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कब्रिस्तान मौजूद, फिर सरकारी जमीन पर क्यों दफनाया शव? जैनाबाद में बवाल, कलेक्टर-SP तक पहुंची शिकायत

- खसरा 214, 215 और 216 को लेकर हिन्दू जागरण मंच और ग्रामीणों का विरोध, अब जमीन के सीमांकन और कार्रवाई की मांग

बुरहानपुर। ग्राम जैनाबाद में सरकारी जमीन पर शव दफनाने को लेकर विवाद गहरा गया है। मामला अब गांव की सीमा से निकलकर कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक तक पहुंच गया है। हिंदू जागरण मंच एवं ग्रामीणों ने 31 अगस्त को कलेक्टर, एसपी और शिकारपुरा थाना प्रभारी को शिकायत सौंपकर आरोप लगाया कि ग्राम जैनाबाद के खसरा क्रमांक 214, 215 और 216 की शासकीय भूमि पर बिना अनुमति शव दफनाया गया। शिकायतकर्ताओं ने प्रशासन से तत्काल जांच कर नियमानुसार कार्रवाई करने की मांग की है। इस दौरान निलेश कुशवाह, शिवाजी राजपूत, गोलू मराठा, पवन कुशवाह, आकाश ठाकुर सहित कई ग्रामवासी मौजूद रहे

शिकायत में सबसे गंभीर सवाल जमीन की स्थिति और दफनाने के स्थान को लेकर उठाया गया है। ग्रामीणों का दावा है कि संबंधित भूमि शासकीय है और वहां शासन द्वारा वृक्षारोपण भी कराया गया है। इसके बावजूद इसी जमीन पर शव दफनाने से ग्रामीणों में नाराजगी है।

सवाल—कब्रिस्तान उपलब्ध तो सरकारी जमीन पर शव क्यों दफनाया?

हिन्दू जागरण मंच के अजित परदेशी का कहना है कि जैनाबाद में मुस्लिम समाज के लिए करीब चार कब्रिस्तान उपलब्ध हैं, इसके बाद भी शव को कथित तौर पर शासकीय जमीन पर दफनाया गया। इसी बिंदु को आधार बनाकर ग्रामीणों ने आशंका जताई है कि कहीं इसके जरिए सरकारी जमीन पर भविष्य में अधिकार अथवा कब्जे का दावा खड़ा करने की कोशिश तो नहीं की जा रही। हालांकि चार कब्रिस्तान उपलब्ध होने और कब्जे की नीयत संबंधी बातें शिकायतकर्ताओं के आरोप हैं। प्रशासनिक जांच और राजस्व अभिलेखों के आधार पर ही इनकी पुष्टि हो सकेगी।

सरपंच के मना करने पर भी दफनाने का आरोप

शिकायत में कहा गया है कि गांव के सरपंच ने भी संबंधित शासकीय जमीन पर शव दफनाने का विरोध किया था। इसके बावजूद शव वहीं दफनाया गया। शिकायतकर्ताओं ने यहां तक आरोप लगाया है कि विरोध करने पर गांव में दंगा कराने की धमकी दी गई और दबाव बनाकर वृक्षारोपण स्थल पर शव दफनाया गया। यह आरोप गंभीर है। इसलिए पुलिस जांच में यह स्पष्ट होना जरूरी होगा कि मौके पर वास्तव में क्या घटनाक्रम हुआ, किन लोगों के बीच विवाद हुआ और क्या किसी व्यक्ति द्वारा धमकी दी गई थी। फिलहाल शिकायत पत्र में लगाए गए इन आरोपों पर दूसरे पक्ष और पुलिस-प्रशासन का विस्तृत पक्ष सामने आना बाकी है।

खसरा 214, 215 और 216 की जमीन किस मद में दर्ज? राजस्व रिकॉर्ड खोलेगा स्थिति

पूरे विवाद का सबसे अहम पहलू खसरा क्रमांक 214, 215 और 216 की वास्तविक राजस्व स्थिति है। शिकायतकर्ताओं ने इसे शासकीय संपत्ति बताया है। ऐसे में प्रशासन के सामने सबसे पहला सवाल यही है कि राजस्व रिकॉर्ड में ये खसरे किस मद में दर्ज हैं और शव जिस स्थान पर दफनाया गया, वह इन्हीं खसरों की सीमा में आता है या नहीं। यदि विवादित स्थान का विधिवत सीमांकन कराया जाता है तो जमीन की स्थिति को लेकर चल रहे दावों की तस्वीर काफी हद तक साफ हो सकती है।

शिकायत में शव हटाकर कब्रिस्तान में दफनाने की मांग

हिंदू जागरण मंच और ग्रामीणों ने प्रशासन के सामने मांग रखी है कि यदि जांच में शिकायत सही पाई जाती है तो दफनाए गए शव को नियमानुसार संबंधित स्थान से हटाकर कब्रिस्तान में दफनाया जाए। साथ ही सरकारी जमीन को संरक्षित कर भविष्य में उस पर किसी तरह का अतिक्रमण न होने दिया जाए। शिकायतकर्ताओं ने कार्रवाई नहीं होने की स्थिति में आंदोलन की चेतावनी भी दी है और इसकी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन पर होने की बात कही है।

संवेदनशील मामला, आरोपों से ज्यादा जरूरी दस्तावेजी सच

मामला धार्मिक भावनाओं, शव दफनाने और सरकारी जमीन तीनों से जुड़ा है, इसलिए प्रशासन के लिए इसकी निष्पक्ष और त्वरित जांच जरूरी हो जाती है। केवल शिकायत में किए गए दावों के आधार पर किसी पक्ष को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा। अब तीन तथ्य निर्णायक होंगे—जमीन का सरकारी रिकॉर्ड क्या कहता है, शव वास्तव में किस खसरे की जमीन पर दफनाया गया और क्या इसके लिए सक्षम स्तर से कोई अनुमति ली गई थी। इन सवालों के जवाब सामने आने के बाद ही साफ होगा कि जैनाबाद में हुआ दफन नियमों के मुताबिक था या शिकायतकर्ताओं के आरोपों के अनुसार सरकारी जमीन के उपयोग का मामला है। फिलहाल शिकायत कलेक्टर, एसपी और शिकारपुरा थाना प्रभारी तक पहुंच चुकी है और प्रशासनिक जांच पर ग्रामीणों की नजर है।

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