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किसानों के हित में नवलसिंह सहकारी शक्कर कारखाना: विपक्ष की अफवाहों से रहें सतर्क

शिवकुमार सिंह किसान हितैषी पैनल से प्रतिनिधि हर्षित सिंह ठाकुर ने मीडिया से चर्चा के दौरान कहा कारखाने की तरक्की से परेशान विपक्ष, झूठी अफवाहों से किसानों को गुमराह करने की कोशिश बुरहानपुर। किसानों के लिए नवलसिंह सहकारी शक्कर कारखाना हमेशा से एक भरोसेमंद संस्थान रहा है। इस कारखाने के 7,800 सदस्य हैं, जिन्होंने कभी […]

बुरहानपुर। किसानों के लिए नवलसिंह सहकारी शक्कर कारखाना हमेशा से एक भरोसेमंद संस्थान रहा है। इस कारखाने के 7,800 सदस्य हैं, जिन्होंने कभी भी किसी तरह की शिकायत नहीं की, लेकिन एकमात्र व्यक्ति बार-बार झूठी शिकायतें कर संस्थान की छवि खराब करने की कोशिश कर रहा है।
Sadaiv Newsयह बात शिवकुमार सिंह किसान हितैषी पैनल से किसान प्रतिनिधि हर्षित सिंह ठाकुर ने मीडिया से चर्चा के दौरान कही। उन्होंने कहा कारखाने के विस्तार के कारण किसानों के गन्ने की कटाई और क्रासिंग समय पर हुई, जिससे किसानों को राहत मिली। इसके अलावा, क्षेत्र के मध्यम वर्ग के किसानों के बच्चों के लिए इंजीनियरिंग कॉलेज का निर्माण किया गया, जहां 1,500 छात्र शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। यदि यही बच्चे अन्य शहरों में पढ़ते, तो उन्हें रहने और भोजन पर 15,000-20,000 रुपये अतिरिक्त खर्च करने पड़ते। खासकर, जो माता-पिता अपनी बेटियों को बाहर भेजने में असमर्थ थे, उनके लिए यह कॉलेज एक बड़ा सहारा बना है।
शेयर हस्तांतरण और झूठी शिकायतों का पर्दाफाश
हर्षित सिंह ठाकुर ने कहा कारखाने में शेयर होल्डर्स की राशि उनके नाम पर ही जमा होती है, और उनके निधन के बाद यह उनके वारिसों को विधिवत हस्तांतरित कर दी जाती है। शिकायतकर्ता को इस प्रक्रिया की जानकारी नहीं है और लगातार गलत आरोप लगा रहा है। कारखाने द्वारा खरीदी गई फॉर्च्यूनर गाड़ी भी पूरी तरह से वैधानिक अनुमति के बाद ही खरीदी गई है। सात वर्षों से चल रही शिकायतों की सहकारी विभाग द्वारा जांच की गई और उन्हें झूठा पाया गया।
चुनावी प्रक्रिया में हस्तक्षेप और विपक्ष की भूमिका
कारखाने के नियमों के अनुसार, किसी भी उम्मीदवार को चुनाव में भाग लेने के लिए दो साल तक गन्ना आपूर्ति करनी होती है। ऋणी (डिफॉल्टर) सदस्य मतदान नहीं कर सकते। लेकिन प्रशासनिक दबाव के कारण कई वैध मतदानकर्ताओं को अयोग्य ठहराया गया और नामांकन पत्र निरस्त कर दिए गए। हमारे द्वारा 150 नामांकन फॉर्म जमा किए गए थे, जिनमें से केवल 51 को स्वीकार किया गया, जबकि बाकी को दबाव में निरस्त किया गया।
किसानों से अपील: झूठी अफवाहों से सावधान रहें
नवलसिंह सहकारी शक्कर कारखाना हमेशा किसानों के हित में कार्य करता आया है, चाहे वे किसी भी राजनीतिक दल से जुड़े हों। इसके विपरीत, विपक्ष ने क्षेत्र में कोई नया उद्योग स्थापित नहीं किया, बल्कि बहादरपुर सूत मिल, सिटीजन बैंक, ताप्ती मिल, नेपा मिल जैसी इकाइयों को बंद करवा दिया। इससे रोजगार की समस्या बढ़ी और हाल ही में पावरलूम फेडरेशन के बुनकरों को भी आंदोलन करना पड़ा। किसानों को विपक्ष द्वारा फैलाई जा रही झूठी अफवाहों से सतर्क रहने की जरूरत है। नवलसिंह सहकारी शक्कर कारखाना किसानों के हित में काम कर रहा है और आगे भी करता रहेगा।

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