं
नगर निगम की इस कार्रवाई से भाजपा पार्षद संतुष्ट तो दिखे, लेकिन उन्होंने आगे भी निगरानी बनाए रखने की बात कही। पार्षदों ने कहा कि यदि नगर निगम प्रशासन में पारदर्शिता और पार्षदों का सम्मान सुनिश्चित नहीं किया गया, तो वे आगे भी विरोध करने से पीछे नहीं हटेंगे। भाजपा पार्षदों के अनुसार यह पहली बार हो रहा है कि नगर निगम में सत्ताधारी पार्टी के पार्षदों को ही धरने पर बैठने की नौबत आ रही थी। नगर निगम प्रशासन को समझना होगा कि निर्वाचित जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इस दौरान भारत इंगले, विनोदराव पाटिल, राजेश महाजन, गौरव शुक्ला, अमित नवलखे, भरत भुजड़े सहित अन्य पार्षद मौजूद रहे।
राजनीतिक मायने– भाजपा में ही अंदरूनी घमासान
यह मामला केवल प्रशासनिक कार्रवाई तक सीमित नहीं है, बल्कि भाजपा की अंदरूनी राजनीति की ओर भी इशारा करता है। नगर निगम में भाजपा का बोर्ड है, लेकिन भाजपा के ही पार्षद निगम अफसरों से नाराज होकर धरने पर बैठने की तैयारी कर रहे थे। यह साफ संकेत है कि निगम के भीतर सत्ता संघर्ष चल रहा है। भाजपा पार्षदों के विरोध से क्या नगर निगम के अंदरूनी समीकरण बदलेंगे? भाजपा के भीतर इस टकराव के राजनीतिक निहितार्थ भी हो सकते हैं।

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