बुरहानपुर। राखी के त्योहार को इस बार पर्यावरण और ग्रामीण महिला सशक्तिकरण की खुशबू से सजाया जा रहा है। जिला बुरहानपुर में आजीविका मिशन की स्व सहायता समूह की दीदियां केले के तने से इको-फ्रेंडली राखियाँ तैयार कर रही हैं, जो अब ऑनलाइन ऑर्डर पर घर बैठे भी उपलब्ध हैं।
केले के तने से रेशे निकालकर बन रहीं आकर्षक राखियां
“एक जिला एक उत्पाद” योजना के तहत बुरहानपुर में केला फसल को चुना गया है। इसी को आधार बनाकर स्व सहायता समूह की महिलाएं केले के तनों से रेशा निकालकर न सिर्फ राखियां बना रही हैं, बल्कि टोकरियां, पेन स्टैंड, झाड़ू, झूमर, गुड़िया, पर्स, और सजावटी वस्तुएं भी तैयार कर रही हैं।
ऑनलाइन खरीदने का विकल्प भी उपलब्ध
अब आप ये सुंदर, देसी और हाथ से बनी ईको-फ्रेंडली राखियां अपने घर बैठे ऑनलाइन मंगवा सकते हैं: https://banacraft.com/shop-6-2 संपर्क: 91091-31531ऑर्डर प्रोसेस:
Add to Cart → Change Address → Process to Checkout → Fill Billing Details → Place Order इसके अलावा जिला पंचायत कार्यालय में स्टॉल भी लगाया गया है, जिसे कलेक्टर हर्ष सिंह ने खुद देखा और दीदियों की मेहनत की सराहना की।
हर राखी में बहन का स्नेह और प्रकृति का संदेश
परियोजना प्रबंधक संतमती खलखो ने बताया— यह सिर्फ राखी नहीं, बल्कि बहनों के स्नेह और प्रकृति के प्रति प्रेम की अभिव्यक्ति है। इन राखियों को बनाने में 20–30 मिनट का समय लगता है और हर एक का मूल्य ₹30 से ₹50 के बीच तय किया गया है।
महिला सशक्तिकरण का जीवंत उदाहरण
ग्राम एकझिरा की लवकुश स्व सहायता समूह की दीदी अनुसुइया और ग्राम डोंगरगांव की दीदियां इस काम में जुटी हैं। राखियों की बिक्री से एक सीजन में ₹35,000 से ₹40,000 तक की आमदनी होती है, जिससे महिलाएं स्वरोजगार के साथ-साथ अपने परिवार को भी बेहतर जीवन दे रही हैं।
पर्यावरण संरक्षण + पारंपरिक पर्व = ईको राखी
• ये राखियां 100% प्राकृतिक हैं
• प्लास्टिक से मुक्ति और स्थानीय संसाधनों का श्रेष्ठ उपयोग
• हर खरीदी एक महिला को सशक्त बनाती है