-
आरिफ मसूद भोपाल से बुरहानपुर पहुंचे तो शहर और ग्रामीण कांग्रेस के नेताओं ने बनाई दूरी
बुरहानपुर। जिले की कांग्रेस इस समय विपक्ष से ज्यादा अपनी ही अंदरूनी खींचतान से जूझती नजर आ रही है। गुटों में बंटी पार्टी अब खुलकर आमने-सामने दिखने लगी है। हालात यह हैं कि भोपाल से आए कांग्रेस विधायक और अल्पसंख्यक चेहरा आरिफ मसूद जब कलेक्ट्रेट पहुंचे, तो शहर और ग्रामीण कांग्रेस के कई नेता उनसे दूरी बनाते दिखाई दिए। सवाल उठने लगे हैं—क्या जिले में कांग्रेस एक है या कई टुकड़ों में बंट चुकी है?
दरअसल जिले में शहर कांग्रेस, ग्रामीण कांग्रेस और अलग-अलग नेताओं के गुट अपने-अपने कार्यक्रम चला रहे हैं। जयंतियां अलग, धरने अलग, बयान अलग। अंदरखाने टॉक कांग्रेस, रघुवंशी कांग्रेस, शेरा कांग्रेस जैसे नामों से गुटबाजी की चर्चा आम है। कार्यकर्ता भी असमंजस में हैं कि नेतृत्व आखिर किसके हाथ में है।
आरिफ मसूद का दौरा इस गुटबाजी को और उजागर कर गया। अल्पसंख्यकों के मुद्दों पर मुखर रहने वाले विधायक जब बुरहानपुर पहुंचे, तो स्थानीय नेतृत्व की बेरुखी ने राजनीतिक संदेश दे दिया। विपक्षी दलों ने भी इसे लेकर चुटकी ली कि जो पार्टी अल्पसंख्यकों की आवाज बनने का दावा करती है, वही अपने अल्पसंख्यक नेता के साथ एकजुट नहीं दिखी।
धरना, घेराव और ‘बकरा पॉलिटिक्स’
बुधवार को नगर कांग्रेस कमेटी की ओर से शहर की समस्याओं और एसआईआर में फर्जी शिकायतों को जय स्तंभ के पास धरना आंदोलन किया गया। इसके बाद कांग्रेस नेता नगर निगम का घेराव करने पहुंचे। यहां जमकर नारेबाजी और हंगामा किया गया। निगम आयुक्त कार्यालय में नहीं थे। इस दौरान कांग्रेस नेताओं ने एक बकरे के गले में ही ज्ञापन बांध दिया। जिला कांग्रेस अध्यक्ष रिंकू टॉक ने बताया शहर में आम जनता गंभीर समस्याओं से जूझ रही है, लेकिन मप्र सरकार और नगर निगम आंख मूंदे बैठा है। वोटर लिस्ट में नाम काटने की साजिश के जरिए लोकतंत्र को कमजोर किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर शहर में ब्लू नल के माध्यम से गंदा पानी सप्लाई किया जा रहा है, जिससे नागरिकों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है।
उन्होंने आगे कहा कि वृद्धावस्था पेंशन में भारी अव्यवस्थाओं के कारण बुजुर्ग परेशान हैं। संबल कार्ड पुनः जीवित नहीं किए जा रहे जिससे मजदूर और गरीब वर्ग सरकारी योजनाओं से वंचित हो रहा है।
तहसीलदार को सौंपा ज्ञापन
कांग्रेस नेताओं ने तहसीलदार प्रवीण ओहरिया को एसआईआर में की गई फर्जी शिकायतों को लेकर अलग से ज्ञापन दिया। तहसीलदार ने बताया कलेक्टर के माध्यम से ज्ञापन राज्य सरकार को भेजा जाएगा।
सियासी संदेश क्या?
बुरहानपुर की कांग्रेस इस समय दो मोर्चों पर लड़ रही है—एक सत्ता के खिलाफ और दूसरा अपने भीतर। चुनावी साल भले दूर हो, लेकिन गुटबाजी की यह तस्वीर अगर नहीं बदली तो नुकसान किसका होगा, यह सवाल कार्यकर्ताओं से लेकर शीर्ष नेतृत्व तक के सामने खड़ा है। फिलहाल शहर में चर्चा यही है—कांग्रेस का असली विरोधी कौन है, भाजपा या खुद कांग्रेस?
शहर में विकास के काम हो रहे
शहर में विकास के काम हो रहे हैं। मैं सीएम के आगमन की तैयारियों के सिलसिले में गया था। वापस आया तो यहां पता चला कि कांग्रेस नेताओं ने विरोध प्रदर्शन किया था। नगर में पेयजल वितरण व्यवस्था सुचारू है। सड़कों का भी काम कराया जा रहा है। जो कमियां है उसे दूर किया जा रहा है। – संदीप श्रीवास्तव, आयुक्त नगर निगम बुरहानपुर
ये भी पढ़े- बुरहानपुर कांग्रेस में मंच की कुर्सी पर मचा सियासी घमासान