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मांडवा पंचायत में ‘कागजी विकास’ का खेल! पाइपलाइन बिछी नहीं, खाते से निकल गए ₹1.19 लाख

— स्ट्रीट लाइट और सामग्री खरीदी पर भी उठे सवाल; पंच-उपसरपंच ने खोला मोर्चा, सरपंच के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव की तैयारी

On: July 10, 2026 8:53 PM
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मांडवा ग्राम पंचायत में पाइपलाइन और सामग्री खरीदी घोटाले की जांच
  • जनसुनवाई तक पहुंची शिकायत तो जनपद सीईओ ने बनाई जांच टीम; एई, एसडीओ और सब इंजीनियर खंगालेंगे भुगतान और निर्माण का रिकॉर्ड

बुरहानपुर। नेपानगर क्षेत्र की ग्राम पंचायत मांडवा में विकास कार्यों और सामग्री खरीदी के नाम पर कथित गड़बड़ी का मामला गरमा गया है। आरोप है कि पंचायत में निर्माण कार्य धरातल पर हुआ ही नहीं, लेकिन कागजों में काम पूरा दिखाकर राशि निकाल ली गई। हाईस्कूल परिसर में पाइपलाइन विस्तार के नाम पर करीब 1.19 लाख रुपए का भुगतान होने के बाद भी मौके पर काम दिखाई नहीं देने का दावा किया गया है। पटेल मोहल्ले में भी इसी तरह पाइपलाइन विस्तार के नाम पर राशि निकालने के आरोप लगे हैं।

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काम जमीन पर नहीं, खाते से निकल गए ₹1.19 लाख—मांडवा पंचायत में जांच शुरू

मामला अब केवल ग्रामीणों की शिकायत तक सीमित नहीं रहा। पंचायत के उपसरपंच और पंच खुलकर सरपंच के खिलाफ आ गए हैं। उन्होंने सरपंच के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव लाने की घोषणा कर दी है। वहीं शिकायत सामने आते ही खकनार जनपद पंचायत प्रशासन ने भी जांच दल गठित कर दिया है। अब पंचायत के भुगतान बिल, सामग्री खरीदी के दस्तावेज, निर्माण कार्यों की तकनीकी स्वीकृति और मौके की स्थिति का मिलान किया जाएगा।

जनसुनवाई में फूटा गुस्सा, ग्रामसभा में भी नहीं मिला जवाब

मंगलवार को उपसरपंच, पंचों और ग्रामीणों ने जनसुनवाई में पहुंचकर पंचायत में कथित अनियमितताओं की शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि सरपंच तुलसीराम अलावे और सचिव सुनील महाजन ने हाईस्कूल परिसर में पाइपलाइन विस्तार के लिए राशि निकाली, लेकिन काम नहीं कराया।

शिकायत के बाद सचिव की ओर से कथित तौर पर इसे गलतफहमी बताया गया। हालांकि गुरुवार को आयोजित ग्रामसभा में मामला फिर उठा तो पंचों और ग्रामीणों ने एक के बाद एक सवाल दाग दिए। उन्होंने पूछा कि जब पाइपलाइन बिछाई ही नहीं गई तो राशि किस आधार पर निकाली गई? सामग्री कहां खरीदी गई? माप पुस्तिका किसने तैयार की? भुगतान से पहले मौके का सत्यापन किस अधिकारी ने किया? आरोप है कि इन सवालों का सरपंच और सचिव संतोषजनक जवाब नहीं दे सके। इसके बाद ग्रामसभा में माहौल गर्म हो गया और ग्रामीणों ने पंचायत की कार्यप्रणाली पर तीखी नाराजगी जताई।

दो स्थानों पर काम गायब, भुगतान पूरा होने का आरोप

शिकायतकर्ताओं के अनुसार हाईस्कूल परिसर और पटेल मोहल्ले में पाइपलाइन विस्तार प्रस्तावित था। दोनों स्थानों पर काम दिखाई नहीं दे रहा, लेकिन पंचायत के रिकॉर्ड में राशि खर्च होना बताई जा रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि विकास कार्य केवल दस्तावेजों में दिखाए जा रहे हैं, जबकि वार्डों में मूलभूत सुविधाओं की स्थिति जस की तस बनी हुई है। अब जांच दल यह देखेगा कि संबंधित कार्य की तकनीकी और प्रशासनिक स्वीकृति कब जारी हुई, कितनी सामग्री खरीदी गई, किस सप्लायर को भुगतान हुआ और काम का मूल्यांकन किस अधिकारी ने किया। यदि मौके पर निर्माण नहीं मिला तो भुगतान प्रक्रिया में शामिल जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका भी सवालों के घेरे में आ सकती है।

स्ट्रीट लाइट के नाम पर भी लाखों के भुगतान का आरोप

पाइपलाइन ही नहीं, पंचायत में स्ट्रीट लाइट खरीदी और लगाने के नाम पर भी लाखों रुपए निकालने की शिकायत की गई है। ग्रामीणों ने इस मामले को लेकर सीएम हेल्पलाइन पर भी शिकायत दर्ज कराई है। पंचों का कहना है कि उनके वार्डों में न तो पर्याप्त स्ट्रीट लाइट लगी हैं और न ही अपेक्षित विकास कार्य हुए हैं, जबकि पंचायत खाते से लगातार भुगतान किए जा रहे हैं। उन्होंने सामग्री खरीदी के बिल, सप्लायरों के नाम, भुगतान की तारीख और वास्तविक रूप से लगाई गई स्ट्रीट लाइट की संख्या सार्वजनिक करने की मांग की है।

पंच बोले—वार्डों में विकास नहीं, लेकिन खाते से पैसा निकल रहा

ग्रामसभा के दौरान पंचों ने आरोप लगाया कि पंचायत में विकास कार्यों के प्रस्ताव तक नहीं बनाए जा रहे। निर्वाचित पंचों को विश्वास में लिए बिना निर्णय लेने और भुगतान कराने के आरोप भी लगाए गए हैं। पंचों ने कहा कि उनके वार्डों में सड़क, नाली, पेयजल और प्रकाश व्यवस्था से जुड़े कई काम लंबित हैं। इसके बावजूद पंचायत के रिकॉर्ड में अलग-अलग मदों से भुगतान हो रहा है। पंचों ने मांग की है कि पिछले वर्षों में हुए सभी भुगतान और सामग्री खरीदी का भौतिक सत्यापन कराया जाए।

सरपंच के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव की तैयारी

उपसरपंच सुनील सोलंकी ने कहा कि पंचों का विश्वास सरपंच से उठ चुका है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरपंच के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया जाएगा। इसके लिए पंचों से चर्चा कर आवश्यक प्रक्रिया शुरू की जा रही है। अविश्वास प्रस्ताव की घोषणा के बाद पंचायत की राजनीति भी गरमा गई है। यदि पर्याप्त पंच प्रस्ताव के समर्थन में आते हैं तो सरपंच की कुर्सी पर संकट खड़ा हो सकता है। हालांकि इसका फैसला कानूनी प्रक्रिया और मतदान के बाद ही होगा।

पहले भी सामने आया था मृतकों के नाम पर राशि निकालने का मामला

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि मांडवा पंचायत पहले भी वित्तीय अनियमितताओं के कारण विवादों में रह चुकी है। संबल योजना में मृत व्यक्तियों के नाम से राशि निकालने का मामला सामने आया था। शिकायतकर्ताओं के अनुसार उस प्रकरण में सरपंच तुलसीराम अलावे और तत्कालीन सचिव सुनील पटेल के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई थी। ग्रामीणों का दावा है कि एफआईआर के बाद तत्कालीन सचिव को हटा दिया गया था, जबकि सरपंच ने बाद में अपना पद दोबारा हासिल कर लिया। अब ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि वर्तमान सचिव के साथ मिलकर सामग्री खरीदी और निर्माण कार्यों में मनमानी की जा रही है। हालांकि इन आरोपों की वर्तमान जांच से पुष्टि होना अभी बाकी है।

जांच दल दस्तावेज और मौके का करेगा मिलान

मामला सामने आने के बाद खकनार जनपद पंचायत सीईओ ने जांच दल गठित किया है। टीम में सहायक यंत्री, एसडीओ और सब इंजीनियर स्तर के अधिकारियों को शामिल किया गया है। जांच दल पंचायत पहुंचकर निर्माण स्थल, खरीदी गई सामग्री, भुगतान वाउचर, बिल, माप पुस्तिका, प्रस्ताव रजिस्टर और बैंक भुगतान का परीक्षण करेगा। जांच का सबसे अहम बिंदु यह होगा कि जिन कार्यों के नाम पर राशि निकाली गई, वे मौके पर वास्तव में हुए या नहीं। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि कार्यों की स्वीकृति ग्रामसभा और पंचायत की विधिवत बैठक में ली गई थी अथवा नहीं।

सीईओ बोलीं—शिकायत के हर बिंदु की होगी जांच

जनपद पंचायत खकनार की सीईओ सुनीता बघेल ने कहा, “मांडवा पंचायत की शिकायत सामने आई है। एई, एसडीओ और सब इंजीनियरों को शामिल कर जांच दल गठित किया गया है। टीम जल्द पंचायत पहुंचकर शिकायत में उल्लेखित प्रत्येक बिंदु की जांच करेगी।” अब पूरे मामले की निगाह जांच रिपोर्ट पर टिकी है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदारों के खिलाफ वसूली, विभागीय कार्रवाई और आपराधिक प्रकरण तक की प्रक्रिया शुरू हो सकती है। वहीं शिकायत निराधार मिलने पर पंचायत पदाधिकारियों को राहत मिलेगी। फिलहाल मांडवा पंचायत में कथित ‘कागजी विकास’ का मामला ग्रामीण राजनीति और प्रशासनिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है।

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