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अफसरों की तनातनी में कर्मचारी पिटा! स्वास्थ्य विभाग की अंदरूनी लड़ाई सड़क पर आई

- सीएमएचओ ऑफिस में पदस्थ सहायक ग्रेड तीन कर्मचारी का आरोप- सिविल सर्जन, आरएमओ ने घर पर गुंडे भेजे,

  • सीएमएचओ दफ्तर से लेकर थाने तक हंगामा, कर्मचारी ने लगाए गंभीर आरोप

  • आरएमओ बोले, आरोप निराधार, दोनों पक्षों ने पुलिस में दिया लिखित आवेदन

बुरहानपुर। स्वास्थ्य विभाग में चल रही अफसरशाही की गुटबाजी अब खुलकर सड़क पर आ गई है। वरिष्ठ अधिकारियों के बीच चल रही वर्चस्व की जंग का ताजा शिकार बना सीएमएचओ कार्यालय में पदस्थ सहायक ग्रेड-3 कर्मचारी योगेश गोस्वामी, जिसने सीधे-सीधे सिविल सर्जन डॉ. प्रदीप कुमार मोसेस और आरएमओ डॉ. भूपेंद्र गौर पर गुंडे भेजकर जानलेवा हमला कराने के आरोप लगाए हैं।

मामले ने उस वक्त सनसनी फैला दी जब पीड़ित कर्मचारी ने लालबाग थाने में लिखित शिकायत दी और कहा कि उसके दोस्त को करीब 15 लोगों ने लोहे के पाइप से पीटा, जबकि वह खुद भी हमले का निशाना बना।

दरअसल घटना शुक्रवार रात करीब 11 बजे की है। योगेश गोस्वामी के मुताबिक वह घर के बाहर फोन पर बात कर रहा था, तभी सिविल सर्जन ने कुछ कहा। बात साफ न होने पर उसने अपने दोस्त को बुलाया। आरोप है कि तभी रास्ते में उसके दोस्त को रोककर हमलावरों ने बेरहमी से पीटा। पीड़ित का दावा है कि उनके पास हमले का वीडियो सबूत भी मौजूद है।

गोस्वामी का कहना है कि यह हमला सामान्य विवाद नहीं बल्कि स्वास्थ्य विभाग के दो बड़े अफसरों के बीच चल रही खींचतान का नतीजा है। पीड़ित ने पुलिस को दिए बयान में कहा सीएमएचओ और सिविल सर्जन के बीच पटरी नहीं बैठ रही, उसी की कीमत हमें चुकानी पड़ रही है।

आरएमओ का पलटवार— आरोप झूठे

आरएमओ डॉ. भूपेंद्र गौर ने आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा कि वहां कुछ लोग शराब पीकर पार्टी कर रहे थे और सीसीएचबी ब्लॉक को नुकसान व चोरी की आशंका थी। इसी कारण उन्होंने खुद डायल-112 पर पुलिस को बुलाया। उन्होंने कहा न कोई गुंडा बुलाया गया, न किसी को पिटवाया गया। सिर्फ अस्पताल के गार्ड थे। बाहर से कोई नहीं था। हमने भी थाने में लिखित शिकायत दी है।

अफसरों की लड़ाई में बिगड़ रहा पूरा सिस्टम

सूत्रों के मुताबिक पिछले कुछ समय से स्वास्थ्य विभाग के शीर्ष अफसरों के बीच नोटिस, जांच और आरोप-प्रत्यारोप का दौर चल रहा है। यही अंदरूनी लड़ाई अब कर्मचारियों पर टूटने लगी है। एक तरफ कर्मचारी सड़क पर पिट रहे हैं, दूसरी तरफ अफसर एक-दूसरे पर आरोप लगाकर खुद को बचाने में लगे हैं।

अब पुलिस के पास दोनों पक्षों की लिखित शिकायतें हैं। जांच जारी है, लेकिन सवाल यह है कि क्या स्वास्थ्य विभाग में अफसरों की लड़ाई आम कर्मचारियों की सुरक्षा से ज्यादा बड़ी हो गई है? यह मामला सिर्फ एक मारपीट नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की साख पर सवाल बनकर खड़ा हो गया है।

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