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बक्खारी में किसान ने की आत्महत्या की कोशिश-कहा, कर्ज से परेशान हूं, 4 हजार केली भी तबाह हो गई 

जिले में 25 मई को आई थी प्राकृतिक आपदा, 64 गांवों के किसानों की केला फसल हुई है खराब बुरहानपुर। मैं कर्ज से परेशान हूं। कर्जदार मुझसे तकादा न करें इसलिए यह कदम उठाया। मेरी 4 हजार केली आंधी तूफान के कारण बर्बाद हो गई। यह कहना है ग्राम बक्खारी के एक किसान

On: May 31, 2024 8:24 PM
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  • जिले में 25 मई को आई थी प्राकृतिक आपदा, 64 गांवों के किसानों की केला फसल हुई है खराब

बुरहानपुर। मैं कर्ज से परेशान हूं। कर्जदार मुझसे तकादा न करें इसलिए यह कदम उठाया। मेरी 4 हजार केली आंधी तूफान के कारण बर्बाद हो गई। यह कहना है ग्राम बक्खारी के एक किसान का जिसकी 4 हजार केली आंधी, तूफान में बर्बाद हो गई। आहत होकर उसने आत्महत्या करने जैसा कदम उठा लिया। उसका कहना है कि कर्ज लेकर फसल को सींचा था, लेकिन प्राकृतिक आपदा ने सब कुछ तबाह कर दिया।
Sadaiv Newsदरअसल 25 मई को जिले में आंधी, तूफान के कारण केला फसल को नुकसान पहुंचा है। ऐसे में करीब 65 से अधिक गांवों के किसान नुकसानी में आ गए हैं। इसी बीच ग्राम बक्खारी के किसान ने कर्ज में डूबे होने के बाद केला फसल भी खराब होने पर आत्महत्या का प्रयास किया। हालंकि उसकी जान बच गई। उसे परिजन ने बुरहानपुर जिला अस्पताल में भर्ती कराया है। जहां उपचार के बाद उसकी स्थिति में सुधार है।
कीटनाशक दवा पीकर जान देने का प्रयास किया
ग्राम बक्खारी निवासी किसान सुपडू तुकाराम ने अपने खेत में 4000 हजार केली लगा रखी थी। 25 मई की शाम 5 बजे आए आंधी तूफान से किसान के खेत में लगी केली की फसल पूरी बर्बाद हो गई। किसान ने बताया उसने कर्ज लेकर केली लगाई थी। कर्जे वाले लगातार परेशान करेंगे इसलिए किसान ने गुरूवार रात कीटनाशक दवा का सेवन कर अपनी जीवन लीला समाप्त करने की कोशिश की। स्वास्थ्य बिगड़ने पर परिजनों ने किसान को जिला अस्पताल में उपचार के लिए कराया भर्ती जहां पर उनका उपचार जारी है। पुलिस द्वारा मामले की जांच की जा रही है।
अन्नदाताओं के साथ हो रहा सौतेलापन
इसे लेकर कांग्रेस नेता अजय सिंह रघुवंशी ने कहा-अन्नदाताओं के साथ सौतेला व्यवहार किया जा रहा है। प्राकृतिक आपदा से किसानों की फसलों का जो नुकसान हुआ है उसका सही आकलन कर मुआवजा दिया जाए। सही सर्वे नहीं करने से किसानों को मुआवजा नहीं मिल पा रहा है। पिछली बार भी आई आपदा से सैकड़ों किसानों की फसल जमींदोज हो गई थी। उस समय भी भाजपा की सरकार थी और किसानों को ऊंट के मुंह में जीरे के सामान मुआवजा दिया गया था।
जिले के गांवों में हो रहा सर्वे
25 मई को शाम 5 बजे अचानक मौसम का मिजाज बदला और हवा, आंधी चलने लगी थी। दूसरे दिन पता चला 64 गांवों में केला फसल तबाह हो गई है। कहीं 50 तो कहीं 100 फीसदी तक भी नुकसान पहुचा है। जिला प्रशासन द्वारा नुकसानी का सर्वे कराया जा रहा है।
नहीं मिलता बीमा का लाभ
केला फसल पर किसानों को बीमा का लाभ नहीं मिलता। इसके कारण अब किसान आत्महत्या जैसा कदम उठाने को मजबूर हो रहे हैं। 2019 में केवल एक बार किसानों को फसल बीमा का लाभ मिला था। इसके बाद सोसायटियों ने प्रीमियम वापस लौटा दिया था। किसान तब से मांग कर रहे हैं कि फसल बीमा का लाभ दिलाया जाए, लेकिन पड़ोसी राज्य महाराष्ट्र में बीमा मिल रहा है जबकि मप्र में नहीं मिल रहा है।

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