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फीस में ‘लूट’ पर शिक्षा विभाग सख्त: 10% से ज्यादा वसूली पर सेंट टेरेसा स्कूल पर 2 लाख का जुर्माना

- दो सत्रों में 3.25 लाख रुपए ज्यादा वसूले, 30 दिन में पालकों को लौटाने का आदेश; नियम तोड़ने वालों पर सख्ती के संकेत

बुरहानपुर। शिक्षा के नाम पर मनमानी फीस वसूली करने वाले निजी स्कूलों पर अब प्रशासन ने सख्त रुख अपना लिया है। बुरहानपुर में जिला समिति की जांच के बाद अशासकीय सेंट टेरेसा हायर सेकेंडरी स्कूल पर बड़ी कार्रवाई करते हुए ₹2 लाख का जुर्माना ठोक दिया गया है।

मामला उस समय सामने आया जब शिकायतों के आधार पर जांच में पाया गया कि स्कूल प्रबंधन ने लगातार दो शैक्षणिक सत्रों (2022-23 और 2023-24) में निर्धारित सीमा से अधिक फीस वसूली कर नियमों की खुली अवहेलना की।

जांच में उजागर हुई ‘फीस की हकीकत’

शासन के निर्देश पर गठित जिला स्तरीय समिति ने पूरे मामले की बारीकी से जांच की। जांच में यह स्पष्ट हुआ कि स्कूल ने 10 प्रतिशत की अधिकतम सीमा को पार करते हुए अतिरिक्त फीस वसूली की। इसे गंभीर अनियमितता मानते हुए समिति ने प्रथम प्रतिदाय आदेश जारी किया और सीधे आर्थिक दंड लगाते हुए कार्रवाई की।

पालकों को लौटेंगे 3.25 लाख रुपए

जिला शिक्षा अधिकारी सुश्री रोहिणी पवार ने बताया कि सत्र 2022-23 में ₹95,150, और सत्र 2023-24 में ₹2,30,420 कुल ₹3,25,570 अतिरिक्त फीस वसूली गई है। अब स्कूल को निर्देश दिए गए हैं कि यह पूरी राशि 30 दिनों के भीतर संबंधित छात्रों/पालकों को वापस की जाए। साथ ही, राशि लौटाने के बाद पावती सहित विस्तृत प्रतिवेदन जिला समिति के समक्ष प्रस्तुत करना अनिवार्य किया गया है।

अब नहीं चलेगी मनमानी

इस कार्रवाई के बाद जिला शिक्षा अधिकारी सुश्री रोहिणी पवार ने स्पष्ट कर दिया है कि फीस के नाम पर किसी भी प्रकार की मनमानी बर्दाश्त नहीं की जाएगी सूत्रों के अनुसार, अब जिले के अन्य निजी स्कूलों की भी फीस संरचना की निगरानी तेज की जाएगी और शिकायत मिलने पर इसी तरह की कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

नियम क्या कहते हैं?
  • निजी स्कूल हर साल अधिकतम 10% तक ही फीस बढ़ा सकते हैं
  • इससे अधिक वृद्धि के लिए जिला समिति की अनुमति अनिवार्य
  • उल्लंघन पर जुर्माना + अतिरिक्त राशि की वापसी तय
क्यों अहम है यह कार्रवाई?

बुरहानपुर में लंबे समय से पालकों द्वारा फीस वृद्धि को लेकर नाराजगी जताई जा रही थी। ऐसे में यह कार्रवाई पालकों को राहत देने वाली, शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता लाने वाली, निजी स्कूलों के लिए सख्त चेतावनी मानी जा रही है।

मनमानी कमाई का खेल

शिक्षा विभाग का यह कदम साफ संकेत है कि अब शिक्षा के नाम पर ‘मनमानी कमाई’ का खेल ज्यादा दिन नहीं चलने वाला। अगर इसी तरह लगातार निगरानी और कार्रवाई जारी रही, तो निजी स्कूलों की फीस व्यवस्था में बड़ा सुधार देखने को मिल सकता है।

 

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