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युवा पार्षदों की उपेक्षा से कार्यकर्ताओं में नाराजगी, जिलाध्यक्ष पद के दावेदारों ने दिखाई ताकत
बुरहानपुर। भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) के प्रदेशाध्यक्ष श्याम टेलर का बुरहानपुर दौरा संगठन को नई ऊर्जा देने और युवाओं में जोश भरने के उद्देश्य से आयोजित किया गया था, लेकिन कार्यक्रम के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा सम्मेलन की सफलता से ज्यादा संगठनात्मक कमजोरियों और गुटीय शक्ति प्रदर्शन की रही। स्थानीय परमानंद गोविंदजीवाला ऑडिटोरियम में आयोजित युवा सम्मेलन अपेक्षित भीड़ और उत्साह जुटाने में पीछे नजर आया, जिससे जिला नेतृत्व की तैयारियों पर भी सवाल उठने लगे हैं।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि प्रदेश नेतृत्व के दौरे को लेकर जिस स्तर की तैयारी और जनसंपर्क होना चाहिए था, वह दिखाई नहीं दिया। यही वजह रही कि सम्मेलन का प्रभाव सीमित दायरे में सिमट गया। कई कार्यकर्ताओं का कहना था कि कार्यक्रम में युवाओं की भागीदारी बढ़ाने के बजाय औपचारिकता निभाने पर ज्यादा जोर दिखाई दिया।
2 मिनट का भाषण भी बना चर्चा का विषय
सम्मेलन में युवा मोर्चा जिलाध्यक्ष वैभव महाजन का संक्षिप्त संबोधन भी चर्चाओं में रहा। प्रदेशाध्यक्ष की मौजूदगी में जिले की संगठनात्मक गतिविधियों, सदस्यता विस्तार, युवाओं के बीच किए गए कार्यों और भविष्य की रणनीति पर विस्तार से बात होने की उम्मीद थी, लेकिन संबोधन कुछ ही मिनटों में समाप्त हो गया। इससे कार्यकर्ताओं के बीच यह चर्चा शुरू हो गई कि जिला नेतृत्व प्रदेश नेतृत्व के सामने अपनी उपलब्धियों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत नहीं कर सका।
युवा पार्षदों की उपेक्षा से बढ़ी नाराजगी
सम्मेलन का सबसे संवेदनशील मुद्दा युवा पार्षदों और जनप्रतिनिधियों की कथित उपेक्षा रहा। नगर निगम चुनाव में भाजपा ने युवाओं को आगे बढ़ाकर कई वार्डों में जीत हासिल की थी। पार्टी संगठन के लिए सक्रिय रहने वाले इन युवा चेहरों को सम्मेलन में अपेक्षित महत्व नहीं मिलने पर कार्यकर्ताओं ने नाराजगी जताई।
कार्यकर्ताओं का आरोप है कि जिन युवाओं ने चुनाव में पार्टी का झंडा उठाकर जीत दर्ज की, उन्हें मंच और कार्यक्रम दोनों में सीमित भूमिका दी गई। दूसरी ओर कुछ ऐसे चेहरे प्रमुखता से दिखाई दिए, जिन पर अतीत में पार्टी विरोधी गतिविधियों से जुड़े रहने के आरोप लगते रहे हैं। इसको लेकर अंदरखाने असंतोष की चर्चा तेज रही।
सम्मेलन में संगठन कम, शक्ति प्रदर्शन ज्यादा
प्रदेशाध्यक्ष श्याम टेलर के दौरे के साथ ही युवा मोर्चा के जिला नेतृत्व को लेकर भी चर्चाएं गर्म रहीं। सम्मेलन में विभिन्न दावेदारों के समर्थक बड़ी संख्या में पहुंचे और अपने-अपने समूहों की मौजूदगी दर्ज कराते नजर आए। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि कार्यक्रम का बड़ा हिस्सा संगठनात्मक संवाद से अधिक शक्ति प्रदर्शन का मंच बन गया। कई नेताओं और कार्यकर्ताओं ने इसे आगामी संगठनात्मक नियुक्तियों की तैयारी के रूप में भी देखा। सम्मेलन के दौरान अलग-अलग समूहों की सक्रियता ने यह संकेत दिया कि युवा मोर्चा में नेतृत्व परिवर्तन या नई जिम्मेदारियों को लेकर अंदरखाने राजनीतिक गतिविधियां तेज हो चुकी हैं।
प्रदेशाध्यक्ष ने दिया संगठन विस्तार का संदेश
सम्मेलन को संबोधित करते हुए प्रदेशाध्यक्ष श्याम टेलर ने युवाओं से भाजपा की विचारधारा और केंद्र व राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने का आह्वान किया। उन्होंने युवाओं को संगठन की सबसे बड़ी ताकत बताते हुए सामाजिक और राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाने का संदेश दिया। कार्यक्रम में पूर्व मंत्री एवं विधायक अर्चना चिटनीस और भाजपा जिलाध्यक्ष डॉ. मनोज माने ने भी युवाओं की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।
दौरा खत्म, लेकिन सवाल बाकी
प्रदेशाध्यक्ष का दौरा और सम्मेलन समाप्त हो गया, लेकिन कार्यक्रम ने कई राजनीतिक संकेत छोड़ दिए हैं। युवा कार्यकर्ताओं की भागीदारी, जिला नेतृत्व की सक्रियता, युवा जनप्रतिनिधियों की भूमिका और संगठन के भीतर उभर रही नई शक्ति संरचनाओं को लेकर चर्चाएं अब भी जारी हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि संगठन इन संकेतों को गंभीरता से नहीं लेता, तो युवा मोर्चा के भीतर बढ़ती असंतुष्टि भविष्य में संगठनात्मक चुनौतियों का कारण बन सकती है। वहीं, जिला नेतृत्व के लिए भी यह सम्मेलन आत्ममंथन का अवसर माना जा रहा है कि प्रदेश स्तर के महत्वपूर्ण दौरे को अपेक्षित प्रभावशाली स्वरूप क्यों नहीं मिल सका।