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रेंगा कोरकू प्रतिमा पर टकराव: आदिवासी समाज बोला- आस्था के केंद्र को हटाया तो होगा आंदोलन

- देड़तलाई में स्थापित स्वतंत्रता सेनानी वीर रेंगा कोरकू की प्रतिमा के संरक्षण की मांग;

On: June 16, 2026 8:09 PM
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देड़तलाई में वीर रेंगा कोरकू प्रतिमा संरक्षण की मांग को लेकर कलेक्टर कार्यालय पहुंचे कोरकू आदिवासी समाजजन
  •  कलेक्टर ने कहा- हाईकोर्ट का स्टे है, प्रतिमा नहीं हटेगी, जमीन संबंधी शिकायत की जांच होगी

बुरहानपुर। देड़तलाई में स्वतंत्रता सेनानी एवं आदिवासी जननायक वीर रेंगा कोरकू की प्रतिमा को लेकर चल रहा विवाद अब बड़ा सामाजिक मुद्दा बन गया है। मंगलवार को बड़ी संख्या में कोरकू आदिवासी समाज के लोग बुरहानपुर कलेक्टर कार्यालय पहुंचे और प्रतिमा के संरक्षण की मांग को लेकर कलेक्टर हर्ष सिंह को ज्ञापन सौंपा। समाजजनों ने साफ कहा कि वीर रेंगा कोरकू उनकी आस्था, अस्मिता और गौरव के प्रतीक हैं। प्रतिमा को हटाने का कोई भी प्रयास बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

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कोरकू आदिवासी समाज ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर प्रतिमा संरक्षण की मांग की

समाज के लोगों ने बताया कि ग्राम देड़तलाई में खसरा नंबर 270 की शासकीय भूमि पर वीर रेंगा कोरकू की प्रतिमा स्थापित है। यह प्रतिमा पिछले 10-11 वर्षों से समाज की श्रद्धा का केंद्र बनी हुई है। समाजजनों का कहना है कि वीर रेंगा कोरकू ने जल, जंगल, जमीन, माटी, बेटी और आदिवासी संस्कृति की रक्षा के लिए अंग्रेजों और शोषणकारी शक्तियों के खिलाफ संघर्ष किया था। उनके बलिदान की स्मृति में प्रदेश के कई गांवों में प्रतिमाएं स्थापित की गई हैं, ताकि आने वाली पीढ़ियां आदिवासी समाज के गौरवशाली इतिहास को जान सकें।

जमीन विवाद से बढ़ा मामला, समाज में नाराजगी
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देड़तलाई में वीर रेंगा कोरकू की प्रतिमा को लेकर विवाद तेज हो गया है।

मामला तब गरमाया जब देड़तलाई निवासी आरिफ पिता मकसूद बेग ने न्यायालय में याचिका प्रस्तुत कर दावा किया कि प्रतिमा उनकी जमीन पर स्थापित है और उसे हटाया जाना चाहिए। इसके बाद प्रतिमा हटाने को लेकर नोटिस और कानूनी प्रक्रिया शुरू होने से कोरकू समाज में नाराजगी फैल गई। समाजजनों का कहना है कि प्रतिमा केवल पत्थर या ढांचे का विषय नहीं है, बल्कि यह आदिवासी समाज की पहचान, संघर्ष और श्रद्धा से जुड़ा मुद्दा है। इसलिए इसे जमीन विवाद की सामान्य प्रक्रिया मानकर नहीं देखा जाना चाहिए।

कलेक्टर बोले- स्टे है, प्रतिमा हटाने कोई नहीं जाएगा

ज्ञापन लेने के बाद कलेक्टर हर्ष सिंह ने समाजजनों को आश्वस्त किया कि प्रतिमा हटाने के मामले में हाईकोर्ट का स्टे है। जब तक न्यायालय का स्टे प्रभावी है, तब तक प्रतिमा हटाने की कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी। कलेक्टर ने कहा कि न्यायालयीन प्रक्रिया के तहत नोटिस जारी हुआ था, लेकिन वर्तमान स्थिति में कोर्ट का स्टे है। इसलिए प्रशासन की ओर से प्रतिमा हटाने की कोई कार्रवाई नहीं होगी। उन्होंने कहा कि यदि पक्षकार आपसी बातचीत से समाधान चाहते हैं तो प्रशासन सामंजस्यपूर्ण हल निकालने के लिए प्रयास करेगा। कलेक्टर ने यह भी कहा कि उनके संज्ञान में आदिवासी भूमि पर कब्जे की शिकायत आई है। यदि जांच में कब्जे की बात सही पाई जाती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने संबंधित शिकायत की जांच कराने की बात कही।

विधायक मंजू दादू बोलीं- श्रद्धा के केंद्र को नहीं हटाया जाना चाहिए

इस दौरान नेपानगर विधायक मंजू दादू भी समाजजनों के साथ मौजूद रहीं। उन्होंने कहा कि देड़तलाई में प्रतिमा स्थापना को लेकर यह मामला करीब डेढ़ वर्ष से चल रहा है। समाज की मांग स्पष्ट है कि जहां एक बार आराध्य की स्थापना हो चुकी है, उस श्रद्धा स्थल को नहीं हटाया जाना चाहिए। विधायक ने कहा कि समाज का दावा है कि प्रतिमा एमपीआरडीसी की जमीन पर स्थापित की गई है। यदि किसी व्यक्ति की भूमि का कोई हिस्सा प्रभावित होता भी है, तो समाज समाधान के लिए तैयार है, लेकिन प्रतिमा हटाना उचित नहीं होगा। उन्होंने कहा कि यह समाज की भावनाओं से जुड़ा विषय है और प्रशासन को संवेदनशीलता के साथ निर्णय लेना चाहिए। मंजू दादू ने बताया कि इस संबंध में राष्ट्रपति और राज्यपाल के नाम भी ज्ञापन सौंपा गया है, ताकि समाज की मांग उच्च स्तर तक पहुंच सके।

समाज की चेतावनी- बार-बार नोटिस आए तो आंदोलन होगा

कोरकू समाज संगठन के प्रतिनिधि केशवराम भिलावेकर ने कहा कि वीर रेंगा कोरकू समाज के लिए भगवान समान हैं। उनकी प्रतिमा 10-11 वर्षों से देड़तलाई में स्थापित है। पिछले दो-तीन वर्षों से एक व्यक्ति द्वारा कोर्ट में मामला ले जाने के बाद बार-बार प्रतिमा हटाने के नोटिस आ रहे हैं, जिससे समाज में आक्रोश है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि आगे प्रतिमा हटाने की कार्रवाई या दबाव बनाया गया तो कोरकू समाज आंदोलन करेगा। समाजजनों ने कहा कि वे अपनी आस्था और इतिहास की रक्षा के लिए एकजुट हैं।

आस्था, इतिहास और जमीन विवाद के बीच प्रशासन की चुनौती

देड़तलाई का यह मामला अब केवल जमीन विवाद नहीं रहा। एक तरफ न्यायालयीन प्रक्रिया और जमीन का दावा है, तो दूसरी तरफ आदिवासी समाज की गहरी आस्था और ऐतिहासिक सम्मान जुड़ा है। ऐसे में प्रशासन के सामने कानून व्यवस्था बनाए रखते हुए संवेदनशील समाधान निकालने की चुनौती है। फिलहाल कलेक्टर के आश्वासन और हाईकोर्ट के स्टे से समाज को राहत मिली है, लेकिन समाज ने स्पष्ट कर दिया है कि प्रतिमा की सुरक्षा और संरक्षण को लेकर वह पीछे हटने वाला नहीं है। मंगलवार को कलेक्टर कार्यालय पहुंचे समाजजनों की संख्या और उनके तेवरों ने साफ संकेत दे दिया कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा जिले की सामाजिक और राजनीतिक चर्चा के केंद्र में रह सकता है।

 

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