बुरहानपुर। जिले में वन्यप्राणियों की मौतों का सिलसिला थम नहीं रहा है। बीते वर्षों में बाघ और तेंदुए की मौत के मामले सामने आ चुके हैं। कुछ दिन पहले बाघ की मौत का मामला सामने आने के बाद अब शाहपुर रेंज के इच्छापुर क्षेत्र में करीब ढाई साल की मादा तेंदुए का शव मिलने से वन विभाग में हड़कंप मच गया है। लगातार हो रही घटनाओं ने वन्यप्राणियों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
वन मंडल बुरहानपुर के शाहपुर रेंज अंतर्गत इच्छापुर क्षेत्र के नागोनी में शनिवार को वन विभाग को एक केले के खेत में मादा तेंदुए का शव मिला। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची। आसपास के क्षेत्र की जांच कराई गई और डॉग स्क्वायड की मदद से भी सर्चिंग की गई, ताकि तेंदुए की मौत किन परिस्थितियों में हुई, इसका पता लगाया जा सके।
रविवार दोपहर इच्छापुर वन विभाग नाके पर डॉक्टरों की टीम ने मादा तेंदुए का पोस्टमार्टम किया। पोस्टमार्टम में तेंदुए के सिर और पेट पर चोट के निशान पाए गए हैं। इससे प्राथमिक तौर पर चोटों के कारण मौत की आशंका जताई जा रही है। हालांकि मौत का वास्तविक कारण जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा।
डीएफओ विद्याभूषण सिंह ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि तेंदुए का शव नागोनी क्षेत्र में केले के खेत से मिला था। पोस्टमार्टम में चोटों के निशान सामने आए हैं। सैंपल जांच के लिए लेबोरेटरी भेजे जाएंगे। रिपोर्ट आने के बाद मौत की असल वजह स्पष्ट होगी।
जांच के बाद ही साफ होगी मौत की वजह
वन विभाग के अनुसार घटना स्थल और आसपास के क्षेत्र में टीम द्वारा जांच की गई है। डॉग स्क्वायड की मदद से भी सर्चिंग कराई गई। फिलहाल यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि तेंदुआ खेत तक कैसे पहुंचा और उसे चोटें किस कारण लगीं। पोस्टमार्टम के बाद मानक संचालन प्रक्रिया के तहत तेंदुए का अंतिम संस्कार किया जाएगा।
इस दौरान बुरहानपुर के प्रभारी एसडीओ विक्रम सुलिया और शाहपुर रेंज का स्टाफ मौजूद रहा। वन विभाग ने मामला जांच में लिया है।
लगातार मौतों से सुरक्षा इंतजामों पर सवाल
बुरहानपुर जिला महाराष्ट्र के टाइगर रिजर्व मेलघाट क्षेत्र से सटा हुआ है। इसी कारण वन्यप्राणियों का बुरहानपुर जिले की सीमा में आना-जाना बना रहता है। ऐसे में वन्यप्राणियों की सुरक्षा के लिए प्रभावी निगरानी और पुख्ता इंतजाम जरूरी हैं। लेकिन जिले में बार-बार वन्यप्राणियों की मौत के मामले सामने आने से वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। वन्यप्राणी कभी खेतों, कभी जंगल की सीमा और कभी आबादी से सटे इलाकों में मृत मिल रहे हैं। हर बार विभाग जांच और सैंपल रिपोर्ट की बात करता है, लेकिन मौतों पर अंकुश लगाने के लिए ठोस कदम जमीनी स्तर पर नजर नहीं आ रहे हैं।
मेलघाट से आवाजाही, लेकिन सुरक्षा कमजोर
मेलघाट टाइगर रिजर्व से सटे होने के कारण बुरहानपुर का वन क्षेत्र वन्यजीवों के लिए संवेदनशील माना जाता है। बाघ, तेंदुआ सहित अन्य वन्यप्राणी इस क्षेत्र में आवाजाही करते हैं। ऐसे में वन विभाग के सामने चुनौती सिर्फ जांच करने की नहीं, बल्कि वन्यप्राणियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की भी है। नागोनी में मादा तेंदुए की मौत ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि जिले में वन्यप्राणियों की निगरानी, सुरक्षा और संवेदनशील क्षेत्रों में सतर्कता को लेकर विभाग कितना तैयार है। फिलहाल सभी की नजर जांच रिपोर्ट पर है, जिससे तेंदुए की मौत की वास्तविक वजह सामने आ सकेगी।