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7 साल का रिश्ता, सगाई के बाद ‘रेप केस’… कोर्ट ने पलटा पूरा खेल, बोला– सहमति से बने थे संबंध, आरोपी बरी

लिव-इन जैसा था रिश्ता, परिवार भी मानता था दामाद… सगाई के बाद बिगड़े हालात, प्राइवेट पार्ट काटने की धमकी तक पहुंचा विवाद

बुरहानपुर। जिले में दुष्कर्म के एक हाई-प्रोफाइल मामले में सत्र न्यायालय ने बड़ा फैसला सुनाते हुए आरोपी युवक को सभी आरोपों से बरी कर दिया। कोर्ट ने अपने फैसले में साफ कहा कि यह मामला जबरदस्ती का नहीं, बल्कि आपसी सहमति से बने संबंधों का है, इसलिए दुष्कर्म की धाराएं लागू नहीं होतीं। यह केस शुरुआत में जितना सनसनीखेज था, उतना ही कोर्ट में जाकर उलझता गया। जांच और गवाही के दौरान सामने आए तथ्यों ने कहानी को पूरी तरह पलट दिया।

Sadaiv Newsदरअसल जांच में सामने आया कि युवक और युवती करीब 7 साल से एक-दूसरे को जानते थे। दोनों के बीच गहरा प्रेम संबंध था। आरोपी का पीड़िता के घर नियमित आना-जाना था। वह परिवार का खर्च तक उठाता था। यहां तक कि परिवार उसे दामाद की तरह मानता था। यानी मामला एक सामान्य दोस्ती या धोखे का नहीं, बल्कि लंबे समय से चले आ रहे रिश्ते का था।

केस दर्ज… लेकिन कहानी में ट्विस्ट

29 मार्च 2025 को युवती ने महिला थाने में शिकायत दर्ज कराई। आरोप लगाया कि आरोपी ने शादी का झांसा देकर कई बार दुष्कर्म किया। 29 मार्च को घर आकर जबरदस्ती संबंध बनाए। शादी से इनकार कर जान से मारने की धमकी दी। इसके बाद 2 अप्रैल को मामला दर्ज हुआ और पुलिस ने जांच शुरू की।

सगाई बनी विवाद की जड़

जांच में जो सबसे बड़ा खुलासा हुआ, वह था आरोपी की दूसरी जगह सगाई हो चुकी थी। यहीं से रिश्ते में दरार आई और मामला गंभीर होता चला गया। युवती ने आरोपी पर दबाव बनाना शुरू किया। एक बार प्राइवेट पार्ट काटने की धमकी भी दी गई। इसके बाद मामला सीधे दुष्कर्म केस तक पहुंच गया।

कोर्ट में बिखर गई कहानी

सुनवाई के दौरान कई अहम तथ्य सामने आए— पीड़िता ने खुद माना कि उसने आरोपी के साथ इंदौर में 8 दिन तक साथ रहकर संबंध बनाए। दोनों के बीच संबंध सहमति से बने थे। आरोपी ने बैंक ट्रांजेक्शन, खर्च के सबूत और दस्तावेज पेश किए। डीएनए जांच भी कराई गई। सबसे अहम बात कहीं भी जबरदस्ती या धोखे के ठोस प्रमाण सामने नहीं आए।

कोर्ट का सख्त रुख और फैसला

सत्र न्यायालय ने स्पष्ट कहा सहमति से बने संबंध को दुष्कर्म नहीं कहा जा सकता। शादी का झांसा देने का आरोप साबित नहीं हुआ। 29 मार्च की घटना भी प्रमाणित नहीं हुई। नतीजा: आरोपी को सभी आरोपों से बरी कर दिया गया। पीड़िता की और से पैरवी लोक अभियोजक श्याम देशमुख ने की। वही अभियुक्त की पैरवी अधिवक्ता हेमंत सिंह पाटिल ने की।

रिश्ते, विवाद और कानून

यह मामला कई अहम सवाल खड़े करता है- क्या रिश्ता टूटने के बाद लगाए गए आरोप हमेशा सही होते हैं? लिव-इन या लंबे रिलेशन में सहमति और आरोप की सीमा कहां है? कोर्ट ने साफ कर दिया कि भावनात्मक विवाद और आपसी सहमति वाले संबंधों को दुष्कर्म की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता।

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