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98 करोड़ की तबाही! आंधी-तूफान ने बुरहानपुर के केला किसानों की कमर तोड़ी, 7,500 किसानों की 8,300 हेक्टेयर फसल बर्बाद 

150 से ज्यादा गांव प्रभावित; सर्वे पूरा, शासन को भेजी जाएगी रिपोर्ट; जीआई टैग मिलने के अगले ही दिन सामने आई नुकसान की बड़ी तस्वीर

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बुरहानपुर। देशभर में अपनी गुणवत्ता और स्वाद के लिए पहचान रखने वाले बुरहानपुर के केले पर इस बार प्रकृति की ऐसी मार पड़ी कि हजारों किसानों की सालभर की मेहनत कुछ ही घंटों में जमीन पर बिछ गई। प्रशासन के सर्वे में खुलासा हुआ है कि जिले में मई अंत और जून की शुरुआत में आए तेज आंधी-तूफान से 150 से अधिक गांवों के करीब 7,500 किसानों की 8,300 हेक्टेयर केला फसल बर्बाद हुई है। प्रारंभिक आकलन में नुकसान की भरपाई के लिए करीब 98 करोड़ रुपए का मुआवजा तय किया गया है।

Sadaiv News
बुरहानपुर में आंधी-तूफान से 98 करोड़ रुपए की केला फसल बर्बाद।

दरअसल 29, 30 मई और 1 जून को जिले में आए तेज हवा, आंधी और तूफान ने सबसे ज्यादा नुकसान केला उत्पादक क्षेत्रों में किया। हजारों एकड़ में खड़ी फसल देखते ही देखते धराशायी हो गई। हालात ऐसे बने कि कई किसानों के खेतों में तैयार फसल पूरी तरह जमीन पर गिर गई और उत्पादन की सारी उम्मीदें खत्म हो गईं।

दूसरे दिन से शुरू हुआ सर्वे, अब सामने आई पूरी तस्वीर

प्राकृतिक आपदा के बाद प्रशासन ने तत्काल सर्वे शुरू कराया था। एसडीएम और तहसीलदार स्तर पर किए गए सर्वे की रिपोर्ट 23 जून को कलेक्ट्रेट में जमा की गई। रिपोर्ट के अनुसार जिले में यह अब तक की सबसे बड़ी केला फसल क्षति मानी जा रही है।प्रशासनिक आंकड़ों के मुताबिक सबसे अधिक नुकसान शाहपुर और फोपनार क्षेत्र में दर्ज किया गया है। यहां कई गांवों में खेतों के खेत बर्बाद हो गए। सर्वे में सामने आया कि हजारों किसानों की आजीविका प्रभावित हुई है। तहसीलदार दयाराम अवास्या के अनुसार सर्वे पूरा हो चुका है, हालांकि अभी दावा-आपत्ति की प्रक्रिया जारी है। इसके बाद अंतिम प्रतिवेदन राज्य शासन को भेजा जाएगा, जहां से स्वीकृति मिलने पर मुआवजा राशि किसानों के खातों में जमा की जाएगी।

जीआई टैग की खुशी, नुकसान की चिंता भारी

बुरहानपुर के केले को हाल ही में विशिष्ट पहचान (जीआई टैग) मिलने की खुशी जिले में मनाई जा रही थी। इससे किसानों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेहतर अवसर मिलने की उम्मीद जगी थी। लेकिन उसी दौरान सामने आए नुकसान के आंकड़ों ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। किसानों का कहना है कि पहचान और सम्मान अपनी जगह है, लेकिन वर्तमान स्थिति में सबसे बड़ी जरूरत आर्थिक राहत की है। फसल चौपट होने के बाद अब अगली खेती की तैयारी और बैंक ऋण चुकाने की चिंता किसानों को सता रही है।

प्रदेश का सबसे बड़ा केला उत्पादक जिला

बुरहानपुर प्रदेश का प्रमुख केला उत्पादक जिला है। यहां केले की खेती का इतिहास वर्ष 1960 से जुड़ा माना जाता है। जिले की जलवायु, मिट्टी और भौगोलिक परिस्थितियां केले की खेती के लिए अनुकूल हैं।

जिले की तस्वीर एक नजर में
  • 18,640 किसान केले की खेती से जुड़े
  • 26,120 हेक्टेयर क्षेत्र में केला उत्पादन
  • 28 लाख मीट्रिक टन वार्षिक उत्पादन
  • 150 से अधिक गांव प्रभावित
  • 7,500 किसान प्रभावित
  • 8,300 हेक्टेयर फसल क्षति
  • 98 करोड़ रुपए प्रस्तावित मुआवजा
सबसे बड़ा सवाल: बीमा नहीं तो सहारा कौन?

जिले के केला किसानों की सबसे बड़ी पीड़ा यह है कि उन्हें फसल बीमा योजना का लाभ नहीं मिलता। वर्ष 2018-19 में एक बार बीमा का लाभ मिला था, लेकिन उसके बाद से आज तक केला फसल बीमा के दायरे से बाहर है। किसान संगठनों ने कई बार आंदोलन और ज्ञापन देकर बीमा सुविधा बहाल करने की मांग उठाई, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है। यही वजह है कि हर बार प्राकृतिक आपदा आने पर किसान केवल सरकारी राहत और मुआवजे के भरोसे रह जाते हैं। इस बार भी हजारों किसानों की निगाहें राज्य सरकार पर टिकी हैं।

अब शासन के फैसले का इंतजार

सर्वे रिपोर्ट तैयार होने के बाद अब गेंद शासन के पाले में है। प्रशासन ने नुकसान का आकलन कर मुआवजा प्रस्तावित कर दिया है, लेकिन राहत राशि कब स्वीकृत होगी और किसानों के खातों तक कब पहुंचेगी, इसका जवाब अभी किसी के पास नहीं है। फिलहाल बुरहानपुर का किसान एक तरफ जीआई टैग की उपलब्धि पर गर्व महसूस कर रहा है, तो दूसरी तरफ 98 करोड़ रुपए की फसल क्षति के दर्द से भी जूझ रहा है। आने वाले दिनों में राहत राशि का इंतजार ही किसानों के लिए सबसे बड़ी उम्मीद बना हुआ है।

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