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खाद्य सुरक्षा की बड़ी कार्रवाई: बिना लाइसेंस चल रहे बुरहानपुर जलेबी नमकीन सेंटर पर प्रकरण दर्ज

- दूध, घी, मावा, तेल और मसालों के 17 नमूने जांच में फेल, 5 मामलों में 1.30 लाख का जुर्माना, कई प्रकरण एडीएम न्यायालय में विचाराधीन

बुरहानपुर। जिले में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता को लेकर खाद्य सुरक्षा विभाग की जांच ने बड़ा खुलासा किया है। दूध, घी, मावा, तेल, मसाले, नमकीन, आइसक्रीम और मिठाई जैसे रोजमर्रा उपयोग में आने वाले खाद्य पदार्थों के नमूने जांच में अमानक और मिथ्याछाप पाए गए हैं। खाद्य विश्लेषक भोपाल से प्राप्त रिपोर्ट के आधार पर विभाग ने कुल 17 प्रकरण एडीएम न्यायालय में प्रस्तुत किए हैं। इनमें से 5 मामलों में न्यायालय द्वारा 1 लाख 30 हजार रुपए का अर्थदंड लगाया गया है, जबकि शेष प्रकरण विचाराधीन हैं।

कलेक्टर हर्ष सिंह के निर्देश पर जिले में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए लगातार निरीक्षण और सैंपलिंग की कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में शुक्रवार को खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने कई प्रतिष्ठानों से मसाले, नमक, बेसन और अन्य खाद्य पदार्थों के नमूने लिए। विभाग की इस कार्रवाई के बाद खाद्य कारोबारियों में हड़कंप की स्थिति है।

मसालों से लेकर बेसन तक के लिए गए नमूने

खाद्य सुरक्षा विभाग ने शुक्रवार को मां एकता मसाला से गरम मसाला और तड़का मसाला, रमनलाल एंड ब्रदर्स से धनिया और कांटा छाप गरम मसाला, महाकाल ट्रेडर्स से हल्दी, मिर्च और धनिया, श्री आनंद स्टोर से नमक तथा गंगा जमुना जी मार्ट से राई, मसाले और बेसन के नमूने लिए। अधिकारियों के अनुसार इन नमूनों को जांच के लिए भेजा जाएगा। रिपोर्ट आने के बाद यदि गुणवत्ता में कमी या मानकों का उल्लंघन पाया जाता है तो संबंधित प्रतिष्ठानों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

जांच रिपोर्ट ने खोली खाद्य पदार्थों की पोल

खाद्य सुरक्षा अधिकारी के अनुसार भोपाल स्थित खाद्य विश्लेषक प्रयोगशाला से प्राप्त रिपोर्ट में विभिन्न प्रतिष्ठानों से पहले लिए गए नमूनों में से 17 नमूने अमानक और मिथ्याछाप पाए गए। इन मामलों को एडीएम न्यायालय में प्रस्तुत किया गया। सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि जांच में वे खाद्य पदार्थ भी मानकों पर खरे नहीं उतरे, जिनका उपयोग आम परिवार रोजाना करते हैं। इनमें दूध, घी, मावा, खाद्य तेल, मसाले और नमकीन जैसे उत्पाद शामिल हैं।

घी और दूध पर 20-20 हजार का जुर्माना

विभागीय जानकारी के अनुसार सई नमकीन, नेपानगर से लिए गए घी के नमूने और न्यू हरिओम डेयरी, मंडी बाजार से लिए गए दूध के नमूने अमानक पाए गए। इन दोनों मामलों में न्यायालय द्वारा 20-20 हजार रुपए का अर्थदंड लगाया गया। इसके अलावा फेमस दूध डेयरी से लिया गया मावा और नितिन होटल से लिया गया धनिया का नमूना भी अमानक पाया गया। इन दोनों प्रकरणों में 30-30 हजार रुपए का जुर्माना लगाया गया।

दूध डेयरियों पर भी कार्रवाई

खाद्य सुरक्षा विभाग की जांच में दूध डेयरियों की गुणवत्ता पर भी सवाल खड़े हुए हैं। अरुण दूध डेयरी से लिया गया दूध का नमूना अमानक पाए जाने पर 25 हजार रुपए का अर्थदंड लगाया गया। वहीं योगेश्वर दूध डेयरी के दूध के नमूने पर 5 हजार रुपए का जुर्माना अधिरोपित किया गया। दूध और मावा जैसे उत्पादों के अमानक पाए जाने से उपभोक्ताओं की सेहत को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि इनका उपयोग मिठाई, चाय, घरेलू भोजन और धार्मिक आयोजनों तक में व्यापक रूप से किया जाता है।

हलवा, तेल, आइसक्रीम और पान मसाला भी जांच में फेल

जांच रिपोर्ट में कई अन्य प्रतिष्ठानों के खाद्य पदार्थ भी अमानक पाए गए हैं। इनमें ए-1 जलेबी सेंटर आजाद नगर का हलवा, एसबी किराना का सोयाबीन तेल, श्री दत्त डेयरी प्रतापपुर का दूध, श्री हरि गोपाल फूड प्रोडक्ट का सोयाबीन तेल, जयसवाल किराना डेड़तलाई का सरसों तेल, जीटी प्रोडक्ट का पान मसाला और वीरेंद्र आइसक्रीम सिंधीपुरा गेट की आइसक्रीम शामिल है। इन उत्पादों के अमानक पाए जाने से यह स्पष्ट होता है कि खाद्य गुणवत्ता को लेकर विभाग अब सख्त निगरानी मोड में है।

मावा रोल, नमकीन और मावा पेड़ा मिथ्याछाप

कुछ खाद्य पदार्थ जांच में मिथ्याछाप श्रेणी में पाए गए हैं। इनमें ट्रैफिक जाम होटल नेपानगर का मावा रोल, रामकृष्ण मिडवे असीरगढ़ का नमकीन और प्रकाश होटल नेपानगर का मावा पेड़ा शामिल है। मिथ्याछाप का अर्थ है कि उत्पाद की पैकिंग, लेबलिंग, विवरण, गुणवत्ता दावे या जानकारी उपभोक्ता को भ्रमित करने वाली पाई गई। ऐसे मामलों में खाद्य सुरक्षा कानून के तहत कार्रवाई की जाती है।

बिना लाइसेंस चल रहा था जलेबी-नमकीन सेंटर

कार्रवाई के दौरान विभाग ने बुरहानपुर जलेबी एवं नमकीन सेंटर के विरुद्ध बिना लाइसेंस खाद्य कारोबार संचालित करने का प्रकरण भी दर्ज किया है। खाद्य सुरक्षा नियमों के अनुसार खाद्य पदार्थों का निर्माण, विक्रय या वितरण करने वाले प्रत्येक प्रतिष्ठान के लिए वैध लाइसेंस या पंजीयन अनिवार्य है। बिना लाइसेंस संचालन को विभाग ने गंभीर लापरवाही मानते हुए प्रकरण दर्ज किया है।

विभाग बोला- नियमित निरीक्षण जारी रहेगा

खाद्य सुरक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि जिले में खाद्य पदार्थ विक्रय करने वाले प्रतिष्ठानों का नियमित निरीक्षण जारी रहेगा। जिन प्रतिष्ठानों से नमूने लिए जा रहे हैं, उनकी रिपोर्ट आने के बाद यदि खाद्य पदार्थ मानकों के अनुरूप नहीं पाए जाते हैं तो संबंधित संचालकों के विरुद्ध खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम 2006 तथा नियम 2011 के तहत कार्रवाई की जाएगी। विभाग ने खाद्य कारोबारियों को चेतावनी दी है कि वे गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता न करें। उपभोक्ताओं की सेहत से खिलवाड़ करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

आपकी थाली में क्या परोसा जा रहा?

जिले में खाद्य विभाग की जांच ने आम उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ा दी है। दूध, घी, मावा, तेल और मसाले जैसे खाद्य पदार्थ हर घर की जरूरत हैं। ऐसे में इनके अमानक पाए जाने से गुणवत्ता नियंत्रण पर गंभीर सवाल उठते हैं। विभाग की कार्रवाई से यह संदेश साफ है कि खाद्य पदार्थों में मिलावट, घटिया गुणवत्ता या गलत लेबलिंग अब भारी पड़ सकती है।

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