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यूसीसी के विरोध में कलेक्ट्रेट पहुंचा मुस्लिम समाज, बोले- धार्मिक स्वतंत्रता और शरीयत से समझौता स्वीकार नहीं

राष्ट्रपति के नाम सौंपा ज्ञापन; समाजजनों ने कहा- पर्सनल लॉ में हस्तक्षेप संवैधानिक अधिकारों और आस्था से जुड़ा गंभीर मामला

On: June 18, 2026 8:42 PM
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बुरहानपुर कलेक्ट्रेट में UCC के विरोध में मुस्लिम समाज द्वारा राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपते समाजजन

बुरहानपुर। समान नागरिक संहिता यानी यूसीसी को लेकर बुरहानपुर में मुस्लिम समाज ने गुरुवार शाम कलेक्ट्रेट पहुंचकर अपना विरोध दर्ज कराया। बड़ी संख्या में समाजजन कलेक्ट्रेट पहुंचे और राष्ट्रपति के नाम संबोधित ज्ञापन नायब तहसीलदार दयाराम आवास्या को सौंपा। ज्ञापन के माध्यम से समाजजनों ने धार्मिक स्वतंत्रता, शरीयत कानूनों के संरक्षण और पर्सनल लॉ में किसी भी प्रकार के हस्तक्षेप को लेकर अपनी आपत्ति जताई।

Sadaiv News
बुरहानपुर में UCC के विरोध में मुस्लिम समाज कलेक्ट्रेट पहुंचा।

समाजजनों का कहना है कि यूसीसी जैसा विषय करोड़ों लोगों की धार्मिक आस्था और सामाजिक व्यवस्था से जुड़ा अत्यंत संवेदनशील मुद्दा है। इसलिए इस पर कोई भी निर्णय लेने से पहले देश की विविधता, धार्मिक स्वतंत्रता और संवैधानिक अधिकारों को ध्यान में रखना जरूरी है।

कहा- संविधान ने दी धर्म और परंपराओं के पालन की स्वतंत्रता

ज्ञापन में कहा गया कि भारत का संविधान प्रत्येक नागरिक को अपने धर्म, संस्कृति और परंपराओं का पालन करने की स्वतंत्रता देता है। समाजजनों ने कहा कि भारत विविधताओं का देश है और यहां अलग-अलग समुदाय अपनी धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं के अनुसार जीवन जीते हैं। ऐसे में सभी समुदायों पर एक समान व्यवस्था लागू करना देश के विविधतापूर्ण स्वरूप के विपरीत माना जाएगा।

मुस्लिम समाज ने ज्ञापन में स्पष्ट किया कि निकाह, तलाक, विरासत और वक्फ जैसे पारिवारिक मामले शरीयत कानूनों के अंतर्गत आते हैं। समाजजनों के अनुसार शरीयत केवल कानूनी व्यवस्था नहीं, बल्कि उनकी धार्मिक पहचान और आस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

शरीयत में हस्तक्षेप पर जताई आपत्ति

ज्ञापन में कहा गया कि मुस्लिम समाज अपने पारिवारिक और धार्मिक मामलों में मुस्लिम पर्सनल लॉ यानी शरीयत पर निर्भर है। यदि इन व्यवस्थाओं में किसी भी प्रकार का सरकारी हस्तक्षेप होता है तो इसे धार्मिक स्वतंत्रता पर असर के रूप में देखा जाएगा।

समाजजनों ने आरोप लगाया कि समान नागरिक संहिता के नाम पर पर्सनल लॉ में बदलाव या हस्तक्षेप करने का प्रयास आस्था से जुड़ा मामला है, जिसे समाज स्वीकार नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि संविधान ने जब हर समुदाय को अपनी परंपराओं और धार्मिक कानूनों के अनुसार जीवन जीने का अधिकार दिया है, तो किसी एक समान संहिता को थोपना उचित नहीं है।

सरकार से नीति पर पुनर्विचार की मांग

ज्ञापन के माध्यम से मांग की गई कि केंद्र सरकार ऐसी किसी भी नीति से दूर रहे, जिससे अल्पसंख्यक समुदायों की धार्मिक पहचान, शरीयत आधारित व्यवस्था और पर्सनल लॉ प्रभावित होते हों। समाजजनों ने कहा कि देश की एकता और सामाजिक सौहार्द बनाए रखने के लिए हर समाज को अपनी धार्मिक परंपराओं के साथ जीने की स्वतंत्रता मिलनी चाहिए। समाज ने राष्ट्रपति से आग्रह किया कि बुरहानपुर सहित देशभर के मुस्लिम समाज की भावना को गंभीरता से सुना जाए और इस संवेदनशील विषय पर संवैधानिक अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित की जाए।

बड़ी संख्या में समाजजन रहे मौजूद

ज्ञापन सौंपने के दौरान सैयद इस्हाक अली, जमील अहमद काजी, मोहम्मद ऐहतेशाम अंसारी, नफीस मंशा खान सहित बड़ी संख्या में मुस्लिम समाजजन उपस्थित रहे। समाजजनों ने शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखते हुए यूसीसी को लेकर विरोध दर्ज कराया और धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा की मांग की।

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