बुरहानपुर। शहर के बहुचर्चित 7 लाख रुपए के चेक अनादरण मामले में बुरहानपुर न्यायालय ने बड़ा और सख्त फैसला सुनाया है। न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी श्रीमती रीना पिपलिया की अदालत ने “गीता टेक्सटाइल्स प्राइवेट लिमिटेड” के संचालक और “श्री गीता प्रोसेसर्स” के प्रोपराइटर अनुरोध मित्तल को दोषी मानते हुए 1 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही न्यायालय ने आरोपी पर 9 लाख 40 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया है।
यह मामला पिछले करीब 3 वर्षों से न्यायालय में विचाराधीन था। लंबे समय से चल रही सुनवाई के बाद अदालत ने अंतिम निर्णय सुनाते हुए परिवादी प्रशांत गुप्ता के पक्ष में फैसला पारित किया।
चेक अनादरण का था मामला
प्राप्त जानकारी के अनुसार, मामला 7 लाख रुपए के चेक के अनादरण से जुड़ा था। परिवादी पक्ष का आरोप था कि आरोपी द्वारा जारी किया गया चेक बैंक में प्रस्तुत किए जाने के बाद अनादरित हो गया। इसके बाद परिवादी ने न्यायालय की शरण ली। मामला लंबे समय तक न्यायालय में चला और दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद अदालत ने आरोपी अनुरोध मित्तल को दोषी पाया। न्यायालय ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपी को 1 साल के सश्रम कारावास और 9.40 लाख रुपए जुर्माने से दंडित करने का आदेश दिया।
परिवादी पक्ष की ओर से अधिवक्ता मनोज अग्रवाल ने की पैरवी
परिवादी प्रशांत गुप्ता की ओर से अधिवक्ता मनोज कुमार अग्रवाल ने न्यायालय में पैरवी की। अधिवक्ता अग्रवाल ने बताया कि चेक अनादरण से जुड़े मामलों में शीघ्र निर्णय का प्रावधान है। उन्होंने कहा कि इस मामले में भी जल्द फैसला हो, इसके लिए लगातार प्रयास किए गए, लेकिन प्रकरण करीब 3 वर्षों तक लंबित रहा। अधिवक्ता अग्रवाल के अनुसार, अंततः नवागत न्यायाधीश द्वारा मामले में अंतिम फैसला सुनाते हुए उनके पक्षकार के पक्ष में निर्णय पारित किया गया है। उन्होंने कहा कि एक वकील के रूप में अपने पक्षकार को न्याय दिलाने की जिम्मेदारी पूरी होने से उन्हें संतोष है।
व्यापारिक लेन-देन में लापरवाही पड़ेगी भारी
न्यायालय का यह फैसला व्यापारिक और आर्थिक लेन-देन में चेक जारी करने वालों के लिए महत्वपूर्ण संदेश माना जा रहा है। चेक देना केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि वित्तीय जिम्मेदारी है। चेक अनादरण के मामलों में कानून सख्त है और ऐसे मामलों में दोष सिद्ध होने पर सजा व जुर्माने दोनों का प्रावधान है। इस निर्णय के बाद यह साफ संदेश गया है कि व्यापारिक लेन-देन में भरोसे का उल्लंघन और भुगतान में लापरवाही को न्यायालय गंभीरता से लेता है।
न्यायालय का फैसला बना चर्चा का विषय
शहर के औद्योगिक और व्यापारिक क्षेत्र से जुड़े इस मामले में आए फैसले के बाद व्यापारिक जगत में भी चर्चा तेज हो गई है। लंबे समय से चल रहे इस प्रकरण में अदालत का निर्णय चेक लेन-देन की गंभीरता को रेखांकित करता है।
कानूनी जानकारों का कहना है कि चेक अनादरण के मामलों में पक्षकारों को समय पर दस्तावेज, बैंक मेमो, नोटिस और भुगतान से जुड़े प्रमाण सुरक्षित रखने चाहिए, क्योंकि अदालत ऐसे मामलों में साक्ष्यों के आधार पर ही अंतिम निर्णय देती है। बुरहानपुर न्यायालय का यह फैसला उन लोगों के लिए भी चेतावनी है जो व्यापारिक लेन-देन में चेक जारी करने के बाद भुगतान की जिम्मेदारी से बचने का प्रयास करते हैं।