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वन विभाग ने मनमानी कर जारी कर दिए समितियों को गोंद के लाइसेंस

अब हो रहा लाइसेंस जारी करने का विरोध, पहले भी एक बार इसी मामले में मच चुका है बवाल बुरहानपुर। वन विभाग ने मनमानी कर गोंद के लाइसेंस जिले की 6 समितियों को जारी कर दिए हैं, लेकिन यह मामला अब तूल पकड़ गया है, क्योंकि इसमें कहीं न कहीं नियमों की अनदेखी किए जाने […]

  • अब हो रहा लाइसेंस जारी करने का विरोध, पहले भी एक बार इसी मामले में मच चुका है बवाल

बुरहानपुर। वन विभाग ने मनमानी कर गोंद के लाइसेंस जिले की 6 समितियों को जारी कर दिए हैं, लेकिन यह मामला अब तूल पकड़ गया है, क्योंकि इसमें कहीं न कहीं नियमों की अनदेखी किए जाने की बात भी सामने आ रही है। इससे पहले भी एक बार नियम के विपरीत जाकर समितियों को लाइसेंस दिए जाने का मामला सामने आया था जिस पर काफी बवाल मचा था।
गौरतलब है कि वन विभाग की ओर से हाल ही में बुरहानपुर वन मंडल क्षेत्र में सलई के पेड़ों से गोंद निकालने के लिए करीब 6 लाइसेंस जारी किए गए हैं जबकि फरवरी 24 में खुद तत्कालीन डीएफओ विजय सिंह ने ही इस पर प्रतिबंध का आदेश जारी किया था। खास बात यह है कि जिले में पेसा एक्ट के तहत सिर्फ खकनार ब्लॉक ही आता है, लेकिन वन विभाग ने शाहपुर और बोदरली रेंज की भी कुछ समितियां लाइसेंस धारियों को आवंटित किए जिसे नियम विरूद्ध बताया जा रहा है। इसे लेकर पर्यावरण प्रेमी जितेंद्र रावतोले व शौकत अली ने वन विभाग को शिकायत कर लाइसेंस निरस्त करने की मांग की है।
वन अफसरों से की गई शिकायत
शिकायत में कहा गया कि प्रभारी डीएफओ ने 6 लाइसेंस जारी किए गए हैं। वहीं जिले में पहले से ही सलाई के पेड़ों को नुकसान पहुंचाया गया है उसके बावजूद केमिकल डालकर पेड़ों से गोंद निकालने की तैयारी की जा रही है। उन्होंने कहा पहले जब शिकायत की गई थी तब तत्कालीन डीएफओ ने 14 फरवरी 24 को खुद गोंद निकालने पर बैन लगाया था। जांच किए बिना ही 10 महीने में ही दोबारा लाइसेंस दे दिए गए। वहीं बताया ज रहा है कि जिले की वन समितियों ने इसके विरोध की तैयारी कर ली है, क्योंकि जिले में सलाई के पेड़ों का अस्तित्व समाप्त होने की कगार पर है। केमिकल का उपयोग सलाई के पेड़ों क लिए घातक माना जा रहा है।
रेंजरों से नहीं ली गई राय, राजनीतिक संरक्षण से इनकार नहीं
सूत्रों के अनुसार नियमानुसार समितियों का लाइसेंस जारी किया जाना चाहिए था, लेकिन इसमें खंडवा के डीएफओ और बुरहानपुर के प्रभारी डीएफओ ने शाहपुर क्षेत्र की भी समितियों को लाइसेंस दिए हैं जबकि पेसा एक्ट केवल खकनार ब्लॉक में लागू है। ऐसे में इस प्रक्रिया पर काफी सवाल उठ रहे हैं। मांग की जा रही है कि इसे निरस्त किया जाना चाहिए, क्योंकि वैसे भी जिले में गोंद माफिया सलाई के पेड़ों को केमिकल डालकर नुकसान पहुँचाने में पीछे नहीं रहते।
वर्जन-
शिकायत सामने आई तो कराएंगे जांच
* कुछ शिकायतें आती है कि केमिकल का इस्तेमाल कर गोंद निकालते हैं। इसलिए हम सतत मॉनिटरिंग कर रहे हैं। वर्किंग प्लान रहता है उसके आधार पर लाइसेंस जारी किए हैं। पिछले साल की तुलना में गोंद के माध्यम से रोजगार मिला है। करीब 15 हजार लोग जुड़े हैं। आपत्ति आती है तो जांच करेंगे। केमिकल से पेड़ों को नुकसान जरूर होता हैए लेकिन ऐसा न हो इसके प्रयास किए जा रहे हैं।
– अजय सागर, एसडीओ वन बुरहानपुर

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