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शिकायत पर नायब तहसीलदार कविता सोलंकी ने दर्ज कराया प्रकरण
बुरहानपुर। तहसील कार्यालय खकनार में गुरुवार को ऐसा मामला सामने आया जिसने पूरा प्रशासन हिला दिया। एक ऑनलाइन दुकान चलाने वाले युवक ने नायब तहसीलदार के हस्ताक्षर और पदनाम का क्लोन बनाकर फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र जारी कर दिया। मामले के खुलासे के बाद थाना खकनार में धारा 318(4), 336(3), 337 BNS के तहत अपराध दर्ज किया गया है।
दरअसल ग्राम पंचायत बिजौरी के सचिव दीपक आम्बेकर को ग्राम निवासी गोवर्धन पिता ताराचंद ने एक मृत्यु प्रमाण पत्र सौंपा। जांच के लिए जब उस प्रमाण पत्र का आरएस नंबर (467/2304/651/2025) ऑनलाइन पोर्टल पर डाला गया तो पता चला कि उसी नंबर का दूसरा आदेश पहले ही 01 अक्टूबर 2025 को तहसीलदार जितेंद्र अलावा के डिजिटल हस्ताक्षर से जारी हो चुका था। जबकि गोवर्धन के पास जो प्रमाण पत्र था, वह 03 अक्टूबर 2025 का था और उस पर नायब तहसीलदार कविता सोलंकी के कथित हस्ताक्षर और रबर सील लगी थी, जो बाद में फर्जी पाई गई।
2,500 रुपए में मिल गया ‘सरकारी’ प्रमाण पत्र
गोवर्धन ने अपने बयान में कहा कि वह 29 सितंबर को अपने काका गोकुल पिता हिरा का मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने खकनार लोकसेवा केंद्र गया था। वहाँ उसे शपथपत्र की ज़रूरत बताई गई। इसके बाद वह बैंक ऑफ इंडिया खकनार के ऊपर रोहन फोटोकॉपी एमपी ऑनलाइन की दुकान पर गया जहाँ संचालक विनोद पवार पिता चैनसिंग पवार (निवासी ग्राम पांगरी) ने 600 रु. लिए और कहा कि सर्टिफिकेट बनाकर दे दूँगा। तीन दिन बाद फोन करने पर विनोद ने कहा दुकान पर आ जाओ। वहाँ पहुंचने पर उसने 1,900 रु. अतिरिक्त लिए और ‘सरकारी’ मृत्यु प्रमाण पत्र दे दिया। प्रमाण पत्र पर रबर सील, हस्ताक्षर और विजिटिंग कार्ड था जिस पर मोबाइल नंबर लिखा था।
तहसील कार्यालय में हलचल — दो आदेश, दो हस्ताक्षर
जांच में यह बड़ा सवाल सामने आया कि एक ही आरएस नंबर से दो मृत्यु पंजीयन आदेश कैसे जारी हुए? एक डिजिटल हस्ताक्षर से वैध, दूसरा फर्जी रबर सील से हाथ से बना हुआ। नायब तहसीलदार कविता सोलंकी ने तुरंत मामला संज्ञान में लेते हुए लेखी शिकायत थाना खकनार को सौंप दी। साथ ही गोवर्धन तथा उसके रिश्तेदार राम्या पिता बाबू से बयान लेकर प्रमाण पत्र की दोनों प्रति जब्त की गई।
BNS की धाराओं के तहत मामला दर्ज
पुलिस ने मामले में प्राथमिक जांच के बाद आरोपी विनोद पवार के खिलाफ़ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की निम्न धाराओं के तहत अपराध दर्ज किया है धारा 336(3) : सरकारी दस्तावेज़ की जालसाजी, धारा 337 : न्यायालय या सार्वजनिक अभिलेख में फर्जीवाड़ा, धारा 318(4) : किसी अधिकारी के पदनाम या हस्ताक्षर का दुरुपयोग मामले की विवेचना थाना खकनार के अधिकारियों के मार्फत चल रही है।
प्रशासन के लिए बड़ा सबक
इस घटना ने प्रशासनिक व्यवस्था की कमज़ोरी उजागर कर दी है। डिजिटल सिस्टम के बावजूद अगर किसी ऑनलाइन दुकान से ‘सरकारी सर्टिफिकेट’ तैयार कर बाज़ार में घूम सकता है, तो यह गंभीर मुद्दा है। अधिकारियों का मानना है कि अब सभी एमपी ऑनलाइन सेंटरों की जांच और ऑडिट करना जरूरी है।
नागरिकों के लिए चेतावनी
- सरकारी दस्तावेज़ मिलने के बाद हमेशा पोर्टल से सत्यापन करें।
- किसी ‘लोकसेवा केंद्र’ या ‘एमपी ऑनलाइन’ दुकान से कोई काम कराते समय रसीद और ऑफिशियल रजिस्टर एंट्री अनिवार्य रूप से माँगें।
- फर्जीवाड़े का संदेह होने पर तुरंत पुलिस या तहसील कार्यालय को सूचित करें।