बुरहानपुर। हैदरपुर में कथित अवैध शराब बिक्री के खिलाफ अब गांव की महिलाएं आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं। कुछ समय पहले महिलाओं ने इसके खिलाफ समिति बनाई थी। अब महिलाओं ने खुले तौर पर चेतावनी दी है कि गांव में कच्ची-पक्की और देशी-विदेशी शराब की कथित अवैध बिक्री बंद नहीं हुई तो आंदोलन गांव से निकलकर कलेक्टर कार्यालय तक पहुंचेगा। महिलाएं घेराव, धरना-प्रदर्शन और चक्काजाम करेंगी।
महिलाओं की नाराजगी की सबसे बड़ी वजह यह है कि शिकायत के बाद कार्रवाई होने के बावजूद समस्या खत्म नहीं हो रही। उनका आरोप है कि कार्रवाई के कुछ दिन बाद शराब की बिक्री फिर शुरू हो जाती है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि यदि बार-बार शिकायतें सामने आ रही हैं तो अवैध शराब गांव तक पहुंच कैसे रही है और इसकी सप्लाई पर स्थायी रोक क्यों नहीं लग पा रही? एक दिन पहले भी शराब बेचने की सूचना पर महिलाएं एक घर पर पहुंच गईं और विरोध जताया। मामला बढ़ने पर नावरा चौकी पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस के अनुसार वहां से करीब 5 लीटर कच्ची शराब मिली और एक महिला के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया गया।
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शिकायत के बाद कार्रवाई, फिर वही हाल; महिलाओं ने व्यवस्था पर उठाए सवाल
हैदरपुर की महिलाओं का आरोप है कि अवैध शराब के खिलाफ शिकायत नई नहीं है। पहले भी शिकायत की गई और कार्रवाई हुई, लेकिन बिक्री पूरी तरह बंद नहीं हुई। महिलाओं का कहना है कि यदि कार्रवाई के बाद फिर शराब बिकने लगती है तो केवल एक-दो प्रकरण दर्ज करने से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा। ग्रामीणों ने आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं। आरोप है कि शिकायत मिलने पर विभाग सक्रिय होता है, कार्रवाई होती है, लेकिन कुछ समय बाद फिर वही स्थिति बन जाती है। महिलाओं की मांग है कि प्रशासन केवल शिकायत मिलने का इंतजार न करे, बल्कि गांव में लगातार निगरानी और जांच की व्यवस्था करे।
जमुना बाई का आरोप- खुलेआम बिक रही शराब
जमुना बाई ने आरोप लगाया कि गांव में खुलेआम अवैध शराब बेची जा रही है। पहले शिकायत के बाद कार्रवाई भी हुई, लेकिन कुछ समय बाद बिक्री दोबारा शुरू हो गई। उनका कहना है कि महिलाएं आखिर कब तक हर बार शिकायत लेकर अधिकारियों के पास जाएंगी? प्रशासन को ऐसी कार्रवाई करनी चाहिए जिससे अवैध बिक्री दोबारा शुरू ही न हो सके।
सुमन बाई बोलीं- नशे के बाद गाली-गलौज और मारपीट से बिगड़ रहा माहौल
सुमन बाई ने कहा कि शराब का असर केवल इसे पीने वाले व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता। नशे के बाद गाली-गलौज और मारपीट से परिवार परेशान होते हैं और गांव का माहौल खराब होता है। महिलाओं का कहना है कि इसकी सबसे ज्यादा मार घर की महिलाओं और बच्चों पर पड़ती है।
सावली बाई ने कहा- दिनभर की मजदूरी शराब में खत्म, घर कैसे चले?
सावली बाई ने आर्थिक परेशानी का मुद्दा उठाया। उनका कहना है कि मजदूरी करके मिलने वाला पैसा शराब में खर्च होने से परिवार का बजट बिगड़ जाता है। घर की रोजमर्रा की जरूरतें प्रभावित होती हैं। महिलाओं के मुताबिक यही वजह है कि उन्होंने अब सामूहिक रूप से आवाज उठाने का फैसला किया है। गवले बाई ने भी गांव में खुलेआम शराब बिकने का आरोप लगाते हुए प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग की।
सूचना मिली तो खुद घर तक पहुंच गईं महिलाएं
महिलाओं का विरोध अब केवल शिकायत देने तक सीमित नहीं है। एक दिन पहले गांव के एक घर से शराब बेचे जाने की सूचना मिलने पर महिलाएं स्वयं वहां पहुंच गईं। उन्होंने शराब बिक्री का विरोध किया। सूचना पर नावरा चौकी पुलिस भी मौके पर पहुंची। नावरा चौकी प्रभारी सुनील पाटिल ने बताया कि महिलाएं एक घर पर पहुंचकर विरोध कर रही थीं। पुलिस ने कार्रवाई की। मौके से करीब 5 लीटर कच्ची शराब मिलने पर एक महिला के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। यह कार्रवाई महिलाओं की शिकायत के एक हिस्से की पुष्टि करती है कि संबंधित स्थान पर कच्ची शराब मौजूद थी। हालांकि गांव में बड़े स्तर पर या अन्य स्थानों से अवैध शराब बिक्री के महिलाओं के आरोपों की अलग से जांच जरूरी है।
बड़ा सवाल- बेचने वाले पर केस, लेकिन शराब आ कहां से रही?
पुलिस ने पांच लीटर कच्ची शराब मिलने पर प्रकरण दर्ज कर दिया, लेकिन महिलाओं की मांग इससे आगे की है। उनका कहना है कि प्रशासन यह भी पता लगाए कि गांव में शराब की आपूर्ति कहां से हो रही है, कौन लोग इसे बेच रहे हैं और कार्रवाई के बाद दोबारा बिक्री शुरू होने की गुंजाइश कैसे बन रही है। यदि शिकायत के बाद कुछ मात्रा जब्त कर प्रकरण दर्ज होता है और कुछ समय बाद फिर वही शिकायत सामने आती है तो कार्रवाई की निरंतरता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। महिलाओं ने मांग की है कि कथित बिक्री वाले सभी ठिकानों की जांच के साथ नियमित निगरानी की जाए।
महिलाओं ने पहले बनाई समिति, अब आंदोलन की तैयारी
लगातार सामने आ रही शिकायतों को देखते हुए गांव की महिलाओं ने कुछ समय पहले एक समिति बनाई है। इसका उद्देश्य गांव में अवैध शराब की बिक्री के खिलाफ सामूहिक रूप से आवाज उठाना है। महिलाओं का कहना है कि वे अब अलग-अलग शिकायत करने के बजाय संगठित होकर प्रशासन के सामने मामला रखेंगी। महिलाओं ने प्रशासन को स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि गांव में अवैध शराब की बिक्री पर प्रभावी और स्थायी रोक नहीं लगी तो आंदोलन तेज किया जाएगा। महिलाओं का कहना है- अगला कदम कलेक्टर कार्यालय का घेराव होगा। जरूरत पड़ी तो धरना-प्रदर्शन और चक्काजाम भी करेंगे।
प्रशासन के सामने अब दोहरी चुनौती
हैदरपुर का मामला केवल पांच लीटर कच्ची शराब की जब्ती तक सीमित नहीं है। एक तरफ पुलिस ने कार्रवाई कर एक महिला के खिलाफ केस दर्ज किया है, दूसरी तरफ गांव की महिलाएं लगातार अवैध बिक्री होने का आरोप लगा रही हैं। ऐसे में प्रशासन के सामने चुनौती सिर्फ शिकायत पर कार्रवाई करने की नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करने की भी है कि कार्रवाई के बाद अवैध बिक्री दोबारा शुरू न हो। अब नजर इस बात पर रहेगी कि महिलाओं की चेतावनी के बाद आबकारी विभाग और प्रशासन गांव में व्यापक जांच और नियमित निगरानी करता है या मामला एक और प्रकरण दर्ज होने तक सिमट जाता है।

