बुरहानपुर। शहर में एक बार फिर सत्ता, सिस्टम और स्कूल के गठजोड़ पर सवाल खड़े हो गए हैं। गणपति नाका क्षेत्र स्थित निमाड़ वैली इंटरनेशनल स्कूल पर सरकारी सामुदायिक भवन में कक्षाएं चलाने का बड़ा मामला सामने आया है। शिकायत के बाद प्रशासन हरकत में आया और सोमवार को तहसीलदार की टीम ने मौके पर पहुंचकर कब्जा खाली करा दिया। यह स्कूल पूर्व विधायक हमीद काजी के बेटे नूर काजी द्वारा संचालित किया जा रहा है, जिससे मामला और भी संवेदनशील और चर्चित बन गया है।
सरकारी भवन में चल रही थी क्लास, कार्रवाई के बाद खुला पूरा खेल
जानकारी के मुताबिक वर्ष 2003 में विधायक निधि से बनाए गए सामुदायिक भवन के दो कक्षों में लंबे समय से स्कूल की कक्षाएं संचालित की जा रही थीं। शिकायत मिलने के बाद तहसीलदार प्रवीण ओहरिया टीम के साथ मौके पर पहुंचे और तत्काल प्रभाव से भवन खाली कराकर ग्राम पंचायत ऐमागिर्द को सौंप दिया। प्रशासन की इस कार्रवाई ने साफ कर दिया कि सरकारी संपत्ति का निजी उपयोग किया जा रहा था, जो नियमों के खिलाफ है।
तहसीलदार बोले—जांच में सामुदायिक भवन ही निकला
तहसीलदार प्रवीण ओहरिया ने स्पष्ट कहा कि जांच में यह पुष्टि हुई कि भवन सामुदायिक उपयोग के लिए बना है, लेकिन स्कूल द्वारा इसका उपयोग किया जा रहा था। कब्जा हटाकर पंचायत को सौंप दिया गया है। आगे किराया और अन्य वसूली का मामला पंचायत तय करेगी।
पंचायत की तैयारी—अब होगी किराया और टैक्स वसूली
ग्राम पंचायत ऐमागिर्द के सरपंच अब्दुल शाहिद ने कहा कि नियमों के तहत अब किराया और टैक्स की वसूली की जाएगी। पंचायत को कब्जा सौंप दिया गया है और आगे की कार्रवाई नियमानुसार की जाएगी।
संचालक का पलटवार—‘कार्रवाई अवैधानिक’, कोर्ट जाने की चेतावनी
वहीं स्कूल संचालक नूर काजी ने पूरे मामले को सिरे से खारिज करते हुए प्रशासन पर ही सवाल उठा दिए। उनका कहना है कि यह जमीन वक्फ बोर्ड की है और रिकॉर्ड में कहीं भी सामुदायिक भवन दर्ज नहीं है। उन्होंने साफ कहा कि वे इस कार्रवाई के खिलाफ कोर्ट जाएंगे और वक्फ बोर्ड में भी शिकायत करेंगे।
पहले भी विवादों में रहा स्कूल
यह कोई पहला मामला नहीं है जब निमाड़ वैली इंटरनेशनल स्कूल विवादों में आया हो। बिना अनुमति संचालन के आरोप, छात्राओं से राजनीतिक फॉर्म भरवाने का मामला, अन्य प्रशासनिक शिकायतें लगातार विवादों के बावजूद कार्रवाई का देर से होना भी सवाल खड़े करता है।
बड़ा सवाल—किसके संरक्षण में चल रहा था खेल?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है— क्या इतने वर्षों तक सरकारी भवन में स्कूल चलना प्रशासन को नजर नहीं आया? क्या किसी स्तर पर संरक्षण मिला हुआ था? आखिर शिकायत के बाद ही कार्रवाई क्यों? यह मामला सिर्फ एक स्कूल तक सीमित नहीं, बल्कि प्रशासनिक निगरानी और जवाबदेही पर बड़ा सवाल है।