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धूलकोट में इलाज के लिए जंग: 50 हजार लोगों की सांसें अटकी… न डॉक्टर, न एंबुलेंस

25 गांवों की जिंदगी एक PHC पर टिकी, गर्भवती महिलाएं सबसे ज्यादा परेशान… कलेक्टर से गुहार लगाने पहुंचे ग्रामीण

On: March 24, 2026 9:03 PM
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धूलकोट में स्वास्थ्य संकट: 50 हजार लोग बिना डॉक्टर-एंबुलेंस

बुरहानपुर। धूलकोट में बीमारी अब सिर्फ तकलीफ नहीं, बल्कि जिंदगी और मौत के बीच की जंग बन चुकी है। यहां 25 गांवों के करीब 50 हजार लोग एक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के भरोसे हैं, लेकिन वहां न डॉक्टर है, न एंबुलेंस… और न ही इलाज की कोई ठोस व्यवस्था। इसी दर्द और लाचारी को लेकर मंगलवार को बड़ी संख्या में ग्रामीण जनप्रतिनिधियों के साथ कलेक्टर कार्यालय पहुंचे। हाथों में आवेदन था, लेकिन आंखों में उम्मीद के साथ-साथ नाराजगी भी साफ झलक रही थी।

Sadaiv News
धूलकोट के ग्रामीण स्वास्थ्य सुविधाओं की मांग को लेकर कलेक्टर कार्यालय पहुंचे
अस्पताल है… लेकिन डॉक्टर नहीं, इलाज नहीं

धूलकोट प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की तस्वीर बेहद चिंताजनक है। एक भी एमबीबीएस डॉक्टर पदस्थ नहीं, एंबुलेंस की सुविधा शून्य, जरूरी स्टाफ का अभाव। यानी अस्पताल का भवन खड़ा है, लेकिन उसमें इलाज की धड़कन नहीं है।

50 हजार लोगों का भरोसा… लेकिन व्यवस्था नाकाम

धूलकोट PHC पर पिपराणा, बोरी बुजुर्ग, चिखल्या, सराय, उतांबी, दवाटिया, अंबा, गंभीरपुरा, सुक्ता खुर्द, धौंड, हरदा सहित 25 गांवों के लोग निर्भर हैं। इतनी बड़ी आबादी के लिए बुनियादी स्वास्थ्य सुविधा भी उपलब्ध नहीं होना प्रशासनिक दावों पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।

35 किमी दूर अस्पताल… रास्ते में टूटती उम्मीदें

डॉक्टर नहीं होने के कारण हर मरीज को 35 किमी दूर बुरहानपुर जिला अस्पताल भेजा जाता है। ग्रामीणों की पीड़ा साफ है- गंभीर मरीज रास्ते में ही दम तोड़ सकते हैं, समय पर इलाज मिलना मुश्किल साथ ही गरीब परिवारों के लिए खर्च उठाना भी भारी है।

एंबुलेंस के इंतजार में गुजरते कीमती मिनट

धूलकोट में खुद की एंबुलेंस नहीं है। नेपानगर या बुरहानपुर से एंबुलेंस बुलानी पड़ती है, और तब तक मरीज की हालत बिगड़ती जाती है। यह देरी कई बार जिंदगी और मौत के बीच फर्क बन जाती है।

गर्भवती महिलाओं पर सबसे बड़ा संकट

अंबा उपस्वास्थ्य केंद्र में 15–18 महीने से नर्स तक नहीं है, जिससे गर्भवती महिलाओं की जांच नहीं हो पा रही। प्रसव से पहले जरूरी देखभाल नहीं मिल रही। स्वास्थ्य सेवाएं सिर्फ टीकाकरण तक सीमित। यह स्थिति आने वाली पीढ़ी के स्वास्थ्य पर भी खतरा बन रही है।

हमारे यहां बीमार होना मतलब खतरा मोल लेना

ग्रामीणों का दर्द शब्दों में झलकता है यहां अगर कोई बीमार पड़ जाए तो सबसे पहले चिंता इलाज की नहीं, बल्कि अस्पताल तक पहुंचने की होती है… कई बार तो रास्ते में ही उम्मीद टूट जाती है।

कलेक्टर से सीधी मांग: अब नहीं तो कब?

ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने प्रशासन के सामने स्पष्ट मांग रखी- धूलकोट PHC में तत्काल MBBS डॉक्टर की नियुक्ति। क्षेत्र में स्थायी एंबुलेंस की व्यवस्था और उपस्वास्थ्य केंद्रों में नर्सिंग स्टाफ की तैनाती जल्द की जाए। ग्रामीणों ने दो टूक कहा कि अगर जल्द समाधान नहीं हुआ तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे। ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने स्वास्थ्य समस्याओं का तत्काल निराकरण किया जाए। इस दौरान पवन कुमार बर्डे सहित अन्य ग्रामीण भी मौजूद रहे।

बड़ा सवाल… जवाब का इंतजार

धूलकोट की यह स्थिति सिर्फ एक गांव की समस्या नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की सच्चाई उजागर करती है। क्या 50 हजार लोगों को बुनियादी इलाज का हक मिलेगा… या वे यूं ही जिंदगी की इस जंग में अकेले लड़ते रहेंगे?

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