बुरहानपुर। दाऊदी बोहरा समाज के पवित्र उर्स के मौके पर बुरहानपुर ने वह नजारा देखा, जहां आस्था ने भावनाओं का रूप ले लिया। रविवार देर रात दाऊदी बोहरा समाज के 53वें धर्मगुरु मुफद्दल सैफुद्दीन के शहर आगमन के साथ ही पूरा शहर “मौला-मौला” के नारों से गूंज उठा।
घर-घर पहुंचे मौला, हर दिल को छू गई मुलाकात
दाऊदी बोहरा जमात PRO कमेटी कोऑडिनेटर तफज्जुल हुसैन मुलायमवाला ने जानकरी देते हुए बताया कि सोमवार को सैय्यदना साहब ने अनुयायियों के घर-घर पहुंचकर उन्हें दुआएं और आशीर्वाद दिया। दरगाह-ए-हकीमी से निकला काफिला चंद्रकांता, दाऊदपुरा, इतवारा, बेरी मैदान, राजपुरा, लालबाग रोड, हमीदपुरा और गोटियापीर जैसे इलाकों से गुजरा, जहां हर गली, हर चौक पर अनुयायी बेसब्री से इंतजार करते नजर आए।
दीदार हुआ तो थम नहीं पाए आंसू
जैसे ही मौला की नजर अनुयायियों पर पड़ी, भावनाओं का सैलाब उमड़ पड़ा। कई घरों में तो यह दृश्य देखने को मिला कि लोग अपने आंसू नहीं रोक पाए और हाथ उठाकर शुक्र अदा करते रहे। जिस घर में मौला के कदम पड़े, वहां बरसों की मुराद पूरी होने का एहसास दिखा।
मगरिब की नमाज में हजारों की मौजूदगी
शाम को दरगाह-ए-हकीमी स्थित मस्जिद में मुफद्दल सैफुद्दीन ने हजारों अनुयायियों के साथ मगरिब की नमाज अदा करवाई। नमाज के बाद दीदार के लिए उमड़ी भीड़ ने पूरे परिसर को आस्था के महासागर में बदल दिया।
सुरक्षा और व्यवस्थाओं की कड़ी निगरानी
सैय्यदना साहब के आगमन को लेकर जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन पूरी तरह सतर्क रहा। हर मार्ग पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए, वहीं बोहरा समाज के विशेष सुरक्षा बल भी लगातार मुस्तैद नजर आए।
शहर बना आस्था का केंद्र
पूरे आयोजन के दौरान बुरहानपुर की सड़कों पर केवल भीड़ नहीं, बल्कि श्रद्धा, विश्वास और अपनापन बहता नजर आया। जहां एक ओर अनुयायियों की आंखों में खुशी के आंसू थे, वहीं दूसरी ओर मौला के सानिध्य ने हर दिल को सुकून से भर दिया। यह केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आस्था और अपने धर्मगुरु के प्रति गहरे जुड़ाव का जीवंत उदाहरण बनकर सामने आया। बुरहानपुर ने एक बार फिर साबित कर दिया—यह शहर केवल इतिहास नहीं, बल्कि जीवंत आस्था की पहचान भी है।