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‘‘दीदी की राखी’’ – 27 साल से घर-घर पहुंच रहा है अर्चना दीदी का स्नेहिल रक्षा सूत्र

एक लाख 18 हजार से अधिक भाइयों की कलाई पर बंधी स्नेह की डोर

On: August 12, 2025 8:40 PM
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दीदी की राखी – अर्चना चिटनिस द्वारा भेजा गया रक्षा सूत्र

बुरहानपुर। रक्षाबंधन का पर्व भाई-बहन के रिश्ते में प्रेम और विश्वास का प्रतीक है, लेकिन बुरहानपुर में इस त्योहार की एक अलग पहचान है। विधायक एवं पूर्व मंत्री अर्चना चिटनिस  पिछले 27 वर्षों से ‘‘दीदी की राखी’’ के नाम से एक अनूठी परंपरा निभा रही हैं — हर साल जिले, प्रदेश और देशभर में अपने भाइयों को रक्षा सूत्र और विशेष संदेश भेजकर।

इस वर्ष एक लाख 18 हजार से अधिक रक्षा सूत्र विशेष संदेश के साथ भेजे जा रहे हैं। यह डोर केवल कलाई तक सीमित नहीं, बल्कि मन से मन को जोड़ने का कार्य कर रही है। रक्षा सूत्र के साथ मिलने वाले संदेश में स्नेह, सामाजिक सरोकार, देशभक्ति और समयानुकूल प्रेरक बातें शामिल रहती हैं।

पुराने रिश्ते, नए जुड़ाव

हर वर्ष इस सूची का नवीनीकरण किया जाता है। पुराने संपर्क वाले भाई जुड़े रहते हैं, जबकि नए भाइयों की संख्या लगातार बढ़ रही है। अगर किसी भाई का स्वर्गवास हो जाए, तो भी यह परंपरा उनके परिवार के साथ बनी रहती है — उन्हें भी रक्षा सूत्र और संदेश भेजा जाता है। भाई इस परंपरा से इतने जुड़े हैं कि अगर किसी को यह राखी न मिले, तो वे स्वयं संपर्क कर अपनी मीठी नाराज़गी जताते हैं। रक्षा सूत्र का वितरण विशेष रूप से क्षेत्र के कार्यकर्ता, नागरिक और सहयोगी घर-घर जाकर कर रहे हैं।

इस बार का संकल्प संदेश

श्रावण पूर्णिमा, युगाब्ध 5127 पर अर्चना दीदी ने प्रेम और विश्वास के साथ रक्षाबंधन मनाते हुए भाइयों को “आस, प्रयास और विकास” को लक्ष्य बनाकर महान भारत के लिए जीवनपर्यंत योगदान का संकल्प सूत्र भेजा।

श्रीमती चिटनिस द्वारा भेजे गए संदेश में इस वर्ष राष्ट्रकवि रामधारी दिनकर की पंक्तियां पिरोई हैरू- वसुधा का नेता कौन हुआ? भूखण्ड-विजेता कौन हुआ? अतुलित यश क्रेता कौन हुआ नव-धर्म प्रणेता कौन हुआ? जिसने न कभी आराम किया, विघ्नों में रहकर नाम किया। वाटिका और वन एक नहीं, आराम और रण एक नहीं। वर्षा, अंधड़, आतप अखंड, पौरुष के हैं साधन प्रचण्ड। वन में प्रसून तो खिलते हैं, बागों में साल न मिलते हैं।  छाया देता केवल अम्बर, विपदाएँ दूध पिलाती हैं, लोरी आँधियाँ सुनाती हैं।

श्रीमती चिटनिस ने संदेश में अंत में कहा है कि आएं इस संकल्प के साथ जीयें हम कि जहां, जैसे और जिन भी परिस्थितियों में हैं अपना सर्वश्रेष्ठ देते रहे। हम भारतीय पुरुषार्थ, पराक्रम व परिश्रम की पराकाष्ठा कर अपनी वसुधा, अपने देश, अपने प्रदेश को सुफल, समृद्ध व सुंदर करें।

अर्चना चिटनिस द्वारा प्रतिवर्ष अपने परिचितजनों को देश-प्रदेश में रक्षा सूत्र और शुभकामना संदेश विगत 27 वर्षों से लगातार प्रेषित किए जाते है। देश, प्रदेश, निमाड़, खंडवा और बुरहानपुर क्षेत्र के हर गांव और नगर के हर गली-मोहल्ले में अपने परिचितजनों को राखी (रक्षा बंधन) की शुभकामना संदेश त्यौहार से पूर्व या आगामी एक पखवाड़े तक भेजा जाता है। दीदी से सालों-साल अनवरत् रक्षा सूत्र प्राप्त करते करते अब तो सैंकड़ों भाई व उनका परिवार दीदी की इस राखी का इंतजार करने लगे हैं। वैसे भी अर्चना दीदी को लोग किसी पद के नाते से बाद में और पहले अपनी बहन के नाते से ही भाव प्रकट करते हैं। यह आत्मीयता का भाव सार्वजनिक जीवन में अपने आप में एक मिसाल है।

जब बहनें अपने भाई की कलाई पर बांधने हेतु परिवार में ही अपना त्यौहार मनाने के लिए व्यस्त होती है। तब एक, दो-चार नहीं असंख्य भाईयों और स्नेही स्वजनों को परिवारिक रूप से घर-घर रक्षा बंधन का ये नमन कठिन और चुनौतीपूर्ण प्रयास होता है। इस प्रयास में अपने घनिष्ठ, चिर-परिचितों की इतनी लंबी सूची को प्रति वर्ष बढ़ाना, सुधारना और फिर भी कई स्नेहीजनों का छूट जाना इस प्रक्रिया में स्वाभाविक है। जिस पर अर्चना दीदी को लगातार धन्यवाद या संदेश प्राप्ति में चूक की उलाहना के स्वर श्रावण मास के बाद प्रायः श्रवण करना पड़ते है। जिससे उनको अपनी सूची सुधार और संपर्क विस्तार का भी लगातार अवसर मिलता है।

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