बुरहानपुर। कोई विद्यार्थी एक भाषा का नाम ले और मंच पर बैठी गायिका उसी भाषा में गीत शुरू कर दे… फिर दूसरी भाषा की फरमाइश हो और बिना रुके उसमें भी सुर सज जाएं। स्वतंत्रता दिवस पर मेक्रो विज़न एकेडमी के अनहद आनंद ऑडिटोरियम में कुछ ऐसा ही दृश्य देखने को मिला। गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड धारक एवं विश्वप्रसिद्ध बहुभाषी गायिका सुचेता सतीश की प्रस्तुति ने विद्यार्थियों को न केवल रोमांचित किया, बल्कि भारत की भाषाई विविधता को संगीत के जरिए जीवंत कर दिया।
15 अगस्त को आयोजित विशेष समारोह का सबसे बड़ा आकर्षण रहा ‘वंदे मातरम्’ की आठ भाषाओं में प्रस्तुति। एक ही गीत, अलग-अलग भाषाएं और भाव एक—राष्ट्रप्रेम। जैसे-जैसे भाषा बदलती गई, विद्यार्थियों की उत्सुकता भी बढ़ती गई।
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आखिर कोई इतनी भाषाओं में गा कैसे सकता है?
सुचेता सतीश 155 से अधिक भाषाओं में गायन के लिए जानी जाती हैं। मंच पर जब विद्यार्थियों को उनकी इस प्रतिभा को प्रत्यक्ष देखने का मौका मिला तो उनकी जिज्ञासा और बढ़ गई। विद्यार्थियों ने अपनी पसंद की भाषा और बोली बताई और सुचेता ने उसी के अनुरूप गीत प्रस्तुत किए। यही वह क्षण था जिसने पूरे कार्यक्रम को सामान्य स्वतंत्रता दिवस समारोह से अलग बना दिया। विद्यार्थियों के लिए यह केवल गीत सुनना नहीं था, बल्कि यह देखने का अवसर भी था कि भाषा की सीमाएं संगीत के सामने कितनी छोटी हो सकती हैं।
आठ भाषाओं में ‘वंदे मातरम्’, लेकिन संदेश एक ही
‘वंदे मातरम्’ के 150वें वर्ष के उपलक्ष्य में तैयार इस विशेष प्रस्तुति को ‘वंदे मातरम् बियॉन्ड बॉर्डर्स’ नाम दिया गया। उद्देश्य था—भारत की विविध भाषाओं और संस्कृतियों को एक ही राष्ट्रीय भावना से जोड़ना। सुचेता ने जब अलग-अलग भाषाओं में ‘वंदे मातरम्’ प्रस्तुत किया तो हर संस्करण में भाषा बदली, लेकिन मातृभूमि के प्रति सम्मान और गर्व का भाव नहीं बदला। इस विशेष प्रस्तुति का औपचारिक विमोचन मेक्रो विज़न एकेडमी के संस्थापक एवं अध्यक्ष आनंद प्रकाश चौकसे ने किया।
विद्यार्थियों की फरमाइश बनी कार्यक्रम की सबसे दिलचस्प कड़ी
समारोह में पहले से तय प्रस्तुति के अलावा विद्यार्थियों की पसंद को भी मंच मिला। किसी ने एक भाषा में गीत सुनने की इच्छा जताई तो किसी ने दूसरी बोली में। सुचेता ने इन फरमाइशों को स्वीकार करते हुए उसी भाषा में गीत सुनाए। यही सहज संवाद कार्यक्रम की सबसे दिलचस्प कड़ी बन गया। विद्यार्थियों को यह जानने की जिज्ञासा थी कि क्या वास्तव में एक कलाकार इतनी भाषाओं में सहजता से गा सकता है। मंच से एक के बाद एक प्रस्तुतियों ने इस सवाल का जवाब भी दे दिया।
‘ऐ मेरे वतन के लोगों’ से भावुक हुआ माहौल
बहुभाषी प्रस्तुतियों के बीच सुचेता ने लोकप्रिय देशभक्ति गीत ‘ऐ मेरे वतन के लोगों’ भी प्रस्तुत किया। गीत के साथ ऑडिटोरियम का माहौल भावपूर्ण हो गया। स्वतंत्रता दिवस का राष्ट्रभाव संगीत के साथ सीधे विद्यार्थियों तक पहुंचता नजर आया। एक तरफ भाषाओं की विविधता थी, दूसरी ओर देशभक्ति के भाव। दोनों ने मिलकर कार्यक्रम को सामान्य सांस्कृतिक प्रस्तुति से कहीं अधिक प्रभावी बना दिया।
रिकॉर्ड की कहानी से ज्यादा दिलचस्प रहा लाइव अनुभव
सुचेता सतीश की बहुभाषी गायन यात्रा पहले ही पहचान बना चुकी है और उनकी प्रतिभा की सराहना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा भी की जा चुकी है। लेकिन बुरहानपुर में विद्यार्थियों के लिए सबसे खास बात उनके रिकॉर्ड के बारे में सुनना नहीं, बल्कि उस प्रतिभा को अपनी आंखों के सामने देखना और अपनी पसंद की भाषा में गीत सुनना रहा। यही वजह रही कि कार्यक्रम समाप्त होने के बाद भी चर्चा इस बात की रही कि आखिर एक कलाकार इतनी भाषाओं में गीत कैसे याद रखता है, उच्चारण कैसे साधता है और हर भाषा के भाव को संगीत में कैसे ढालता है।
स्वतंत्रता दिवस पर संगीत ने समझाया ‘विविधता में एकता’
मेक्रो विज़न एकेडमी का यह आयोजन स्वतंत्रता दिवस को केवल औपचारिक समारोह तक सीमित नहीं रख सका। आठ भाषाओं में ‘वंदे मातरम्’ और विद्यार्थियों की पसंद पर अलग-अलग भाषाओं में गीतों की प्रस्तुति ने भारत की ‘विविधता में एकता’ को मंच पर साकार कर दिया।



