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खकनार जंगल में बाघ शावक की मौत से हड़कंप! जांच में जुटी एक्सपर्ट टीम, वन अपराध दर्ज

- एनटीसीए गाइडलाइन पर त्वरित एक्शन, डॉग स्क्वॉड से सर्च… सभी अंग सुरक्षित, पोस्टमार्टम के बाद विधिसम्मत दाह

On: April 3, 2026 8:48 PM
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Tiger cub death investigation in Khaknar forest Burhanpur

बुरहानपुर। खकनार वनपरिक्षेत्र के पलासपानी बीट में मादा बाघ शावक की मौत से वन विभाग में हड़कंप मच गया। घटना सामने आते ही प्रशासन ने अलर्ट मोड में आते हुए मौके को सील कर जांच शुरू कर दी। शुक्रवार को भोपाल से आई टीम और सीसीएफ सहित अन्य वन अफसरों की मौजूदगी में एसओपी के अनुसार मादा बाघ का पोस्टमार्टम के बाद अंतिम संस्कार किया गया।

Sadaiv News
खकनार जंगल में बाघ शावक की मौत के बाद वन विभाग अलर्ट

दरअसल 2 अप्रैल को एक वन्यजीव मादा बाघ की मौत वन भूमि के कक्ष क्रमांक 355 बीट पलासपानी वन परिक्षेत्र खकनार में सामने आया। वन विभाग ने नेशनल टाइगर कंसर्वेशन अथॉरिटी (एनटीसीए) नईदिल्ली और मुख्य वन्यजीव अभिरक्षक कार्यालय भोपाल के दिशा-निर्देशों के तहत त्वरित कार्रवाई करते हुए पूरे इलाके को सुरक्षित कर सघन जांच अभियान चलाया।

घटना की गंभीरता को देखते हुए मौके पर डॉग स्क्वॉड बुलाकर आसपास के क्षेत्र में सर्च ऑपरेशन चलाया गया। वन विभाग की टीम ने घटनास्थल को सील किया। आसपास के इलाके की बारीकी से तलाशी ली। हर संभावित एंगल से जांच शुरू की। मामले को हल्के में नहीं लिया जा रहा, हर पहलू पर गहन पड़ताल जारी है। यह क्षेत्र मप्र महाराष्ट्र की सीमा पर है। महाराष्ट्र से बाघों का मप्र के बुरहानपुर जिले में आना जाना लगा रहता है, क्योंकि बुरहानपुर जिला महाराष्ट्र के मेलघाट टाइगर रिजर्व से भी सटा है। अफसरों के अनुसार फॉरेंसिक टीम की जांच के बाद आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।

भोपाल से विशेषज्ञ टीम पहुंची, हुआ पोस्टमार्टम

वनमण्डलाधिकारी विद्याभूषण सिंह के अनुसार, बाघ शावक का पोस्टमार्टम विशेषज्ञों की टीम ने किया, जिसमें डॉ. प्रशांत देशमुख (वन्यजीव चिकित्सक, भोपाल), डॉ. विकास माहिले (पशु चिकित्सक, खकनार) शामिल रहे। प्रारंभिक जांच में राहत की बात यह सामने आई कि बाघ शावक के शरीर के सभी अंग सुरक्षित पाए गए, जिससे अवैध शिकार की आशंका फिलहाल कम मानी जा रही है।

कड़ी निगरानी में हुआ अंतिम संस्कार

निर्धारित प्रोटोकॉल के तहत बाघ शावक का शवदाह/भस्मीकरण किया गया। यह प्रक्रिया वरिष्ठ अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी में पूरी की गई, जिनमें वन संरक्षक बासु कनौजिया, तहसीलदार रविंद्रसिंह मंडलोई, ग्राम सरपंच सुमारीबाई, एनटीसीए प्रतिनिधि मंजीत सिंह, वन्यजीव विशेषज्ञ डॉ. प्रशांत देशमुख व अन्य शामिल रहे। पूरी कार्रवाई को पारदर्शिता के साथ अंजाम दिया गया, ताकि किसी भी तरह की शंका की गुंजाइश न रहे।

वन अपराध दर्ज, हर एंगल से जांच जारी

वन विभाग ने इस मामले में वन अपराध प्रकरण दर्ज कर लिया है और अब आगे की जांच तेज कर दी गई है। अधिकारियों का कहना है कि मौत के वास्तविक कारण का खुलासा पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद होगा। किसी भी तरह की लापरवाही या अपराध पाए जाने पर सख्त कार्रवाई होगी।

पहले भी हो चुकी है वन्यप्राणियों की मौत

जिले में इससे पहले भी वन्यप्राणियों की मौत हो चुकी है। पिछले साल भी एक बाघिन का शव मिला था। तब उसकी मौत करंट लगने से हुई थी। वहीं इससे पहले 2020 में नेपानगर वन क्षेत्र में एक बाघ का शव मिला था तब वन विभाग ने उसकी अधिक उम्र के कारण मौत होना बताया था। वन्य्रप्राणियों के लिए अलग से नियम तय हैं। उसके अनुसार ही अफसरों की मौजूदगी में पारदर्शिता के साथ पोस्टमार्टम कराया गया। साथ ही वन विभाग की टीम ने डॉग स्कवायड की मदद से क्षेत्र में लगातार सर्चिंग की।

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