Homeबुरहानपुरकृष्ण जन्मभूमि पर ‘अंतिम लड़ाई’ का ऐलान!...

कृष्ण जन्मभूमि पर ‘अंतिम लड़ाई’ का ऐलान! न्याय नहीं मिला तो कार सेवा और आंदोलन तय

पंढरपुर से मथुरा तक हुंकार— संतों की जनजागृति यात्रा से बढ़ा दबाव  

बुरहानपुर। श्रीकृष्ण जन्मभूमि और शाही ईदगाह मस्जिद को लेकर वर्षों पुराना विवाद अब निर्णायक मोड़ की ओर बढ़ता नजर आ रहा है। करीब 13.37 एकड़ भूमि में से ढाई एकड़ जमीन को लेकर चल रहा कानूनी संघर्ष एक बार फिर सुर्खियों में है, लेकिन इस बार मामला सिर्फ अदालत तक सीमित नहीं—संत समाज सड़कों पर उतर चुका है।

श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति आंदोलन के तहत निकली जनजागृति यात्रा ने पूरे देश में इस मुद्दे को फिर जगा दिया है। द्वितीय चरण में यह यात्रा 4 अप्रैल को पंढरपुर से निकली, बुरहानपुर पहुंची और अब 14 अप्रैल को मथुरा पहुंचने वाली है, जहां इसके चरम पर पहुंचने के संकेत हैं। उन्होंने बताया कि पहली यात्रा 2025 में द्वारिका से मथुरा और अक्टूबर 2025 में बद्रीधाम से मथुरा तक की गई थी। तीसरी यात्रा रामेश्वरम से मथुरा की है, जिसे दो चरणों में बांटा गया है। पहला चरण रामेश्वरम से पंढरपुर तक था, और दूसरा चरण 26 अप्रैल से पंढरपुर से मथुरा तक जारी है। चौथी यात्रा जगन्नाथपुरी से मथुरा की होगी।

सरकार सोई तो संत जगाएंगे…

संयुक्त भारतीय धर्म संसद के राष्ट्रीय अध्यक्ष आचार्य राजेश्वर ने बुरहानपुर में मीडिया से बातचीत में तीखे तेवर दिखाए। उन्होंने साफ कहा हमने न्यायालय में याचिका दायर की है, लेकिन अगर संतों की भावनाओं को नजरअंदाज किया गया तो आंदोलन और कार सेवा से पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने सरकार पर सीधा निशाना साधते हुए कहा गली से लेकर दिल्ली तक सरकार है, लेकिन संत समाज के प्रति संवेदनशीलता नजर नहीं आती।

इतिहास, समझौते और अब टकराव…

आचार्य राजेश्वर ने कहा मथुरा को भगवान श्रीकृष्ण की जन्मस्थली माना जाता है और ऐतिहासिक स्रोतों में यहां भव्य मंदिरों के अस्तित्व का उल्लेख मिलता है। आक्रमणों में मंदिरों को नुकसान के कई उल्लेख मिले है। कुछ विवरणों में महमूद गजनवी के हमले का जिक्र भी है। मुगल काल में भी विवादित घटनाएं हुई है, जिसके प्रमाण समय-समय पर हिन्दू समाज ने दिए है। इतिहासकार ऑड्रे ट्रस्के ने भी अपने अध्ययन में इन संदर्भों का उल्लेख किया है।

  • 1951: श्रीकृष्ण जन्मभूमि ट्रस्ट का गठन
  • 1968: मंदिर ट्रस्ट और ईदगाह कमेटी के बीच समझौता
  • अब: विवादित हिस्से पर मामला न्यायालय में लंबित
यात्रा का मकसद: आस्था बनाम अतिक्रमण

जनजागृति यात्रा के जरिए संत समाज का साफ संदेश है अतिक्रमण हटाओ, जन्मभूमि को “मुक्त” करो और देशभर में जनसमर्थन तैयार करो। बुरहानपुर में यात्रा का स्वागत ओमप्रकाश शर्मा नेतृत्व में किया गया। इस दौरान बलराज नावानी, मुकेश पूर्वे, मुकेश डालमिया, सदानंद कापसे, मनीष गंगराड़े, उल्लास पटेल, दुर्गेश पाटिल, अविनाश श्राफ, रंजन भालेराव और महेश सिंह चौहान, अजीत परदेशी सहित कई लोग मौजूद थे। यह मुद्दा अब स्थानीय नहीं, राष्ट्रीय अस्तित्व का विषय बनता जा रहा है। बुरहानपुर से यात्रा प्रस्थान करने पर कृषि उपज मंडी में कर्मचारी महासंघ के प्रदेशाध्यक्ष ठाकुर संतोष सिंह दीक्षित के नेतृत्व में यात्रा का स्वागत किया गया।

अदालत में केस, सड़कों पर दबाव

फिलहाल पूरा मामला न्यायालय में विचाराधीन है और सभी पक्ष अपनी-अपनी दलीलें रख रहे हैं। लेकिन जिस तरह संत समाज ने आंदोलन और कार सेवा की चेतावनी दी है, उससे आने वाले समय में स्थिति और संवेदनशील हो सकती है। संकेत साफ हैं कोर्ट का फैसला निर्णायक होगा, लेकिन उससे पहले जनदबाव बढ़ाने की रणनीति शुरू हो चुकी है।

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