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अब स्वास्थ्य विभाग के अफसरों की भूमिका भी सवालों में, लंबे समय तक क्यों नहीं हुई कार्रवाई?
बुरहानपुर। नाम था गुड हॉस्पिटल, लेकिन अंदर की तस्वीरें देखकर स्वास्थ्य विभाग के अफसर भी हैरान रह गए। अमरावती रोड पर एक रेस्टोरेंट के ऊपर संचालित हो रहे गुड हॉस्पिटल मल्टी स्पेशलिटी सेंटर में गुरुवार दोपहर जब स्वास्थ्य विभाग की आठ सदस्यीय टीम पुलिस बल के साथ पहुंची, तो अव्यवस्था की परतें एक-एक कर खुलती चली गईं। कहीं एक बेड पर दो से तीन मरीज भर्ती थे, कहीं बेसमेंट के अंधेरे हॉल में उपचार चल रहा था। अनुमति 20 से 30 बेड की बताई जा रही है, लेकिन मौके पर करीब 150 बेड संचालित पाए गए।
लगातार मिल रही शिकायतों, पूर्व में जारी नोटिस और व्यवस्थाओं में सुधार नहीं होने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने अस्पताल को सील कर दिया। कार्रवाई के दौरान अस्पताल में भर्ती मरीजों को बाहर निकाला गया। जिन मरीजों को तत्काल उपचार की जरूरत थी, उन्हें 108 एंबुलेंस से जिला अस्पताल भेजा गया, जबकि चलने-फिरने की स्थिति में मौजूद मरीजों को पूछताछ और सलाह के बाद परिजनों के साथ घर रवाना किया गया।
फ्री इलाज का भरोसा, आधार और अंगूठा; मरीजों ने सुनाई परेशानी
स्वास्थ्य विभाग को शिकायतें मिल रही थीं कि अस्पताल में खंडवा सहित आसपास के क्षेत्रों से लोगों को मुफ्त उपचार का भरोसा देकर लाया जा रहा था। मरीजों के आधार कार्ड और अंगूठे के निशान लिए जा रहे थे। शिकायतों में यह भी आरोप था कि आयुष्मान योजना के नाम पर पैसा वसूला जा रहा है, उपचार उचित तरीके से नहीं हो रहा और अस्पताल प्रबंधन का व्यवहार भी ठीक नहीं है।
अस्पताल में भर्ती मरीज सुनीता बाई ने बताया कि उन्हें फ्री उपचार का कहकर लाया गया था। वे चार दिन से यहां भर्ती थीं। उनका आधार कार्ड और अंगूठे का निशान भी लिया गया था। कार्रवाई के दौरान मरीजों और परिजनों में अफरा-तफरी का माहौल रहा। कई मरीजों को परिजन सहारा देकर बाहर लाते दिखाई दिए।
सीएमएचओ ने बनाई टीम, पुलिस बल के साथ पहुंचा स्वास्थ्य अमला
सीएमएचओ कार्यालय के मेडिकल ऑफिसर डॉ. विनोद कुमार ने बताया कि गुड हॉस्पिटल मल्टी स्पेशलिटी सेंटर को सील कर दिया गया है। यहां नियमों के तहत मरीजों का उपचार नहीं किया जा रहा था। पहले भी अस्पताल के खिलाफ कई शिकायतें सामने आई थीं। कार्रवाई के लिए सीएमएचओ डॉ. आर.के. वर्मा ने आठ सदस्यीय टीम गठित की थी। टीम पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंची और अस्पताल को सील करने की कार्रवाई की गई। डॉ. विनोद कुमार के अनुसार अस्पताल में साफ-सफाई की स्थिति बेहद खराब मिली। ट्रेंड स्टाफ नहीं मिला। अनुमति से कई गुना अधिक मरीज भर्ती पाए गए। सबसे गंभीर स्थिति बेसमेंट में देखने को मिली, जहां अंधेरे में मरीजों का उपचार किया जा रहा था।
बेसमेंट में मरीजों की कतार, हादसा होता तो निकलने का रास्ता नहीं
निरीक्षण के दौरान अस्पताल के बेसमेंट में मरीज ही मरीज मिले। स्वास्थ्य अधिकारियों ने इसे बेहद गंभीर माना। अधिकारियों के अनुसार यदि ऐसी स्थिति में कोई हादसा हो जाता, तो मरीजों को सुरक्षित बाहर निकालना मुश्किल हो सकता था। बेसमेंट में उपचार की व्यवस्था न तो सुरक्षित थी और न ही नियमों के अनुरूप। डॉ. विनोद कुमार ने कहा कि अस्पताल में परमिशन से कई गुना अधिक बेड संचालित थे। करीब 20 से 30 बेड की अनुमति बताई जा रही है, लेकिन मौके पर करीब 150 बेड मिले। कई जगह एक ही बेड पर दो से तीन मरीज भर्ती थे। उन्होंने कहा कि पूरे मामले की जांच जारी है। जांच में तथ्य सामने आने के बाद संचालक पर आपराधिक प्रकरण भी दर्ज हो सकता है।
सवाल यह भी- इतने दिनों तक आंखें किसने मूंदी रखीं?
गुड हॉस्पिटल पर कार्रवाई के बाद अब सवाल केवल अस्पताल संचालक तक सीमित नहीं रहा। बड़ा सवाल यह है कि अमरावती रोड जैसे प्रमुख क्षेत्र में यह अस्पताल लंबे समय से संचालित हो रहा था। यदि यहां अनुमति से कई गुना अधिक बेड चल रहे थे, बेसमेंट में मरीज भर्ती किए जा रहे थे, प्रशिक्षित स्टाफ नहीं था और साफ-सफाई की स्थिति खराब थी, तो स्वास्थ्य विभाग ने अब तक कड़ी कार्रवाई क्यों नहीं की? अब तक केवल नोटिस देकर जवाब तलब किया जाता रहा। लेकिन मौके पर जो स्थिति मिली, वह सीधे-सीधे मरीजों की जान से जुड़ा मामला है। मरीजों को अंधेरे बेसमेंट में भर्ती रखना, एक बेड पर कई मरीज रखना और सुरक्षा व्यवस्था की अनदेखी करना बड़ी लापरवाही मानी जा रही है। ऐसे में अब यह मांग भी उठ रही है कि अस्पताल संचालक के साथ-साथ उन जिम्मेदार अफसरों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए, जिनकी निगरानी में यह सब चलता रहा।
संचालक बोले- प्रेस कॉन्फ्रेंस में रखूंगा पूरी बात
इस पूरे मामले में गुड हॉस्पिटल मल्टी स्पेशलिटी सेंटर के संचालक विजय सुगंधी ने कहा कि वे फिलहाल परेशान हैं। उन्होंने कहा कि अभी उन्होंने नोटिस भी नहीं देखा है, इसलिए फिलहाल कुछ कहना ठीक नहीं होगा। वे जल्द ही मीडिया की बैठक बुलाएंगे और सभी सवालों का जवाब देंगे।
कार्रवाई ने निजी अस्पतालों की व्यवस्था पर उठाए बड़े सवाल
गुड हॉस्पिटल की सीलिंग ने जिले में निजी अस्पतालों की व्यवस्था, निगरानी और स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मरीज इलाज के भरोसे अस्पताल पहुंचते हैं, लेकिन यदि अस्पताल ही नियमों को ताक पर रखकर चलें तो आमजन की जान खतरे में पड़ सकती है। अब लोगों की नजर जांच रिपोर्ट और आगे होने वाली कार्रवाई पर टिकी है। यह मामला केवल एक अस्पताल की सीलिंग का नहीं, बल्कि उस सिस्टम की जांच का भी है, जो शिकायतों और नोटिसों के बावजूद लंबे समय तक खामोश रहा। सवाल साफ है—अगर गुरुवार को टीम नहीं पहुंचती, तो क्या बेसमेंट के अंधेरे में इसी तरह मरीजों का इलाज चलता रहता?