बुरहानपुर। जिले की सबसे बड़ी पांगरी मध्यम सिंचाई परियोजना एक बार फिर विवादों के केंद्र में है। एक ओर सरकार इसे सिंचाई के लिए महत्वपूर्ण परियोजना बता रही है, वहीं दूसरी ओर प्रभावित किसान और आदिवासी परिवार मुआवजा नहीं मिलने तथा बिजली आपूर्ति बंद होने से नाराज हैं। सोमवार रात पांगरी, बसाली, नागझिरी सहित चार फालियों के सैकड़ों किसानों ने ‘अंधेरा भगाओ आंदोलन’ चलाकर कैंडल जलाते हुए विरोध प्रदर्शन किया और सरकार को 60 दिन का अल्टीमेटम दिया।
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि बांध निर्माण का कार्य 29 मार्च से शुरू हो चुका है, लेकिन आज तक किसी भी प्रभावित किसान के खाते में मुआवजे की राशि नहीं पहुंची। दूसरी ओर परियोजना क्षेत्र में बिजली लाइन काटे जाने से मदन फाल्या के करीब 30 घरों सहित सैकड़ों आदिवासी परिवार पिछले ढाई महीने से अंधेरे में जीवन बिताने को मजबूर हैं।
कैंडल मार्च से जताया विरोध
रात के अंधेरे में मोमबत्तियां लेकर एकत्र हुए किसानों ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर सरकार का ध्यान आकर्षित करने का प्रयास किया। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि खेती डूब क्षेत्र में आने से उनकी आय के स्रोत लगभग समाप्त हो चुके हैं। अब बिजली भी नहीं होने से बच्चों की पढ़ाई, महिलाओं की सुरक्षा और दैनिक जीवन गंभीर रूप से प्रभावित हो रहा है।
‘चार गुना मुआवजे की लड़ाई लड़ी, फिर भी भुगतान नहीं’
किसान नेता डॉ. रवि कुमार पटेल ने कहा कि पांगरी बांध प्रभावित किसानों ने चार गुना मुआवजे की लड़ाई लड़कर पूरे प्रदेश के किसानों के हित में महत्वपूर्ण योगदान दिया था। इसके बावजूद प्रभावित परिवारों को अब तक मुआवजा नहीं मिला। उनका आरोप है कि सरकार किसानों और आदिवासी परिवारों की समस्याओं के प्रति संवेदनशीलता नहीं दिखा रही है। उन्होंने कहा कि जंगल क्षेत्र में बिजली नहीं होने से रात के समय सांप, बिच्छू और अन्य जहरीले जीवों का खतरा लगातार बना रहता है। ऐसे हालात में लोग भय और असुरक्षा के बीच जीवन जीने को विवश हैं।
60 दिन का अल्टीमेटम
प्रदर्शन के दौरान किसानों ने चेतावनी दी कि यदि अगले 60 दिनों के भीतर मुआवजे की राशि प्रभावित किसानों के खातों में जमा नहीं की गई तो व्यापक जनआंदोलन किया जाएगा। आंदोलन की पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी। प्रदर्शन में नंदू पटेल, संजय चौकसे, माधो नाटोए, बद्री वास्कले सहित बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे।
क्या है पांगरी बांध परियोजना?
पांगरी गांव में 112.50 करोड़ रुपये की लागत से मध्यम सिंचाई परियोजना के तहत बांध का निर्माण किया जा रहा है। परियोजना की जलभराव क्षमता 18.20 मिलियन घन मीटर है और इसके माध्यम से 5,164 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई का लक्ष्य रखा गया है। करीब 1.8 किलोमीटर लंबा और 21.20 मीटर ऊंचा यह बांध पांगरी सहित बसाली रैयत, सांईखेड़ाकलां, कारखेड़ा रैयत, डोईफोड़िया, ताजनापुर, नांदखेड़ा और खैरखेड़ा सहित कई गांवों को प्रभावित करेगा। किसानों के अनुसार इस परियोजना से 3,280 से अधिक किसान प्रभावित हैं, जबकि लगभग 1,500 परिवारों के विस्थापित होने की संभावना है।
पहले भी कई बार हो चुका विरोध
किसान नेताओं का कहना है कि वे भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन में उचित प्रतिकर अधिनियम-2013 के तहत निर्धारित मुआवजे की मांग को लेकर लंबे समय से आंदोलन कर रहे हैं। ज्ञापन, धरना, प्रदर्शन और अन्य माध्यमों से कई बार शासन का ध्यान आकर्षित किया गया, लेकिन अब तक समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है।