बुरहानपुर। बुरहानपुर में गरीब और अल्पशिक्षित लोगों को झांसा देकर प्लॉट बेचने के नाम पर ठगी करने वाले तीन आरोपियों को आखिरकार सजा मिल गई। माननीय न्यायालय प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट ने आरोपियों को दोषी मानते हुए धारा 420 भादवि के तहत 2-2 साल के कठोर कारावास और 1000-1000 रुपए के जुर्माने की सजा सुनाई है।
कैसे हुआ पूरा फर्जीवाड़ा?
फरियादी अब्दुल मलिक ने थाना गणपति नाका में शिकायत दर्ज कराई थी कि वह एक गरीब और अल्पशिक्षित व्यक्ति है। आरोपियों मोहम्मद हारून, मोहम्मद सादिक और मोहम्मद जाहिर ने उसे ताजनगर लोधीपुरा में प्लॉट देने का झांसा दिया। आरोपियों ने खुद के नाम से कार्ड छपवाए। कॉलोनी को पूरी तरह कानूनी बताया। 216 प्लॉट की फर्जी योजना दिखाई और कार्ड नंबर 31 में एक प्लॉट दिखाकर सौदा किया। इसके बाद 2013 से 2016 के बीच किस्तों में 1,25,400 रुपए वसूल लिए।
सच्चाई सामने आते ही खुला खेल
बाद में जांच में सामने आया कि कॉलोनी का ले-आउट मंजूर नहीं था। डायवर्सन तक नहीं कराया गया था। प्लॉट पूरी तरह अवैध तरीके से बेचे गए। इतना ही नहीं, आरोपियों ने इसी तरह कई अन्य गरीब लोगों को भी ठगा, जिनके अलग-अलग आवेदन भी सामने आए।
एक नहीं, कई शिकार… बढ़ता गया ठगी का नेटवर्क
जांच के दौरान सामने आया कि आरोपी सिर्फ एक व्यक्ति तक सीमित नहीं थे। इसी तरह कई अन्य गरीब लोगों से भी रकम ऐंठी गई। पीड़ितों ने अलग-अलग आवेदन देकर शिकायत दर्ज कराई। इससे साफ है कि यह कोई एक घटना नहीं, बल्कि संगठित तरीके से चल रहा ठगी का नेटवर्क था।
पुलिस-प्रशासन की सख्ती और मजबूत पैरवी
मामले में थाना गणपति नाका में अपराध क्रमांक 83/2020 दर्ज कर धारा 420, 406, 34 भादवि के तहत जांच की गई। अभियोजन पक्ष से सहायक जिला अभियोजन अधिकारी नीरज डावर ने प्रभावी और मजबूत पैरवी की, जिसके चलते कोर्ट ने आरोपियों को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई। इस फैसले से साफ हो गया है कि गरीबों के साथ धोखाधड़ी करने वालों को अब बख्शा नहीं जाएगा। फर्जी कॉलोनी और अवैध प्लॉटिंग पर कानून का शिकंजा कसता जा रहा है।