बुरहानपुर। सरकारी नौकरी में पदोन्नति के लिए कर्मचारियों की गोपनीय चरित्रावली और वरिष्ठता सूची जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेजों की जांच कितनी गंभीरता से होती है? जनजातीय कार्य विभाग में सामने आए एक मामले ने इस प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विभाग में पदस्थ सहायक ग्रेड-3 विनोद महाजन को तीन वर्षों की वार्षिक गोपनीय चरित्रावली में गलत जानकारी देने और अपूर्ण दस्तावेजों के बावजूद पदोन्नति के लिए वरिष्ठता सूची तैयार करवाने के मामले में निलंबित कर दिया गया है।
कलेक्टर कार्यालय, जनजातीय कार्य विभाग, बुरहानपुर द्वारा 15 सितंबर 2026 को जारी आदेश में महाजन की पदोन्नति प्रक्रिया से जुड़ी अनियमितताओं का उल्लेख किया गया है। आदेश के अनुसार, महाजन ने वर्ष 2020-21, 2021-22 और 2022-23 की वार्षिक गोपनीय चरित्रावली में अपने पदस्थापना संबंधी विवरण को लेकर गलत जानकारी प्रस्तुत की थी। इतना ही नहीं, पदोन्नति के लिए प्रस्तुत नस्ती में गोपनीय चरित्रावली अपूर्ण होने के बावजूद वरिष्ठता सूची तैयार करवाई गई। इसके बाद समिति के सदस्यों से नियमों के अनुरूप हस्ताक्षर प्राप्त कर नस्ती प्रस्तुत की गई। इन अनियमितताओं के आधार पर विभाग ने महाजन को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने का आदेश जारी किया।
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तीन साल की गोपनीय चरित्रावली में गलत जानकारी, पदोन्नति की नस्ती में सामने आई अनियमितता
विनोद महाजन कार्यालय सहायक आयुक्त, जनजातीय कार्य विभाग, जिला बुरहानपुर में सहायक ग्रेड-3 के पद पर कार्यरत थे। पदोन्नति के लिए प्रस्तुत दस्तावेजों में उनकी तीन वर्षों की गोपनीय चरित्रावली में गलत जानकारी देने का मामला सामने आया। विभागीय आदेश के अनुसार, वर्ष 2020-21, 2021-22 और 2022-23 की वार्षिक गोपनीय चरित्रावली में पदस्थापना संबंधी गलत जानकारी दी गई थी। इसके बावजूद पदोन्नति की प्रक्रिया आगे बढ़ाने के लिए वरिष्ठता सूची तैयार करवाई गई। आदेश में स्पष्ट उल्लेख है कि गोपनीय चरित्रावली अपूर्ण होने के बावजूद वरिष्ठता सूची तैयार करवाई गई और समिति के सदस्यों से नियमों के अनुरूप हस्ताक्षर प्राप्त कर नस्ती प्रस्तुत की गई। ऐसे में सवाल उठता है कि जब गोपनीय चरित्रावली ही अपूर्ण थी, तो पदोन्नति से जुड़ी वरिष्ठता सूची तैयार करने की प्रक्रिया किस आधार पर आगे बढ़ाई गई? दस्तावेजों की जांच के दौरान यह अनियमितता पहले क्यों नहीं पकड़ी गई? हालांकि, जारी आदेश में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि पदोन्नति की नस्ती किस स्तर तक पहुंची थी अथवा महाजन को संबंधित प्रक्रिया के माध्यम से पदोन्नति मिली थी या नहीं।
वरिष्ठता सूची तैयार हुई, समिति के हस्ताक्षर भी हुए; दस्तावेजों की जांच पर सवाल
इस मामले का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि अपूर्ण गोपनीय चरित्रावली के बावजूद वरिष्ठता सूची तैयार करवाई गई और पदोन्नति संबंधी नस्ती पर समिति के सदस्यों के हस्ताक्षर भी प्राप्त किए गए। पदोन्नति की प्रक्रिया में गोपनीय चरित्रावली कर्मचारी के सेवाकाल और कार्य मूल्यांकन से संबंधित महत्वपूर्ण दस्तावेज होती है। ऐसे में अपूर्ण चरित्रावली के आधार पर वरिष्ठता सूची तैयार करवाने का मामला विभागीय दस्तावेजों की जांच और सत्यापन की प्रक्रिया को लेकर सवाल खड़े करता है। क्या पदोन्नति संबंधी नस्ती प्रस्तुत करने से पहले संबंधित दस्तावेजों की पूर्णता सुनिश्चित की गई थी? वरिष्ठता सूची तैयार करते समय गोपनीय चरित्रावली अपूर्ण होने की जानकारी किस स्तर पर सामने आई? इन सवालों का जवाब जारी निलंबन आदेश में नहीं दिया गया है। आदेश में समिति के अन्य सदस्यों की किसी अनियमितता या उनके विरुद्ध कार्रवाई का उल्लेख भी नहीं है।
विनोद महाजन तत्काल प्रभाव से निलंबित
मामले में कलेक्टर कार्यालय, जनजातीय कार्य विभाग, जिला बुरहानपुर ने आदेश क्रमांक 3669, दिनांक 15 सितंबर 2026 के माध्यम से सहायक ग्रेड-3 विनोद महाजन को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय शासकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, नेपानगर निर्धारित किया गया है। इस अवधि में उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ते की पात्रता होगी। आदेश तत्काल प्रभाव से लागू किया गया है। संबंधित विभागीय अधिकारियों को आदेश की प्रतिलिपि भेजकर सूचना एवं आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
कार्रवाई के बाद भी कई सवाल बाकी, क्या पदोन्नति प्रक्रिया की होगी विस्तृत जांच?
विनोद महाजन के निलंबन के बाद पदोन्नति प्रक्रिया से जुड़े कई सवाल सामने हैं। तीन वर्षों की गोपनीय चरित्रावली में गलत जानकारी और अपूर्ण दस्तावेजों के बावजूद वरिष्ठता सूची तैयार करवाने का मामला विभागीय रिकॉर्ड के सत्यापन की प्रक्रिया से जुड़ा है। विशेष रूप से यह स्पष्ट होना बाकी है कि पदोन्नति की नस्ती में दर्ज गलत जानकारी किस स्तर पर सामने आई और अपूर्ण गोपनीय चरित्रावली के बावजूद वरिष्ठता सूची तैयार होने की स्थिति कैसे बनी।
फिलहाल विभाग ने विनोद महाजन के विरुद्ध निलंबन की कार्रवाई की है। जारी आदेश में विस्तृत विभागीय जांच की स्थिति, अन्य अधिकारियों की भूमिका अथवा पदोन्नति प्रक्रिया के अंतिम परिणाम का उल्लेख नहीं है। अब यह देखना होगा कि विभाग इस मामले में आगे क्या कार्रवाई करता है और पदोन्नति से जुड़े दस्तावेजों की जांच एवं सत्यापन को लेकर उठे सवालों पर क्या स्थिति स्पष्ट होती है।



