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वैष्णवी को न्याय मिलता तो नागेश की मौत का “रहस्य” नहीं बनता!

हकीमी अस्पताल केस में FIR नहीं… परिजन बोले- प्रशासन ने आंखें मूंद लीं

  • ऑपरेशन किसने किया? कौन था OT में? आज तक नहीं बताया

  • लाइसेंस निरस्त फिर भी अस्पताल चालू… “कागजों पर कार्रवाई, मैदान में ढिलाई”

बुरहानपुर। मध्यप्रदेश के बुरहानपुर का हकीमी अस्पताल मामला अब सिर्फ एक “मौत” की कहानी नहीं, बल्कि लापरवाही, सिस्टम की सुस्ती और प्रशासनिक चुप्पी का वो चेहरा बन गया है, जो हर आम आदमी को डरा रहा है। 11 नवंबर को ऑपरेशन के दौरान वैष्णवी की मौत हुई, लेकिन दोषी डॉक्टरों पर आज तक FIR नहीं हुई। इसी देरी को लेकर हिन्दू संगठन और परिजनों ने बड़ा आरोप लगाया कि अगर प्रशासन उसी दिन सख्ती दिखाता तो वैष्णवी के पति नागेश चौहान की असमय और संदिग्ध मौत तक मामला नहीं पहुंचता।

Sadaiv News
वैष्णवी मौत मामले में परिजनों ने प्रशासन पर कार्रवाई नहीं करने के आरोप लगाए।

परिजनों का साफ कहना है— हम शांति से मांग कर रहे हैं, लेकिन प्रशासन बार-बार अनदेखी कर रहा है… इसलिए अब आवाज तेज करनी पड़ रही है।

अगर FIR हो जाती… तो नागेश की मौत न होती

शनिवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में हिन्दूवादी नेता, वैष्णवी के परिजन और अधिवक्ता महेश सिंह चौहान ने प्रशासन पर सीधा हमला बोलते हुए कहा वैष्णवी को न्याय मिल जाता, अपात्र डॉक्टरों पर उसी समय कार्रवाई हो जाती तो नागेश आज जिंदा होता। उन्होंने आरोप लगाया कि वैष्णवी की मौत के बाद भी प्रशासन ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया, इसी लापरवाही ने एक पूरे परिवार को दोहरी मौत का दर्द दे दिया।

अस्पताल ने कभी “अटैक” बताया, कभी “फेफड़ों में पानी”… सच्चाई क्या है?

परिजनों ने कहा कि अस्पताल प्रबंधन ने मौत के बाद लगातार कारण बदल-बदलकर बताए, जिससे शक और गहरा गया। कभी कहा हार्ट अटैक, कभी बोला फेफड़ों में पानी चला गया। महेश सिंह चौहान का आरोप है कि जब परिवार ने जानकारी मांगी तो उन्हें गुमराह किया गया, जबकि पूरे मामले में डॉक्टरी रिपोर्ट, OT रिकॉर्ड और जिम्मेदारी तय होना चाहिए थी।

सबसे बड़ा सवाल: 11 से ढाई बजे तक ऑपरेशन किसने किया?

इस पूरे मामले में अब तक का सबसे विस्फोटक सवाल यही है कि— वैष्णवी को सुबह 9 बजे अस्पताल बुलाया गया, ऑपरेशन का समय बताया जा रहा है 11 बजे से ढाई बजे के बीच लेकिन परिजनों का दावा है कि डॉ. रेहाना बोहरा दोपहर 2:05 बजे तक जिला अस्पताल में थीं। तो फिर सवाल सीधा है OT में ऑपरेशन किसने किया? क्या ऑपरेशन करने वाला डॉक्टर पात्र था? क्या वह डॉक्टर अधिकृत था या “बिना योग्यता” के काम कर रहा था? परिजनों ने कहा—आज तक प्रशासन ने इस पर एक लाइन भी साफ नहीं कही।

जनप्रतिनिधि मिले, कलेक्टर-एसपी को बताया… फिर भी कार्रवाई जीरो!

महेश सिंह चौहान ने बताया कि वैष्णवी की मौत के बाद जनप्रतिनिधियों ने कई बार कलेक्टर और एसपी से मुलाकात कर पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी। लेकिन नतीजा? ना FIR, ना गिरफ्तारी, ना जवाबदेही… बस लंबी चुप्पी! परिजनों का कहना है कि प्रशासन की यही ढिलाई आज मामले को और संवेदनशील बना रही है।

लाइसेंस निरस्त हुआ… फिर भी अस्पताल चालू! किसके संरक्षण में?

परिजनों ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल उठाते हुए कहा जिस अस्पताल का लाइसेंस निरस्त हुआ, वो आज भी चल रहा है… ये कार्रवाई नहीं, मजाक है! RTI के जरिए मिली जानकारी के आधार पर उन्होंने दावा किया कि सभी अस्पतालों का निरीक्षण दिखाया गया लेकिन 6 दिसंबर को लाइसेंस निरस्त होने के बाद भी एक अस्पताल चालू है। परिजनों ने आरोप लगाया कागजों में कार्रवाई हो रही है, असल में कुछ नहीं… लोग आज भी इलाज के नाम पर वहां जान जोखिम में डाल रहे हैं।

सांसद के आश्वासन के बाद निरस्त हुआ लाइसेंस

परिजनों का कहना है कि उन्होंने 3-4 बार प्रशासन को अवगत कराया, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। बाद में सांसद के आश्वासन के बाद ही लाइसेंस/रजिस्ट्रेशन निरस्त किया गया। महेश सिंह चौहान ने कहा हमारी पहली मांग है कि OT में कौन डॉक्टर था, उसकी पात्रता क्या थी, इसकी जांच हो और FIR दर्ज की जाए।

नागेश की संदिग्ध मौत पर भी सवाल: “25 दिन में भी सच नहीं आया”

वैष्णवी के पति नागेश चौहान की मौत को लेकर भी परिजनों ने गंभीर सवाल उठाए। महेश सिंह चौहान ने कहा वैष्णवी की मौत के डेढ़ माह बाद नागेश की संदिग्ध अवस्था में मौत हो गई। अब 25 दिन हो चुके हैं, लेकिन सच अब तक सामने नहीं आया। परिजनों ने आरोप लगाया कि प्रशासन की देरी से जांच कमजोर पड़ रही है। सबूत प्रभावित हो सकते हैं और जिम्मेदार लोग बचने की कोशिश में लगे हैं।

अब प्रदेश स्तर तक आंदोलन करेंगे

परिजनों ने साफ चेतावनी दी कि वे लोकतांत्रिक तरीके से विरोध कर रहे हैं और आगे भी करेंगे। उन्होंने कहा— दोषियों पर FIR नहीं हुई तो, अस्पतालों पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो, प्रशासन की चुप्पी जारी रही तो, प्रदेश स्तरीय आंदोलन छेड़ा जाएगा। अजित परदेशी प्रान्त कार्यकारिणी सदस्य हिन्दू जागरण मंच ने कहा कि मामले में देरी समझ से परे है। परिजनों का दावा है कि हिन्दू संगठन उनके साथ खड़े हैं और अब यह मुद्दा केवल परिवार नहीं, बल्कि जनहित और न्याय का सवाल है।

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