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ब्लैक फंगस से मौत की दस्तक… डॉक्टरों ने छीनी अंधेरे से रोशनी, 65 वर्षीय बुजुर्ग को मिली नई जिंदगी

ऑल इज़ वेल हॉस्पिटल के डॉक्टरों ने यह असंभव दिखने वाली लड़ाई जीती

बुरहानपुर। कोरोना काल में दहशत का दूसरा नाम बना ब्लैक फंगस (म्यूकोर्मिकोसिस) एक बार फिर जान लेने की तैयारी में था। भावसा के 65 वर्षीय बुजुर्ग के चेहरे की हड्डियां अंदर से गल चुकी थीं। ऊपरी जबड़ा, गाल की हड्डी, तालू और आंख के नीचे का हिस्सा संक्रमण से सड़ चुका था। डॉक्टरों के सामने चुनौती सिर्फ संक्रमण हटाने की नहीं थी, बल्कि मरीज की आंखों की रोशनी और चेहरे की बनावट बचाने की भी थी।

Sadaiv News
जटिल सर्जरी के बाद डॉक्टरों ने ब्लैक फंगस से संक्रमित मरीज को दी नई जिंदगी।

शहर के ऑल इज़ वेल हॉस्पिटल में डॉक्टरों ने यह असंभव दिखने वाली लड़ाई जीत ली। जटिल सर्जरी के बाद न सिर्फ मरीज की जान बची, बल्कि उनकी आंखों की रोशनी और चेहरे की कार्यक्षमता भी पूरी तरह सुरक्षित रही।

कोरोना के बाद शुरू हुआ खतरा

परिवार के मुताबिक, कोरोना संक्रमण के दौरान मरीज को तेज सिरदर्द, चेहरे में सूजन और आंख के नीचे असहनीय दर्द होने लगा। जांच में सामने आया कि यह साधारण संक्रमण नहीं, बल्कि तेजी से फैलने वाला ब्लैक फंगस है। डॉक्टरों ने बताया कि संक्रमण जबड़े से होते हुए आंख के नीचे की हड्डी तक पहुंच चुका था। जरा सी देरी दृष्टि छीन सकती थी।

ऑपरेशन थिएटर में 8 घंटे की निर्णायक जंग

अस्पताल के वरिष्ठ ओरल एंड मैक्सिलोफेशियल सर्जन Dr. Owais Siddiqui (एमडीएस) के नेतृत्व में विशेषज्ञ टीम ने तत्काल सर्जरी का फैसला लिया।ऑपरेशन के दौरान संक्रमित ऊपरी जबड़ा, गाल की हड्डी, तालू और आंख के नीचे का हिस्सा सावधानीपूर्वक हटाया गया। यह सर्जरी बेहद जोखिम भरी थी। थोड़ी सी चूक से आंखों की रोशनी जा सकती थी। चेहरे में स्थायी विकृति आ सकती थी। संक्रमण दिमाग तक फैलने का खतरा था, लेकिन डॉक्टरों ने सटीक योजना और आधुनिक तकनीक के सहारे संक्रमण को पूरी तरह निकाल दिया।

महीनों की दवाएं, सख्त निगरानी… फिर सफल क्लोजर

सर्जरी के बाद मरीज को हाई-पावर एंटी-फंगल दवाएं दी गईं। कई महीनों तक लगातार मॉनिटरिंग की गई। हाल ही में सफल क्लोजर ऑपरेशन के बाद डॉक्टरों ने उन्हें पूरी तरह संक्रमण मुक्त घोषित किया।

सबसे राहत की बात यह रही कि आंखों की रोशनी सुरक्षित रही, आंखों की मूवमेंट सामान्य है, चेहरे की बनावट में कोई विकृति नहीं आई, बोलने और खाने की क्षमता सामान्य है।

मेरी आंख और जिंदगी दोनों बच गई

मरीज ने भावुक होकर कहा, मुझे लगा था अब मैं अंधा हो जाऊंगा या शायद जिंदा नहीं बचूंगा। डॉक्टरों ने मुझे दूसरी जिंदगी दी है। अगर समय पर इलाज नहीं होता तो सब खत्म हो जाता। परिवार के सदस्यों की आंखें भी इस दौरान नम हो गईं।

बुरहानपुर में बड़ी चिकित्सा उपलब्धि

अस्पताल प्रबंधन ने इसे जिले के लिए बड़ी उपलब्धि बताया। मैनेजिंग डायरेक्टर श्री कबीर चौकसे और एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर श्रीमती देवांशी चौकसे ने पूरी टीम को बधाई दी। विशेषज्ञों का कहना है कि ब्लैक फंगस जैसे संक्रमण में शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज करना जानलेवा साबित हो सकता है। समय पर जांच और विशेषज्ञ इलाज ही जीवन बचा सकता है।

ये भी पढ़े- बुरहानपुर में चिकित्सा क्रांति: कोहनी प्रत्यारोपण से लेकर कैंसर सर्जरी तक, ऑल इज़ वेल हॉस्पिटल की अविश्वसनीय उपलब्धियाँ

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