बुरहानपुर। एटीएम से नहीं निकले पांच हजार रुपए वापस पाने की कोशिश एक युवती को भारी पड़ गई। बैंक में दर्ज शिकायत की जानकारी साइबर ठगों तक पहुंची तो उन्होंने इसी को हथियार बना लिया। खुद को बैंक की मुंबई शाखा का कर्मचारी बताकर युवती को फोन किया, रिफंड दिलाने का भरोसा दिया और व्हाट्सएप पर फर्जी APK फाइल भेज दी। युवती ने जैसे ही फाइल मोबाइल में इंस्टॉल कर एटीएम कार्ड की जानकारी दर्ज की, ठगों ने उसके खाते पर सेंध लगा दी। कुछ ही देर में तीन ट्रांजेक्शन के जरिए खाते से कुल 75 हजार 147 रुपए निकाल लिए गए।
ठगी के बाद पीड़िता ने राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत की और बैंक खाता फ्रीज कराया। जिला साइबर सेल की तकनीकी जांच के बाद शिकारपुरा थाने में मामला दर्ज किया गया है। पुलिस अब मोबाइल नंबर, बैंक खातों और APK फाइल के पीछे सक्रिय साइबर गिरोह तक पहुंचने की कोशिश कर रही है।
एटीएम से कैश नहीं निकला, खाते से कट गए थे 5 हजार
मामला शिकारपुरा थाना क्षेत्र के राजपुरा गेट का है। यहां रहने वाली युवती का बैंक ऑफ इंडिया की अमरावती रोड शाखा में खाता है। 2 मई 2026 को वह राजपुरा स्थित सेंट्रल बैंक के एटीएम से पांच हजार रुपए निकालने गई थी। युवती ने एटीएम में कार्ड लगाया और प्रक्रिया पूरी की, लेकिन मशीन से नकदी बाहर नहीं आई। कुछ देर बाद मोबाइल पर मैसेज आया तो पता चला कि खाते से पांच हजार रुपए कट चुके हैं। रुपए वापस पाने के लिए युवती ने बैंक में शिकायत दर्ज कराई। एक बार नहीं, बल्कि तीन बार बैंक से संपर्क किया, लेकिन राशि खाते में वापस नहीं आई। वह लगातार रिफंड का इंतजार करती रही।
शिकायत की जानकारी बताई तो बैंक कर्मचारी समझ बैठी युवती
11 जुलाई को दोपहर में युवती के मोबाइल पर एक अज्ञात नंबर से कॉल आया। फोन करने वाले ने खुद को बैंक की मुंबई शाखा का कर्मचारी बताया। उसने कहा कि एटीएम से कटी हुई पांच हजार रुपए की राशि वापस दिलाने के लिए कॉल किया गया है। आरोपी ने युवती की ओर से बैंक में की गई शिकायत का विवरण और खाते से जुड़ी कुछ जानकारी भी बता दी। बैंक शिकायत की अंदरूनी जानकारी सुनकर युवती को लगा कि कॉल वास्तव में बैंक की ओर से ही आया है। यहीं से वह ठगों के जाल में फंसती चली गई।
व्हाट्सएप पर भेजी कथित आईडी, फिर थमा दी APK फाइल
आरोपी ने युवती को विश्वास में लेने के लिए व्हाट्सएप पर अपनी कथित पहचान से जुड़ी जानकारी भेजी। इसके बाद उसने एक APK फाइल भेजते हुए कहा कि रिफंड की प्रक्रिया पूरी करने के लिए इसे डाउनलोड और इंस्टॉल करना होगा। पांच हजार रुपए वापस पाने की उम्मीद में युवती ने आरोपी के बताए अनुसार APK फाइल मोबाइल में इंस्टॉल कर ली। इसके बाद फाइल में एटीएम कार्ड से संबंधित जानकारी दर्ज कर दी। युवती को अंदाजा तक नहीं था कि रिफंड के नाम पर भेजी गई फाइल वास्तव में उसके बैंक खाते तक पहुंच बनाने का जरिया थी।
एक के बाद एक आए मैसेज, खाते से निकल गए 75,147 रुपए
APK फाइल इंस्टॉल करने और बैंक कार्ड की जानकारी दर्ज करने के कुछ ही देर बाद युवती के मोबाइल पर लगातार रुपए कटने के मैसेज आने लगे। पहले ट्रांजेक्शन में खाते से 25 हजार रुपए निकाले गए। इसके बाद दूसरे ट्रांजेक्शन में फिर 25 हजार रुपए डेबिट हुए। तीसरी बार ठगों ने 25 हजार 147 रुपए निकाल लिए। इस तरह साइबर ठगों ने तीन ट्रांजेक्शन में युवती के बैंक खाते से कुल 75 हजार 147 रुपए साफ कर दिए। पांच हजार रुपए के रिफंड की उम्मीद कर रही युवती को उल्टा 75 हजार रुपए से ज्यादा का नुकसान हो गया।
ठगी का पता चलते ही 1930 पर की शिकायत
खाते से रकम निकलने के मैसेज मिलने के बाद युवती को ठगी का अहसास हुआ। उसने तत्काल राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराई। इसके साथ ही बैंक से संपर्क कर अपना खाता फ्रीज कराया, ताकि ठग बची हुई रकम नहीं निकाल सकें। शिकायत के बाद मामला जिला साइबर सेल के पास पहुंचा। साइबर सेल ने मोबाइल नंबर, बैंक ट्रांजेक्शन, व्हाट्सएप चैट और भेजी गई APK फाइल की तकनीकी जांच शुरू की। जांच के बाद मिली जीरो एफआईआर के आधार पर शिकारपुरा थाना पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं में केस दर्ज किया।
सबसे बड़ा सवाल—ठग तक कैसे पहुंची बैंक शिकायत की जानकारी?
मामले में सबसे गंभीर सवाल यह है कि आरोपी को युवती की बैंक शिकायत और खाते से संबंधित जानकारी कैसे मिली। ठग ने शिकायत की सटीक जानकारी बताकर ही युवती का भरोसा जीता था। पुलिस इस बिंदु पर भी जांच कर रही है कि साइबर ठगों ने बैंक शिकायत से जुड़ी जानकारी किसी डेटा लीक, फर्जी कस्टमर केयर नेटवर्क या किसी अन्य माध्यम से हासिल की थी। यह भी पता लगाया जा रहा है कि इस वारदात के पीछे कोई संगठित गिरोह सक्रिय है या आरोपी अलग-अलग राज्यों में बैठकर बैंक ग्राहकों को निशाना बना रहे हैं।
मोबाइल नंबर, आईपी एड्रेस और खातों की कुंडली खंगाल रही पुलिस
पुलिस आरोपी के मोबाइल नंबर की कॉल डिटेल और लोकेशन निकालने की प्रक्रिया में जुटी है। व्हाट्सएप अकाउंट, APK फाइल के सर्वर, आईपी एड्रेस और रकम प्राप्त करने वाले बैंक खातों की भी जांच की जा रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि युवती के खाते से निकले 75 हजार 147 रुपए किन खातों में ट्रांसफर किए गए और वहां से रकम आगे किस माध्यम से निकाली गई। आमतौर पर साइबर ठग रकम को अलग-अलग म्यूल खातों में भेजकर एटीएम, यूपीआई या डिजिटल वॉलेट के जरिए निकाल लेते हैं। इसलिए पुलिस संदिग्ध खाताधारकों की भूमिका भी जांच रही है।
बैंक के नाम का सहारा, फर्जी ऐप से खाते पर कब्जा
साइबर अपराधियों ने इस वारदात में पुराना लेकिन खतरनाक तरीका अपनाया। पहले खुद को बैंक कर्मचारी बताया, फिर पीड़िता की शिकायत की जानकारी देकर भरोसा जीता और अंत में फर्जी APK फाइल मोबाइल में इंस्टॉल करा दी। ऐसी APK फाइल मोबाइल में इंस्टॉल होते ही कई तरह की अनुमति मांगती हैं। इन अनुमतियों के जरिए ठग मोबाइल स्क्रीन, मैसेज, ओटीपी, बैंकिंग जानकारी और फोन की दूसरी गतिविधियों तक पहुंच बना सकते हैं। युवती ने जैसे ही एटीएम कार्ड संबंधी जानकारी दर्ज की, ठगों ने उसका इस्तेमाल कर खाते से रकम निकाल ली।
पुलिस की चेतावनी—बैंक कभी नहीं भेजता APK फाइल
पुलिस ने नागरिकों को चेतावनी दी है कि कोई भी बैंक रिफंड, केवाईसी, खाता अपडेट, कार्ड सत्यापन या शिकायत निपटाने के नाम पर व्हाट्सएप से APK फाइल नहीं भेजता। किसी अनजान नंबर से आई फाइल, लिंक या एप्लीकेशन डाउनलोड करना सीधे तौर पर बैंक खाते और मोबाइल की सुरक्षा को खतरे में डाल सकता है। बैंक अधिकारी फोन पर कभी भी एटीएम कार्ड नंबर, सीवीवी, पिन, पासवर्ड या ओटीपी नहीं मांगते। इस तरह की जानकारी मांगने वाला व्यक्ति बैंक कर्मचारी नहीं, बल्कि साइबर ठग हो सकता है।
ठगी होते ही ये तीन काम तुरंत करें
साइबर ठगी का पता चलते ही तुरंत 1930 पर कॉल करें। बैंक को सूचना देकर खाते और कार्ड को ब्लॉक या फ्रीज कराएं। इसके बाद नजदीकी पुलिस थाने या साइबर सेल में शिकायत दर्ज कर सभी स्क्रीनशॉट, मोबाइल नंबर, बैंक मैसेज और ट्रांजेक्शन विवरण सुरक्षित रखें। साइबर अपराध में शुरुआती कुछ घंटे बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। समय पर शिकायत करने से संदिग्ध खाते में पहुंची रकम को फ्रीज कराने की संभावना बढ़ जाती है।



