बुरहानपुर। वनभूमि पर अवैध कब्जों के खिलाफ बुरहानपुर वन विभाग ने एक बार फिर सख्त कार्रवाई की है। वनमंडल बुरहानपुर के वनपरिक्षेत्र बुरहानपुर अंतर्गत बीट दक्षिण बलड़ी के कक्ष क्रमांक 14 में विभाग ने बड़ा अभियान चलाकर करीब 55 हेक्टेयर वनभूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया। कार्रवाई के दौरान वनभूमि पर अवैध रूप से बनाए गए 10 आधे-अधूरे टप्परों को तोड़कर हटाया गया। साथ ही दोबारा कब्जे की संभावना रोकने के लिए क्षेत्र में अतिक्रमण रोधी खंती भी खोदी गई।
यह कार्रवाई वनसंरक्षक खंडवा बासु कन्नौजिया के निर्देशन, वनमंडलाधिकारी बुरहानपुर विद्या भूषण सिंह के मार्गदर्शन और उपवनमंडलाधिकारी अजय सागर के नेतृत्व में की गई। वनपरिक्षेत्र अधिकारी बुरहानपुर लक्सा सोलंकी के साथ विभागीय अमले ने योजनाबद्ध तरीके से अभियान चलाया। खास बात यह रही कि पूरी कार्रवाई शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई और मौके पर किसी प्रकार के विवाद की स्थिति नहीं बनी।
75 वन अधिकारी-कर्मचारी, 25 सुरक्षा श्रमिक रहे मौजूद
कार्रवाई को प्रभावी बनाने के लिए करीब 100 सदस्यीय दल मैदान में उतारा गया था। इसमें 75 वन अधिकारी-कर्मचारी और 25 सुरक्षा श्रमिक शामिल रहे। अभियान में परिक्षेत्र अधिकारी खकनार रितेश उईके, वनपरिक्षेत्र अधिकारी शाहपुर श्यामलता मेरावी, वनपरिक्षेत्र अधिकारी बोदरली लखनलाल वास्कले सहित अन्य अधिकारी-कर्मचारी मौजूद रहे।
वन विभाग के अनुसार, दक्षिण बलड़ी क्षेत्र में अवैध अतिक्रमण की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही थी। इसके बाद विभाग ने संयुक्त अमले के साथ मौके पर पहुंचकर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की। वनभूमि की सुरक्षा के लिए अब ऐसे क्षेत्रों में खंती खोदकर अतिक्रमणकारियों की दोबारा घुसपैठ रोकने के प्रयास किए जा रहे हैं।
झांझर में फिर सक्रिय होने लगे अतिक्रमणकारी
वन विभाग की लगातार कार्रवाई के बावजूद कुछ क्षेत्रों में अतिक्रमणकारी फिर सक्रिय होने की कोशिश कर रहे हैं। पिछले दिनों झांझर क्षेत्र में भी वन विभाग ने अतिक्रमण हटाया था, लेकिन अब वहां कुछ स्थानों पर फिर से अतिक्रमणकारियों के बसने की खबरें सामने आ रही हैं। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि ऐसे सभी क्षेत्रों की निगरानी की जा रही है और वनभूमि पर कब्जे की किसी भी कोशिश को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
अधिकारियों ने साफ कहा है कि जंगलों को नुकसान पहुंचाने वाले और वनभूमि पर अवैध कब्जा करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। जहां भी अतिक्रमण की सूचना मिलेगी, वहां तत्काल अमला भेजकर बेदखली की जाएगी।
ढाई साल पहले हुई थी जिले की सबसे बड़ी कार्रवाई
करीब ढाई साल पहले वन विभाग ने नावरा और नेपानगर रेंज में जिले की सबसे बड़ी अतिक्रमण विरोधी कार्रवाई की थी। उस दौरान पुलिस और जिला प्रशासन के सहयोग से करीब एक हजार से अधिक बाहरी अतिक्रमणकारियों की टपरियां हटाई गई थीं। यह अभियान लगातार 17 दिनों तक चला था। कार्रवाई के बाद क्षेत्र में बड़े पैमाने पर पौधारोपण भी किया गया था।
हालांकि, वन विभाग के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि कार्रवाई के बाद भी बाहरी अतिक्रमणकारी समय-समय पर जंगलों में दोबारा घुसने का प्रयास करते हैं। इसी को देखते हुए विभाग अब वनभूमि की सुरक्षा के लिए खंती खोदने, निगरानी बढ़ाने और मैदानी अमले को सक्रिय रखने की रणनीति पर काम कर रहा है।
वनभूमि पर कब्जे की कोशिश बर्दाश्त नहीं होगी
वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि अतिक्रमण के खिलाफ यह अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा। अधिकारियों का कहना है कि वनभूमि केवल प्राकृतिक संपदा नहीं, बल्कि पर्यावरण संतुलन और आने वाली पीढ़ियों की सुरक्षा से जुड़ा विषय है। इसलिए जंगलों पर अवैध कब्जे, टप्पर निर्माण और बाहरी अतिक्रमणकारियों की गतिविधियों पर सख्ती से रोक लगाई जाएगी।
विभाग की इस कार्रवाई से अतिक्रमणकारियों में हड़कंप है। वहीं वन विभाग ने साफ संदेश दे दिया है कि जंगल और वनभूमि की सुरक्षा के मामले में अब किसी भी तरह की ढिलाई नहीं बरती जाएगी।