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भूजल स्तर सुधारने की ऐतिहासिक पहल: 19,000 करोड़ की ताप्ती जल पुनर्भरण योजना से 3.57 लाख हेक्टेयर भूमि को लाभ

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दी ताप्ती मेगा रिचार्ज परियोजना को हरी झंडी  अर्चना चिटनिस के प्रयासों से ऐतिहासिक परियोजना को मिली गति बुरहानपुर। देश और दुनिया की अनूठी परियोजनाओं में शामिल “ताप्ती मेगा रिचार्ज योजना” को शुक्रवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने हरी झंडी दे दी। इस ऐतिहासिक बैठक में पूर्व कैबिनेट मंत्री […]

बुरहानपुर। देश और दुनिया की अनूठी परियोजनाओं में शामिल “ताप्ती मेगा रिचार्ज योजना” को शुक्रवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने हरी झंडी दे दी। इस ऐतिहासिक बैठक में पूर्व कैबिनेट मंत्री एवं विधायक अर्चना चिटनिस, जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट सहित मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र के उच्च अधिकारी शामिल हुए। बैठक में परियोजना की विस्तृत प्रस्तुति दी गई और इसके क्रियान्वयन की दिशा में महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।
Sadaiv Newsताप्ती मेगा रिचार्ज परियोजना: क्या है खास?
यह योजना मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र के लिए वरदान साबित होगी। इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य ताप्ती नदी के जल को भूजल स्तर बढ़ाने के लिए पुनर्भरित करना है। इससे बुरहानपुर, खंडवा, जलगांव, बुलढाणा, अकोला और अमरावती जैसे जिलों में पानी की समस्या हल होगी। परियोजना में ताप्ती नदी के समानांतर दोनों किनारों पर नहरों का निर्माण किया जाएगा, जिससे भूजल स्तर को नियंत्रित और पुनर्भरित किया जा सकेगा। भारत सरकार के भूजल बोर्ड ने भी इस योजना की उपयोगिता को मान्यता दी है।
कैसे बढ़ेगा जलस्तर और कृषि उत्पादन?
परियोजना के तहत हर वर्ष 1 लाख करोड़ लीटर (30 टीएमसी) पानी का पुनर्भरण संभव होगा। इससे न केवल कृषि उत्पादन में वृद्धि होगी बल्कि भूजल गुणवत्ता में सुधार, पर्यावरण संरक्षण और सिंचाई सुविधाओं में विस्तार भी होगा।
परियोजना की लागत और लाभ
• अनुमानित लागत: 19,000 करोड़
• लाभ क्षेत्र: 3.57 लाख हेक्टेयर
• सीधी सिंचाई से लाभ: 48,000 हेक्टेयर
• भूजल पुनर्भरण से लाभान्वित क्षेत्र:
o मध्यप्रदेश: 1.23 लाख हेक्टेयर
o महाराष्ट्र: 2.34 लाख हेक्टेयर
अर्चना चिटनिस का योगदान और संकल्प
विधायक अर्चना चिटनिस ने इस परियोजना को साकार करने के लिए 1999 से लगातार प्रयास किए हैं। उन्होंने बताया कि 2009 में पहली बार इस परियोजना पर मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र सरकारों के बीच सहमति बनी थी। वर्ष 2016 में डीपीआर (डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट) तैयार करने के निर्देश दिए गए और अब 2024 में इसे क्रियान्वयन की मंजूरी मिल गई है। उन्होंने कहा, यह परियोजना जल संकट से जूझ रहे क्षेत्रों के लिए जीवनदायिनी साबित होगी। कृषि, पर्यावरण और समाज को इसका अभूतपूर्व लाभ मिलेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा- जलसंकट से राहत मिलेगी
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा,प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में हम पहले ही पार्वती-कालीसिंध-चंबल और केन-बेतवा परियोजनाओं को सफलतापूर्वक लागू कर चुके हैं। अब ताप्ती मेगा रिचार्ज परियोजना से मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र को जलसंकट से राहत मिलेगी।

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