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अर्चना चिटनिस की वर्षों की मेहनत लाई रंग, मुख्यमंत्री ने दी स्वीकृति, खांडा आकार में होगा तीन मंजिला भवन
बुरहानपुर। गुरु गोविंद सिंह जी की पावन स्मृतियों को सहेजने की दिशा में बुरहानपुर को ऐतिहासिक सौगात मिलने जा रही है। दशम गुरु की याद में बन रहा संग्रहालय अब 34 करोड़ की लागत से पूरा होगा। वर्षों से इस प्रोजेक्ट के लिए संघर्ष कर रहीं विधायक व पूर्व मंत्री अर्चना चिटनिस की कोशिशें आखिरकार रंग लाई हैं।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने संग्रहालय निर्माण के लिए 17 करोड़ की अतिरिक्त राशि की सैद्धांतिक स्वीकृति दे दी है। अर्चना दीदी ने इसके लिए सीएम को धन्यवाद देते हुए कहा— बुरहानपुर केवल एक शहर नहीं, ये वो भूमि है जहाँ गुरु चरण पड़े थे, अब ये स्थल आने वाली पीढ़ियों को गर्व, प्रेरणा और चेतना देगा।
विधायक अर्चना चिटनिस ने कहा कि, गुरु गोविंद सिंह जी केवल आध्यात्मिक नहीं, एक वीर योद्धा, लेखक और समाज सुधारक भी थे। उन्होंने 52 कवियों को संरक्षण दिया, कई ग्रंथ लिखे, और सबसे बड़ी बात – एकता, समानता और न्याय की शिक्षा दी।
गुरु गोविंद सिंह जी… 6 माह 9 दिन बुरहानपुर में रहे थे ठहरे
इतिहास गवाह है कि 1708 ई. में नांदेड जाने से पहले गुरु गोविंद सिंह जी ने छह माह नौ दिन तक बुरहानपुर में प्रवास किया था। यहीं पर उन्होंने सुनहरी बीड़ (गुरु ग्रंथ साहब) को लिपिबद्ध करवाया। इस बीड़ में स्वर्ण चित्रकारी की गई थी, और अंतिम पृष्ठ पर गुरु जी ने स्वयं ओंकार लिखा था। यह बीड़ आज भी बुरहानपुर के गुरुद्वारा बड़ी संगत में आस्था का केंद्र है।
खांडा आकार में बनेगा संग्रहालय, होगी ये विशेषताएं
– भवन का निर्माण सिख पंथ के प्रतीक ‘खांडा’ आकार में होगा
– तीन मंजिला भवन: ग्राउंड + फर्स्ट फ्लोर + सेकंड फ्लोर
– कुल क्षेत्रफल: 6279 स्क्वायर मीटर
– 500 सीटर ऑडिटोरियम, पार्किंग, रेन वाटर हार्वेस्टिंग
– गुरु जी की जीवनी, दर्शन, ग्रंथ और कवियों का डिजिटल प्रस्तुतीकरण
दीदी की पहल से ही आया प्रोजेक्ट ट्रैक पर
– पहले स्वीकृत राशि: 17 करोड़
– बजट न आने से कार्य रुका
– दीदी ने लगातार पत्राचार किया – मुख्यमंत्री, वित्त विभाग, पुरातत्व विभाग से
– विधानसभा में उठाया मुद्दा
– अब कुल लागत: 34 करोड़
– केंद्र से भी 9 करोड़ की स्वीकृति प्रक्रिया में
पीएम मोदी की घोषणा से मिली प्रेरणा
गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरु गोविंद सिंह जी की 350वीं जयंती पर इस म्यूजियम की घोषणा की थी। उसी के बाद से अर्चना चिटनिस ने इसे मिशन के रूप में लिया, और तब से लेकर आज तक केन्द्रीय मंत्री राजनाथ सिंह, स्व. सुषमा स्वराज सहित कई नेताओं से व्यक्तिगत संपर्क कर इस प्रोजेक्ट को गति दी।