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बिना हिसाब दवाओं का कारोबार?: कफ सिरप किसे बेचा, रिकॉर्ड कहां है? 26 मेडिकल स्टोर्स की जांच में खुलीं गंभीर खामियां, 10 दुकानों को नोटिस

कहीं रजिस्टर्ड फार्मासिस्ट गायब तो कहीं फैंसीड्रिल डीएक्स, इंसुलिन और एविल इंजेक्शन की बिक्री का हिसाब नहीं; संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो कार्रवाई

बुरहानपुर। बीमारी में राहत के लिए मरीज जिस मेडिकल स्टोर से भरोसे के साथ दवा खरीदता है, वहीं दवाओं की बिक्री का रिकॉर्ड ही व्यवस्थित न मिले तो सवाल उठना लाजिमी है। जिले में औषधि विभाग की जांच में ऐसी ही अनियमितताएं सामने आई हैं। कहीं रजिस्टर्ड फार्मासिस्ट निरीक्षण के दौरान मौजूद नहीं मिला तो कहीं इंसुलिन इंजेक्शन, फैंसीड्रिल डीएक्स कफ सिरप, मोंटेक व कालपोल टैबलेट और एविल इंजेक्शन जैसी दवाओं के क्रय-विक्रय का रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं मिला।

Sadaiv News
बुरहानपुर में 26 मेडिकल स्टोर्स की जांच में दवाओं के रिकॉर्ड और फार्मासिस्ट की उपलब्धता से जुड़ी खामियां सामने आईं।

कलेक्टर हर्ष सिंह के निर्देश और सीएमएचओ डॉ. आरके वर्मा के मार्गदर्शन में औषधि निरीक्षक विजय वर्मा ने एक सप्ताह में जिले की 26 दवा दुकानों की जांच की। फार्मासिस्ट की मौजूदगी से लेकर शेड्यूल दवाओं की बिक्री और रिकॉर्ड तक खंगाला गया। जांच में मिली खामियों के बाद संबंधित संचालकों से रिकॉर्ड और जवाब मांगा गया है। मामले की जानकारी औषधि अनुज्ञापन अधिकारी, मुख्यालय इंदौर को भी भेजी गई है।

फैंसीड्रिल और इंसुलिन आया कहां से, बिका किसे? रिकॉर्ड नहीं मिला

सिंधी बस्ती स्थित जय मेडिकल स्टोर्स की जांच में इंसुलिन इंजेक्शन और फैंसीड्रिल डीएक्स कफ सिरप के क्रय-विक्रय का रिकॉर्ड नहीं मिला। यानी जांच के समय विभाग के सामने यह रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं था कि संबंधित दवाओं की खरीदी और बिक्री का ब्यौरा किस तरह संधारित किया गया। शनवारा वार्ड स्थित जिया मेडिकोज में भी मोंटेक, कालपोल टैबलेट और एविल इंजेक्शन के विक्रय का रिकॉर्ड नहीं मिला। संचालक को रिकॉर्ड प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। ऐसे में सबसे अहम सवाल यही है कि जिन दवाओं का रिकॉर्ड नियमानुसार रखा जाना चाहिए, उनका पूरा हिसाब जांच के समय क्यों उपलब्ध नहीं था?

दो दुकानों में फार्मासिस्ट नहीं मिले, रिकॉर्ड में भी खामी

जांच में केवल दवाओं के रिकॉर्ड की कमी ही सामने नहीं आई। गांधी चौक स्थित सपना मेडिकल स्टोर्स और दाउदपुरा स्थित पवन मेडिकल्स पर निरीक्षण के दौरान रजिस्टर्ड फार्मासिस्ट अनुपस्थित पाए गए। यहां विक्रय रिकॉर्ड भी नियमानुसार संधारित नहीं मिला। वहीं आलमगंज के अलफैज मेडिकल स्टोर्स और आजाद नगर स्थित सनराइज मेडिकल स्टोर्स में भी विक्रय रिकॉर्ड नियमानुसार संधारित नहीं पाया गया। इससे सवाल उठता है कि दवा दुकानों पर निर्धारित व्यवस्था और रिकॉर्ड की नियमित निगरानी कितनी प्रभावी है?

युवाओं में कफ सिरप के दुरुपयोग की शिकायतें, इसलिए रिकॉर्ड का सवाल और गंभीर

जिले में कुछ नशे के आदी युवाओं द्वारा मेडिकल स्टोर्स से बिना चिकित्सकीय पर्चे के कफ सिरप खरीदकर सेवन करने की शिकायतें भी सामने आती रही हैं। ऐसे माहौल में कफ सिरप के क्रय-विक्रय का रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं मिलना चिंता बढ़ाता है। हालांकि मौजूदा जांच में किसी संबंधित मेडिकल स्टोर द्वारा बिना पर्चे कफ सिरप बेचने की पुष्टि नहीं की गई है। इसलिए यह कहना अभी उचित नहीं होगा कि रिकॉर्ड नहीं मिलने का सीधा संबंध ऐसी बिक्री से है। लेकिन विभागीय जांच में रिकॉर्ड की कमी सामने आने के बाद यह जरूर जरूरी हो जाता है कि दवाओं की खरीद और बिक्री का पूरा ब्यौरा जांचा जाए।

पिछले महीने भी मिली थीं खामियां, 10 मेडिकल स्टोर्स को नोटिस

यह पहला मौका नहीं है जब निरीक्षण में अनियमितताएं सामने आई हैं। औषधि निरीक्षक विजय वर्मा के अनुसार पिछले महीने की जांच में मिली खामियों पर 10 मेडिकल स्टोर्स को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं। इनमें रॉयल फार्मा न्यामतपुरा, रेवा फार्मेसी अमरावती रोड, श्री कृष्णा मेडिकल जयस्तंभ, रजा मेडिकल स्टोर्स जाकिर हुसैन वार्ड, नाज मेडिकल स्टोर्स खैराती बाजार, मां उमिया फार्मेसी राजपुरा रोड, आदर्श मेडिकल स्टोर्स न्यामतपुरा, यश मेडिकल स्टोर्स तुरकगुराड़ा, ए-वन फार्मेसी लालबाग रोड और हरि मेडिकोज जयस्तंभ शामिल हैं। विभाग ने चेतावनी दी है कि कारण बताओ नोटिस का जवाब संतोषजनक नहीं मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

26 दुकानों की जांच ने उठाए सवाल, अब जवाब और कार्रवाई पर नजर

एक सप्ताह में 26 मेडिकल स्टोर्स की जांच और पिछले माह की अनियमितताओं पर 10 दुकानों को नोटिस यह बताने के लिए पर्याप्त है कि दवा कारोबार में नियमों के पालन की लगातार निगरानी जरूरी है। दवा कोई सामान्य उपभोक्ता वस्तु नहीं है। गलत तरीके से बिक्री या रिकॉर्ड में लापरवाही सीधे मरीजों की सुरक्षा से जुड़ा विषय बन सकती है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि संबंधित मेडिकल स्टोर्स विभाग को क्या रिकॉर्ड और जवाब देते हैं तथा जांच के बाद किन मामलों में कार्रवाई होती है। फिलहाल औषधि विभाग ने संबंधित संचालकों से दस्तावेज तलब कर प्रक्रिया आगे बढ़ा दी है।

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