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जंगल में नवजात का जन्म, आरोग्यम केंद्र पर ताला: मांडवा की घटना ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठाए सवाल

ग्रामीणों ने महिला को अस्पताल पहुंचाया; वीडियो वायरल होने के बाद प्रशासन हरकत में आया, मां और प्री-मेच्योर नवजात का जिला अस्पताल में उपचार जारी

On: June 5, 2026 8:28 PM
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मांडवा में जंगल में प्रसव के बाद आरोग्यम केंद्र बंद मिलने पर ग्रामीणों में आक्रोश

बुरहानपुर। नेपानगर थाना क्षेत्र की ग्राम पंचायत मांडवा में शुक्रवार सुबह सामने आई घटना ने ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था की जमीनी हकीकत उजागर कर दी। प्रसव पीड़ा से जूझ रही 35 वर्षीय मीराबाई पति भूलसिंग ने जंगल में ही नवजात शिशु को जन्म दे दिया। प्रसव के बाद महिला काफी देर तक बेहोश अवस्था में जंगल में पड़ी रही। इस दौरान उसके साथ उसकी 3-4 वर्ष की मासूम बेटी भी मौजूद थी।

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मांडवा में प्रसव पीड़ा से जूझ रही महिला ने जंगल में नवजात को जन्म दिया।

मामला उस समय सामने आया जब वहां से गुजर रहे मांडवा निवासी एकलव्य भारतीय और उनकी मां किरणबाई किशोर की नजर महिला पर पड़ी। दोनों ने तत्काल मदद की और महिला को उपचार के लिए मांडवा-बोमलियापाठ स्थित आरोग्यम केंद्र लेकर पहुंचे, लेकिन वहां ताला लटका मिला। स्वास्थ्य केंद्र बंद मिलने से ग्रामीणों में नाराजगी फैल गई। इसके बाद महिला को सीवल स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद मां और नवजात को बेहतर इलाज के लिए बुरहानपुर जिला अस्पताल रेफर किया गया।

पांच साल से भवन, लेकिन सुविधा नहीं

ग्रामीण एकलव्य भारतीय ने आरोप लगाया कि मांडवा का आरोग्यम केंद्र बने करीब पांच साल हो चुके हैं, लेकिन आज तक यहां मूलभूत स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध नहीं हो सकीं। ग्रामीणों का कहना है कि करोड़ों रुपए खर्च कर उपस्वास्थ्य केंद्र का भवन तो बना दिया गया, लेकिन इलाज के नाम पर सुविधा नहीं है। केंद्र लंबे समय से बंद रहता है और डॉक्टरों की मौजूदगी भी नियमित नहीं है। ग्रामीणों ने कहा कि वनांचल क्षेत्र में रहने वाले लोगों के लिए स्वास्थ्य केंद्र ही सबसे बड़ा सहारा है। ऐसे में प्रसव जैसी आपात स्थिति में केंद्र बंद मिलना गंभीर लापरवाही है। ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन से मांग की है कि आरोग्यम केंद्र में नियमित डॉक्टर, स्टाफ, दवाएं और आवश्यक उपकरण तत्काल उपलब्ध कराए जाएं।

वीडियो वायरल हुआ तो प्रशासन ने लिया संज्ञान

घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित होने के बाद जिला प्रशासन ने तत्काल संज्ञान लिया। प्रशासन की ओर से बताया गया कि मांडवा निवासी मीराबाई और उनके नवजात शिशु का जिला अस्पताल में उपचार जारी है। जिला अस्पताल के चिकित्सक डॉ. भूपेंद्र गौर ने बताया कि नवजात शिशु प्री-मेच्योर है और उसे सांस लेने में तकलीफ होने के कारण निर्धारित चिकित्सकीय प्रोटोकॉल के तहत उपचार दिया जा रहा है। महिला का भी उपचार जारी है और माता-पिता की काउंसलिंग की गई है।

प्रशासन बोला- महिला गर्भावस्था से स्वास्थ्य विभाग के संपर्क में थी

प्रशासन के अनुसार मांडवा क्षेत्र की आंगनवाड़ी कार्यकर्ता सरिता ने बताया कि मीराबाई गर्भावस्था के तीसरे माह से उनके संपर्क में थीं। उनकी नियमित स्वास्थ्य जांच और टीकाकरण भी कराया गया था। महिला के पति भूलसिंग ने बताया कि वह काम के सिलसिले में बाहर गए हुए थे। इसी दौरान मीराबाई अपनी बहन से मिलने घर से निकलीं और रास्ता भटककर जंगल की ओर चली गईं, जहां उनकी प्रसूति हो गई। सूचना मिलते ही आंगनवाड़ी कार्यकर्ता ने महिला को सीवल स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद जिला अस्पताल रेफर किया गया।

कलेक्टर के निर्देश पर अस्पताल पहुंचे अधिकारी

कलेक्टर हर्ष सिंह के निर्देश पर जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी सृजन वर्मा जिला अस्पताल पहुंचे। उन्होंने महिला के पति और चिकित्सकों से चर्चा कर स्थिति की जानकारी ली। सीईओ ने चिकित्सा टीम को महिला और नवजात शिशु को सर्वोत्तम उपचार तथा सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। जिला प्रशासन का कहना है कि मां और नवजात के स्वास्थ्य की सतत निगरानी की जा रही है और आवश्यक उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है।

आखिर कब स्वास्थ्य सुविधाए भरोसेमंद बनेगी?

मांडवा की घटना में दो तस्वीरें सामने आईं। एक तरफ ग्रामीणों का आरोप है कि करोड़ों की लागत से बना आरोग्यम केंद्र जरूरत के समय बंद मिला, वहीं दूसरी तरफ प्रशासन का दावा है कि महिला गर्भावस्था से स्वास्थ्य विभाग के संपर्क में थी और दोनों का जिला अस्पताल में उपचार जारी है। लेकिन सवाल अब भी वही है—दूरस्थ वनांचल क्षेत्रों में आपातकालीन स्वास्थ्य सुविधा आखिर कब तक भरोसेमंद बनेगी?

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